
नेतन्याहू ने 98 सुनवाई के बाद भ्रष्टाचार मुकदमे में अपनी गवाही पूरी की
इज़राइल के प्रधानमंत्री ने तीन भ्रष्टाचार मामलों में बचाव पक्ष की ओर से अंतिम बयान दिया; अब अन्य गवाहों की सुनवाई होगी और फैसला आने में महीने लग सकते हैं।
इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बुधवार को तेल अवीव जिला अदालत में अपनी आपराधिक सुनवाई के दौरान गवाही पूरी कर ली। दिसंबर 2024 से अब तक वे 98 दिन कठघरे में खड़े रहे, जिसमें अभियोजन पक्ष ने जून 2025 से मध्य जून 2026 तक 59 दिनों की जिरह की। अंतिम सुनवाई सीमित पुनर्परीक्षण तक सीमित रही, जो जिरह के दौरान उठे मुद्दों को स्पष्ट करने के लिए थी। यह मुकदमा 2020 में तीन अलग-अलग प्रकरणों—1000, 2000 और 4000—में दायर आरोपों पर आधारित है, जिनमें धोखाधड़ी, विश्वास भंग और केस 4000 में रिश्वत के आरोप शामिल हैं। नेतन्याहू पद पर रहते हुए आपराधिक मुकदमे का सामना करने वाले इज़राइल के पहले प्रधानमंत्री हैं।
नेतन्याहू और उनके बचाव पक्ष ने पूरी प्रक्रिया को राजनीतिक षड्यंत्र बताया। उन्होंने कहा, "वे एक व्यक्ति की तलाश कर रहे थे, अपराध की नहीं," और अभियोजन की तुलना पूर्वी जर्मनी की गुप्त पुलिस स्टासी से की। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने "दस साल का नरक" झेला है। प्रकरण 1000 में अरबपतियों से मिले उपहारों को उन्होंने मित्रता का हिस्सा बताया, प्रकरण 2000 में मीडिया सौदे को सामान्य राजनीतिक वार्ता, और प्रकरण 4000 में वाला वेबसाइट को शत्रुतापूर्ण बताकर किसी भी नियामकीय एहसान से इनकार किया। दूसरी ओर, इज़राइली अभियोजन पक्ष का तर्क है कि तीनों प्रकरणों को एक साथ देखने पर एक पैटर्न उभरता है—व्यक्तिगत संबंध, मीडिया हित और सरकारी फैसले बार-बार एक ही बिंदु पर मिलते हैं। अभियोजकों ने नेतन्याहू की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए पुलिस पूछताछ में 1,788 बार "मुझे याद नहीं" कहने की ओर इशारा किया।
मुकदमे का अगला चरण अब बचाव पक्ष के शेष गवाहों की सुनवाई का है, जो यरुशलम जिला अदालत में होगी। साक्ष्य चरण समाप्त होने के बाद दोनों पक्ष सारांश प्रस्तुत करेंगे, और तीन न्यायाधीशों की पीठ फैसला सुनाएगी। दोषी पाए जाने पर नेतन्याहू को कारावास का सामना करना पड़ सकता है। यह कानूनी प्रक्रिया ऐसे समय में आगे बढ़ रही है जब इज़राइल में नेतन्याहू की राजनीतिक स्थिति कमज़ोर दिखती है। हिब्रू विश्वविद्यालय के एक हालिया सर्वेक्षण के अनुसार, 92 प्रतिशत इज़राइली मानते हैं कि ईरान हाल की लड़ाई में विजयी रहा, और नेतन्याहू के नेतृत्व को समर्थन मार्च के 40.5 प्रतिशत से गिरकर जून में 29.4 प्रतिशत पर आ गया। अक्तूबर में आम चुनाव होने हैं, और अक्टूबर 2023 के हमास हमले की सुरक्षा विफलताओं पर जन आक्रोश अब भी कायम है।
भारतीय रणनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, नेतन्याहू का राजनीतिक भविष्य भारत-इज़राइल रक्षा और प्रौद्योगिकी सहयोग को प्रभावित कर सकता है, क्योंकि वे इस साझेदारी के प्रमुख वास्तुकार रहे हैं। मुकदमे की कार्यवाही गाज़ा, लेबनान और ईरान से जुड़े युद्धों तथा सुरक्षा बैठकों के कारण कई बार स्थगित हुई। अमेरिका-ईरान समझौता, जिसे इज़राइल में व्यापक रूप से राष्ट्रीय हितों के प्रतिकूल माना जा रहा है, ने भी जनता की नाराज़गी बढ़ाई है। फिलहाल, अदालत ने अगली तारीखें निर्धारित नहीं की हैं, लेकिन विधिक प्रक्रिया के कई महीने और चलने की संभावना है। यह ऐतिहासिक मुकदमा इज़राइली राजनीति की दशा और दिशा दोनों को प्रभावित करने की क्षमता रखता है।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| इज़राइली प्रेस | 0.00 | neutral |
Netanyahu speaks for Israel: no concessions, only force. His tone is that of a military commander, not a head of government under judicial pressure.
The prime minister's figure is merged with the entire state, turning his statements into immutable official positions. Any criticism of Netanyahu is implicitly equated with an attack on Israel.
The ongoing criminal trial is omitted, which makes these statements also a defensive strategy to shore up domestic support.
Netanyahu maneuvers between internal crises and external dialogues; the Israeli press follows his moves with analytical detachment, without taking a clear stance.
News is ordered by priority: first the premier's political survival, then security threats, finally the judicial implications. This implicit order normalizes the crisis as routine governance.
The content of Netanyahu's criminal trial is not explored, reducing the legal issue to a secondary background compared to political and security urgencies.
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