
स्पेन का विश्व कप में 'पेटारडाज़ो': काबो वर्डे से गोलरहित ड्रॉ पर मीडिया का फूटा गुस्सा
यूरो चैंपियन स्पेन के काबो वर्डे के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ पर स्पेनिश और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने 'आपदा' और 'निराशाजनक' जैसे शब्दों से प्रहार किया, अब उरुग्वे और सऊदी अरब के खिलाफ मैच निर्णायक बन गए हैं।
स्पेन के विश्व कप 2026 अभियान की शुरुआत एक अप्रत्याशित झटके के साथ हुई, जब यूरो चैंपियन टीम को अटलांटा के मर्सिडीज-बेंज स्टेडियम में काबो वर्डे के खिलाफ गोलरहित ड्रॉ पर संतोष करना पड़ा। फीफा रैंकिंग में 67वें स्थान पर काबिज और पहली बार विश्व कप में पहुंचे अफ्रीकी देश ने स्पेन के सितारों को पूरी तरह बेअसर कर दिया। स्पेनिश मीडिया ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे "पेटारडाज़ो" (धमाकेदार फ्लॉप), "आपदा" और "निराशाजनक पंचर" जैसे शब्दों से नवाजा। मार्का ने लिखा, "शुरुआत में ही आपदा: स्पेनिश टीम पहचान में नहीं आ रही, फुटबॉल, विचारों और साधनों से रहित।" एएस ने इसे "विश्व कप पदार्पण में विफलता" करार दिया।
मैच में स्पेन का गेंद पर नियंत्रण भले ही बना रहा, लेकिन गोल के सामने धार की भारी कमी नजर आई। काबो वर्डे के गोलकीपर वोज़िन्हा ने कई निर्णायक बचाव किए और अफ्रीकी टीम की अनुशासित रक्षात्मक दीवार को भेदने में लुइस दे ला फुएंते की रणनीति पूरी तरह विफल रही। एल पाइस ने संयमित लहजे में "पंचर" शब्द का इस्तेमाल किया, जबकि एल मुंडो ने इसे "ग्रुप के सबसे कमजोर प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ बिना विचारों के शर्मनाक पंचर" बताया। एल एस्पान्योल ने रेखांकित किया कि टीम को "वास्तविक खतरा पैदा करने में आधे घंटे से अधिक लग गए।" स्पेनिश प्रेस ने एक स्वर में कहा कि यह प्रदर्शन हार के बराबर है और टीम की पहचान पूरी तरह गायब थी।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रियाएँ उतनी ही कठोर रहीं। जर्मनी के प्रतिष्ठित फ्रैंकफुर्टर आल्गेमाइने जाइटुंग ने स्पेनिश मीडिया की सुर्खियों को "भारी शर्मिंदगी" और "शुरुआती आपदा" के रूप में प्रस्तुत किया। अर्जेंटीना के नोटिसियास अर्जेंटिनास, क्लारिन, ला नासियोन और आम्बितो फिनान्सिएरो जैसे प्रमुख मीडिया ने भी इस नतीजे को "बटाकाज़ो" (बड़ा उलटफेर) और "निराशाजनक" करार दिया। लैटिन अमेरिकी प्रेस ने स्पेन की कमजोरियों पर ध्यान केंद्रित करते हुए लामिन यमल जैसे युवा सितारों के प्रभावहीन रहने पर सवाल उठाए, और कहा कि जिस टीम को व्यापक अंतर से जीतना था, वह उलटे संकट में पड़ गई।
अब स्पेन के सामने ग्रुप एच में उरुग्वे और सऊदी अरब से मुकाबले हैं, और यह ड्रॉ टीम पर भारी दबाव डालता है। यदि आने वाले मैचों में प्रदर्शन में सुधार नहीं हुआ तो विश्व कप से जल्दी विदाई का खतरा मंडरा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि कोच दे ला फुएंते को आक्रमण में धार और रचनात्मकता लाने के लिए तुरंत कदम उठाने होंगे। काबो वर्डे के लिए यह नतीजा ऐतिहासिक उपलब्धि है, लेकिन स्पेन के लिए यह एक कड़ी चेतावनी है कि पिछली सफलताएँ भविष्य की गारंटी नहीं हैं। विश्व कप के त्रि-राष्ट्र आयोजन (अमेरिका, मैक्सिको, कनाडा) में स्पेन की राह अब पहले से कहीं अधिक चुनौतीपूर्ण नजर आ रही है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्पेनिश प्रेस ने केप वर्डे के खिलाफ 0-0 ड्रॉ के बाद कठोर आलोचना की, इसे 'पेटारडाज़ो' और 'फिगुराचिया' कहा। लैटिन अमेरिकी मीडिया ने इस सदमे को दोहराया, मीम्स और यूरोपीय चैंपियन के पदार्पण की 'आपदा' पर प्रकाश डाला।
जर्मन और यूरोपीय मीडिया ने स्पेन के गोलरहित ड्रॉ को एक भारी शर्मिंदगी और विनाशकारी शुरुआत बताया। रिपोर्टों में स्पेन के यूरोपीय चैंपियन होने और केप वर्डे की छोटी टीम के बीच के अंतर पर ध्यान केंद्रित किया गया, स्पेनिश अखबारों की तीखी सुर्खियों को उद्धृत किया गया।
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