
जापान में तीन दशक बाद सर्वोच्च ब्याज दर की ओर कदम, गवर्नर की गैरमौजूदगी में अहम बैठक
जापान का केंद्रीय बैंक 30 साल के उच्चतम स्तर पर दर ले जाने को तैयार, मध्य पूर्व में युद्ध और अमेरिका-ईरान समझौते के बीच वैश्विक मौद्रिक नीति में विरोधाभासी रुख।
सोमवार को बैंक ऑफ जापान (बीओजे) की दो दिवसीय नीतिगत बैठक शुरू हुई, जिसमें दर को 0.75 से बढ़ाकर 1 प्रतिशत करने की व्यापक उम्मीद है—यह 1995 के बाद सर्वोच्च स्तर होगा। गवर्नर काजुओ उएदा लीवर संक्रमण के इलाज के कारण अनुपस्थित हैं और मतदान नहीं करेंगे, हालांकि लिखित राय देंगे। मध्य पूर्व तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने मुद्रास्फीति की चिंता बढ़ाई थी, लेकिन रविवार को घोषित अमेरिका-ईरान समझौते और होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी हटने की संभावना ने इन आशंकाओं को कुछ कम किया है। बीओजे अब मुद्रास्फीति बनाम आर्थिक सुस्ती के जोखिम के बीच संतुलन साधने के प्रयास में है।
यह बैठक वैश्विक 'केंद्रीय बैंक सुपर वीक' का हिस्सा है, जिसमें अमेरिकी फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ इंग्लैंड के दरें स्थिर रखने की संभावना है। ताइवानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नरम या प्रतीक्षारत रुख से वित्तीय शेयरों और स्प्रेड उत्पादों पर असर पड़ेगा। इसके विपरीत, रूस का केंद्रीय बैंक दर में कटौती का संकेत दे रहा है—मई में मुद्रास्फीति के 5.6 से 5.3 प्रतिशत पर आने और रूबल की मजबूती के बावजूद जून की शुरुआत में हल्की बढ़त और ऊंची मुद्रास्फीति अपेक्षाएं चिंता का विषय हैं। इस तरह जापान की सख्ती और रूस की ढील, वैश्विक मौद्रिक नीति में गहरे विरोधाभास को दर्शाती है।
दक्षिण एशिया के लिए यह परिदृश्य मिले-जुले अवसर और चुनौतियाँ लेकर आया है। जापान की दर वृद्धि से येन में मजबूती कैरी ट्रेड को प्रभावित कर उभरते बाजारों से पूंजी प्रवाह को धीमा कर सकती है। लेकिन यदि ईरान समझौते से कच्चा तेल सस्ता होता है, तो भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे बड़े आयातकों को चालू खाते के घाटे और मुद्रास्फीति में राहत मिलेगी। इन अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंक भी, अमेरिकी फेड पर नजर रखते हुए, अपनी नीतिगत गणनाएं पुनः जांचेंगे।
बीओजे गवर्नर की अनुपस्थिति में दर बढ़ाने का कदम जापानी अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताता है, लेकिन भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं। अमेरिका-ईरान समझौते के कार्यान्वयन पर संदेह और रूसी अर्थव्यवस्था की आंतरिक कमजोरियाँ वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण को जटिल बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में बीओजे के आधिकारिक बयान और अन्य प्रमुख केंद्रीय बैंकों के संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे, जिस पर निवेशकों की पैनी नजर रहेगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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जापान के केंद्रीय बैंक द्वारा दरों में एक चौथाई अंक की बढ़ोतरी करके इसे 1% पर ले जाने की उम्मीद है, जो 1995 के बाद का उच्चतम स्तर होगा। बैठक गवर्नर उएदा की अनुपस्थिति में हो रही है, जो सूजन के कारण अस्पताल में भर्ती हैं और केवल लिखित रूप में अपनी राय रखेंगे। विश्लेषकों के बीच कराए गए एक सर्वेक्षण में इस वृद्धि की व्यापक संभावना जताई गई है।
बैंक ऑफ जापान ने अपनी दो दिवसीय बैठक शुरू कर दी है, जिसमें तेल की कीमतों से प्रेरित महंगाई की आशंका के चलते दरों में एक चौथाई अंक की बढ़ोतरी कर 1% करने की व्यापक उम्मीद है। अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य की वास्तविक नाकाबंदी समाप्त हो सकती है, से ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम हुआ है। इस बीच, प्रमुख वैश्विक केंद्रीय बैंक अलग-अलग फैसलों वाले सप्ताह के लिए तैयार हैं, जिसमें अमेरिका और ब्रिटेन के दरों को स्थिर रखने की संभावना है।
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