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स्वास्थ्य और विज्ञानमंगलवार, 16 जून 2026

सुबह की आदतें ही तय करती हैं दिनभर की ऊर्जा और दीर्घायु: नाश्ते का समय, नींद और कॉफी का विज्ञान

अमेरिकी शोध से लेकर ईरानी परंपरा तक, नए अध्ययन बता रहे हैं कि सुबह की छोटी-छोटी आदतें हृदय रोग, मधुमेह और यहां तक कि असमय मृत्यु के जोखिम को कैसे प्रभावित करती हैं।

अगर आप दिनभर उनींदे रहते हैं या शाम ढलते ही अचानक तेज़ भूख महसूस करते हैं, तो इसकी जड़ संभवतः आपकी सुबह की आदतों में छिपी है। अमेरिका के मास जनरल ब्रिघम शोध केंद्र के एक व्यापक अध्ययन ने अब इस धारणा को ठोस वैज्ञानिक आधार दे दिया है। वृद्धजनों पर किए गए इस शोध में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से देर से नाश्ता करते हैं, उनमें समय के साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और यहां तक कि मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है। यह निष्कर्ष केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं है; दुनियाभर के विशेषज्ञ अब इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि सुबह के पहले कुछ घंटे हमारे पूरे दिन की जैविक लय, हार्मोन संतुलन और चयापचय दर को निर्धारित करते हैं।

इंडोनेशिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में अत्यधिक नींद आने का सबसे आम कारण अपर्याप्त रात्रि विश्राम है—एक वयस्क को प्रतिदिन सात से नौ घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। लेकिन केवल नींद की अवधि ही नहीं, जागने के बाद का पहला घंटा भी महत्वपूर्ण है। दक्षिण अमेरिका से आती एक चिकित्सकीय सलाह इसी ओर इशारा करती है: अर्जेंटीना की पारिवारिक डॉक्टर अमारा अलादेल का कहना है कि यदि आपको शाम पाँच बजे तीव्र भूख लगती है, तो गलती सुबह नौ बजे के नाश्ते में हुई। कम तृप्ति देने वाले खाद्य पदार्थ, जैसे शर्करा युक्त अनाज या सफ़ेद ब्रेड, रक्त शर्करा में तेज़ उछाल लाकर कुछ ही घंटों में उसे गिरा देते हैं, जिससे दोपहर बाद अचानक भूख और थकान घेर लेती है। इसी कड़ी में, इंडोनेशियाई विशेषज्ञ सुबह उठते ही कॉफी पीने की आदत पर चेतावनी देते हैं। शरीर जागने पर स्वाभाविक रूप से कोर्टिसोल हार्मोन स्रावित करता है, जो हमें प्राकृतिक रूप से सतर्क करता है। तुरंत कैफ़ीन लेने से यह प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होती है और समय के साथ कैफ़ीन पर निर्भरता बढ़ती है। विशेषज्ञ जागने के कम से कम एक-डेढ़ घंटे बाद पहली कॉफी लेने की सलाह देते हैं।

ईरान से एक धार्मिक-वैज्ञानिक दृष्टिकोण इस बहस को और गहराई देता है। सेनेगल के इस्लामी शोध केंद्र के निदेशक शेख़ शरीफ़ मबालू ने आधुनिक विज्ञान और धार्मिक शिक्षाओं का हवाला देते हुए फज्र की नमाज़ और उसके बाद जागते रहने को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आजीविका में वृद्धि की कुंजी बताया है। उनका तर्क है कि सुबह का वह संक्षिप्त समय एक ‘राजसी द्वार’ की तरह है, जो रोज़ खुलता है और जो उसमें प्रवेश करता है वह सेहत और बरकत के खज़ाने पा लेता है। यह परंपरागत ज्ञान अब आधुनिक क्रोनोबायोलॉजी से मेल खाता है, जो बताती है कि सूर्योदय के आसपास का समय हमारी सर्केडियन लय के लिए सबसे शक्तिशाली सिंक्रोनाइज़र है।

भारत और दक्षिण एशिया के संदर्भ में ये निष्कर्ष और भी प्रासंगिक हो जाते हैं, जहाँ मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यहाँ पारंपरिक जीवनशैली में सुबह जल्दी उठना और पौष्टिक नाश्ता शामिल था, लेकिन शहरीकरण और बदलते कार्य शेड्यूल ने इन आदतों को कमज़ोर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में अब केवल ‘क्या खाएँ’ नहीं, बल्कि ‘कब खाएँ’ और ‘कैसे जागें’ पर भी ध्यान देना होगा। सुबह की दिनचर्या में छोटे बदलाव—जैसे जागने के बाद पानी पीना, प्रोटीन और फाइबर युक्त नाश्ता करना, और कैफ़ीन का सेवन टालना—दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। आने वाले वर्षों में, व्यक्तिगत क्रोनोटाइप के अनुसार भोजन और नींद की सिफ़ारिशें चिकित्सा का हिस्सा बन सकती हैं, जिससे हर व्यक्ति अपनी जैविक घड़ी के साथ तालमेल बिठाकर अधिक ऊर्जावान और स्वस्थ जीवन जी सके।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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64%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
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pragmatismoallarme

सुबह जल्दी उठना स्वास्थ्य के लिए निर्णायक है। बहुत से लोग दिन में नींद आने की समस्या से जूझते हैं, जो अंतर्निहित समस्याओं या गलत आदतों का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञ जागने के तुरंत बाद कॉफी पीने की सलाह नहीं देते, क्योंकि यह शरीर की प्राकृतिक जागृति प्रक्रिया में बाधा डालता है।

Stampa iraniana e affini/ regime
trionfopaternalismoallarme

सुबह की नमाज़ के लिए भोर में उठना शारीरिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिक शांति और आजीविका की कुंजी है। फ़ज्र के बाद सोना एक छिपी हुई वंचना बताया गया है जो सफलता के आवश्यक तत्वों को छीन लेती है। वैज्ञानिक निष्कर्ष यह भी चेतावनी देते हैं कि बुढ़ापे में नाश्ता देर से करने से मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।

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मंगलवार, 16 जून 2026

सुबह की आदतें ही तय करती हैं दिनभर की ऊर्जा और दीर्घायु: नाश्ते का समय, नींद और कॉफी का विज्ञान

अमेरिकी शोध से लेकर ईरानी परंपरा तक, नए अध्ययन बता रहे हैं कि सुबह की छोटी-छोटी आदतें हृदय रोग, मधुमेह और यहां तक कि असमय मृत्यु के जोखिम को कैसे प्रभावित करती हैं।

अगर आप दिनभर उनींदे रहते हैं या शाम ढलते ही अचानक तेज़ भूख महसूस करते हैं, तो इसकी जड़ संभवतः आपकी सुबह की आदतों में छिपी है। अमेरिका के मास जनरल ब्रिघम शोध केंद्र के एक व्यापक अध्ययन ने अब इस धारणा को ठोस वैज्ञानिक आधार दे दिया है। वृद्धजनों पर किए गए इस शोध में पाया गया कि जो लोग नियमित रूप से देर से नाश्ता करते हैं, उनमें समय के साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और यहां तक कि मृत्यु का खतरा भी बढ़ जाता है। यह निष्कर्ष केवल बुज़ुर्गों तक सीमित नहीं है; दुनियाभर के विशेषज्ञ अब इस बात पर ज़ोर दे रहे हैं कि सुबह के पहले कुछ घंटे हमारे पूरे दिन की जैविक लय, हार्मोन संतुलन और चयापचय दर को निर्धारित करते हैं।

इंडोनेशिया के स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, दिन में अत्यधिक नींद आने का सबसे आम कारण अपर्याप्त रात्रि विश्राम है—एक वयस्क को प्रतिदिन सात से नौ घंटे की नींद की आवश्यकता होती है। लेकिन केवल नींद की अवधि ही नहीं, जागने के बाद का पहला घंटा भी महत्वपूर्ण है। दक्षिण अमेरिका से आती एक चिकित्सकीय सलाह इसी ओर इशारा करती है: अर्जेंटीना की पारिवारिक डॉक्टर अमारा अलादेल का कहना है कि यदि आपको शाम पाँच बजे तीव्र भूख लगती है, तो गलती सुबह नौ बजे के नाश्ते में हुई। कम तृप्ति देने वाले खाद्य पदार्थ, जैसे शर्करा युक्त अनाज या सफ़ेद ब्रेड, रक्त शर्करा में तेज़ उछाल लाकर कुछ ही घंटों में उसे गिरा देते हैं, जिससे दोपहर बाद अचानक भूख और थकान घेर लेती है। इसी कड़ी में, इंडोनेशियाई विशेषज्ञ सुबह उठते ही कॉफी पीने की आदत पर चेतावनी देते हैं। शरीर जागने पर स्वाभाविक रूप से कोर्टिसोल हार्मोन स्रावित करता है, जो हमें प्राकृतिक रूप से सतर्क करता है। तुरंत कैफ़ीन लेने से यह प्राकृतिक प्रक्रिया बाधित होती है और समय के साथ कैफ़ीन पर निर्भरता बढ़ती है। विशेषज्ञ जागने के कम से कम एक-डेढ़ घंटे बाद पहली कॉफी लेने की सलाह देते हैं।

ईरान से एक धार्मिक-वैज्ञानिक दृष्टिकोण इस बहस को और गहराई देता है। सेनेगल के इस्लामी शोध केंद्र के निदेशक शेख़ शरीफ़ मबालू ने आधुनिक विज्ञान और धार्मिक शिक्षाओं का हवाला देते हुए फज्र की नमाज़ और उसके बाद जागते रहने को शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक शांति और आजीविका में वृद्धि की कुंजी बताया है। उनका तर्क है कि सुबह का वह संक्षिप्त समय एक ‘राजसी द्वार’ की तरह है, जो रोज़ खुलता है और जो उसमें प्रवेश करता है वह सेहत और बरकत के खज़ाने पा लेता है। यह परंपरागत ज्ञान अब आधुनिक क्रोनोबायोलॉजी से मेल खाता है, जो बताती है कि सूर्योदय के आसपास का समय हमारी सर्केडियन लय के लिए सबसे शक्तिशाली सिंक्रोनाइज़र है।

भारत और दक्षिण एशिया के संदर्भ में ये निष्कर्ष और भी प्रासंगिक हो जाते हैं, जहाँ मधुमेह, मोटापा और हृदय रोग तेज़ी से बढ़ रहे हैं। यहाँ पारंपरिक जीवनशैली में सुबह जल्दी उठना और पौष्टिक नाश्ता शामिल था, लेकिन शहरीकरण और बदलते कार्य शेड्यूल ने इन आदतों को कमज़ोर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों में अब केवल ‘क्या खाएँ’ नहीं, बल्कि ‘कब खाएँ’ और ‘कैसे जागें’ पर भी ध्यान देना होगा। सुबह की दिनचर्या में छोटे बदलाव—जैसे जागने के बाद पानी पीना, प्रोटीन और फाइबर युक्त नाश्ता करना, और कैफ़ीन का सेवन टालना—दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव डाल सकते हैं। आने वाले वर्षों में, व्यक्तिगत क्रोनोटाइप के अनुसार भोजन और नींद की सिफ़ारिशें चिकित्सा का हिस्सा बन सकती हैं, जिससे हर व्यक्ति अपनी जैविक घड़ी के साथ तालमेल बिठाकर अधिक ऊर्जावान और स्वस्थ जीवन जी सके।

स्रोतों में मतभेद

स्वास्थ्य और विज्ञान · 4 स्रोत · 3 भाषाएँ

64%उच्च

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक40%
न्यूनत्र40%
निंदक20%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
Stampa sud-est asiaticaStampa iraniana e affini
Stampa sud-est asiatica
pragmatismoallarme

सुबह जल्दी उठना स्वास्थ्य के लिए निर्णायक है। बहुत से लोग दिन में नींद आने की समस्या से जूझते हैं, जो अंतर्निहित समस्याओं या गलत आदतों का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञ जागने के तुरंत बाद कॉफी पीने की सलाह नहीं देते, क्योंकि यह शरीर की प्राकृतिक जागृति प्रक्रिया में बाधा डालता है।

Stampa iraniana e affini/ regime
trionfopaternalismoallarme

सुबह की नमाज़ के लिए भोर में उठना शारीरिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिक शांति और आजीविका की कुंजी है। फ़ज्र के बाद सोना एक छिपी हुई वंचना बताया गया है जो सफलता के आवश्यक तत्वों को छीन लेती है। वैज्ञानिक निष्कर्ष यह भी चेतावनी देते हैं कि बुढ़ापे में नाश्ता देर से करने से मृत्यु का जोखिम बढ़ जाता है।

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