
न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता बनाम दक्षता: अर्जेंटीना से ब्राजील तक बहस तेज
अर्जेंटीना ने सर्वोच्च न्यायालय में जजों की नियुक्ति के नियमों को डिक्री द्वारा सरल बनाया, जबकि स्पेन, मैक्सिको और ब्राजील में न्यायिक सुधारों की दिशा अलग-अलग राहों पर आगे बढ़ रही है।
अर्जेंटीना में राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने एक अत्यावश्यक डिक्री (डीएनयू) के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया से नागरिक भागीदारी और पारदर्शिता संबंधी कई प्रावधानों को समाप्त कर दिया है। न्याय मंत्री जुआन बाउतिस्ता माहिकेस के साथ हस्ताक्षरित इस डिक्री ने वर्ष 2003 से चली आ रही उस व्यवस्था को पलट दिया, जिसके तहत उम्मीदवारों के नाम सार्वजनिक किए जाते थे और नागरिकों, गैर-सरकारी संगठनों तथा पेशेवर संघों को आपत्तियां दर्ज करने का अवसर मिलता था। सरकार का तर्क है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया में तेजी आएगी और न्यायपालिका में 37.5 प्रतिशत रिक्त पदों को शीघ्र भरा जा सकेगा, लेकिन आलोचक इसे कार्यपालिका के हाथों में अधिक शक्ति केंद्रित करने वाला कदम मान रहे हैं।
इसके विपरीत, स्पेन ने न्यायिक क्षमता बढ़ाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। न्याय मंत्री फेलिक्स बोलान्योस ने 700 नए जजों और अभियोजकों की नियुक्ति की घोषणा की, जिसमें 575 पद परीक्षा के माध्यम से और 125 पद दस वर्ष से अधिक अनुभव वाले विधिवेत्ताओं के लिए आरक्षित हैं। यह स्पेन के न्यायिक इतिहास की सबसे बड़ी एकल भर्ती है, जो लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय तक पहुंच को सुगम बनाने की दिशा में एक संरचनात्मक प्रयास को दर्शाती है।
मैक्सिको में सर्वोच्च न्यायालय (एससीजेएन) ने आंतरिक प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया है। मुख्य न्यायाधीश ह्यूगो एगिलर ओर्तिस की अध्यक्षता में एक नया समझौता लागू किया गया, जो न्यायालय कर्मियों को नागरिकों की शिकायतों पर 72 घंटे से लेकर 45 दिन के भीतर जवाब देने के लिए बाध्य करता है। साथ ही, देशभर में 36 'कासास दे लॉस साबेरेस हुरिदिकोस' (विधिक ज्ञान गृह) को औपचारिक सेवा केंद्रों के रूप में मान्यता दी गई है, ताकि वंचित वर्गों तक न्याय की पहुंच बढ़ाई जा सके।
ब्राजील में सर्वोच्च संघीय न्यायालय (एसटीएफ) दोहरी चुनौतियों से जूझ रहा है। एक ओर, न्यायालय के एक धड़े ने 2026 के चुनावों में सीधे हस्तक्षेप की इच्छा जताई है, और पारंपरिक चुनावी न्याय मार्गों को दरकिनार करते हुए संवैधानिक शिकायतों के माध्यम से मामलों को अपने पास खींच रहा है। दूसरी ओर, अध्यक्ष लुइज एडसन फाचिन ने आंतरिक कलह से बचने के लिए न्यायिक सुधार पर एक अध्ययन समूह का गठन किया है, जिसमें विभिन्न न्यायाधीशों द्वारा सुझाए गए सदस्य शामिल हैं। यह कदम न्यायाधीशों के लिए आचार संहिता बनाने के प्रयास से उपजे विवादों के बाद उठाया गया।
ये घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर न्यायिक स्वतंत्रता और दक्षता के बीच संतुलन की खोज को रेखांकित करते हैं। भारत जैसे दक्षिण एशियाई लोकतंत्रों के लिए यह बहस प्रासंगिक है, जहां कॉलेजियम प्रणाली के माध्यम से न्यायिक नियुक्तियों में पारदर्शिता और कार्यपालिका की भूमिका को लेकर लंबे समय से संवाद जारी है। अर्जेंटीना का अनुभव बताता है कि प्रक्रिया को अत्यधिक सरल बनाने से संस्थागत विश्वास कमजोर हो सकता है, जबकि स्पेन और मैक्सिको के मॉडल संसाधन विस्तार और सेवा सुधारों के माध्यम से न्यायिक वैधता को मजबूत करने का मार्ग सुझाते हैं।
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अर्जेंटीना में राष्ट्रपति मिलेई ने सुप्रीम कोर्ट की नियुक्तियों में तेजी लाने के लिए लिंग और क्षेत्रीय विविधता मानदंडों को हटाने का फरमान जारी किया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठे। ब्राजील में सुप्रीम कोर्ट का एक गुट चुनावी अदालत को दरकिनार कर 2026 के चुनावों में सीधे हस्तक्षेप की तैयारी कर रहा है, जबकि अदालत के अध्यक्ष ने आंतरिक तनाव कम करने के लिए न्यायिक सुधार अध्ययन समूह बनाया। मेक्सिको की सुप्रीम कोर्ट ने नागरिक सेवा की समयसीमा सख्त कर मानवीय सेवा का वादा किया।
स्पेन ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा न्यायिक भर्ती अभियान शुरू किया, जिसमें न्यायाधीशों और अभियोजकों के लिए 700 नए पदों की पेशकश की गई—575 पारंपरिक परीक्षा के माध्यम से और 125 अनुभवी विधिवेत्ताओं के लिए विशेष मार्ग से। न्याय मंत्री ने इसे न्यायपालिका को मजबूत करने का निर्णायक कदम बताया।
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