
ईरान का आकलन: यमन संकट का कोई सैन्य हल नहीं, क्षेत्रीय वार्ता पर जोर
ईरानी विदेश मंत्री और प्रवक्ता ने हूती-सऊदी तनाव पर संवाद का आह्वान किया और कहा कि स्थिति को ईरान से नहीं जोड़ा जाना चाहिए, जबकि नाकेबंदियों से वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग प्रभावित हुए हैं।
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच हालिया सैन्य टकराव के बीच ईरान ने स्पष्ट किया है कि इस संघर्ष का कोई सैन्य समाधान नहीं है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक़ची ने सरकारी अख़बार को दिए साक्षात्कार में कहा कि 'यमन, बाब अल-मंडब और अन्य क्षेत्रीय मुद्दों का कोई सैन्य हल नहीं है' और उन्होंने सभी पक्षों से बातचीत की अपील की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ाई ने भी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए पहले से सहमत रोडमैप पर लौटने को ही एकमात्र रास्ता बताया। ये बयान ऐसे समय आए हैं जब हूतियों ने सऊदी बंदरगाहों की नाकेबंदी और तेल टैंकरों पर हमलों का दावा किया है, और सऊदी अरब ने उत्तरी यमन के मारिब और जौफ़ प्रांतों में हवाई हमले किए हैं।
ईरान ने खुद को इस संघर्ष से अलग रखने की कोशिश की है। अराक़ची के अनुसार, यमन की स्थिति 'ईरान से संबद्ध नहीं की जा सकती' और बाब अल-मंडब क्षेत्र की घटनाएँ 'यमन, सऊदी अरब और क्षेत्रीय देशों के बीच पुराने विवादों में जड़ें रखती हैं।' दूसरी ओर, हूती प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि उनकी नौसैनिक नाकेबंदी केवल सऊदी पक्ष को प्रभावित करती है और अंतरराष्ट्रीय जहाज़ों की आवाजाही बाधित नहीं की जा रही। ईरानी प्रवक्ता बक़ाई ने अमेरिका की 'उकसाने वाली और हस्तक्षेपकारी नीतियों' को स्थिति को जटिल बनाने वाला कारक बताया और ज़ोर दिया कि क्षेत्रीय सुरक्षा केवल पड़ोसी देशों के बीच बातचीत व सहयोग से सुनिश्चित हो सकती है।
इस टकराव के वैश्विक ऊर्जा बाज़ार पर गंभीर प्रभाव पड़ रहे हैं। सऊदी अरब की समुद्री आपूर्ति के दोनों प्रमुख रास्ते—होर्मूज़ जलडमरूमध्य पर ईरान की समानांतर नाकेबंदी और बाब अल-मंडब पर हूती कार्रवाई—एक साथ प्रभावित हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, इन मार्गों में रुकावट से कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है और दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत जैसे बड़े आयातकों की आपूर्ति शृंखला पर ख़तरा मंडरा रहा है। साथ ही, यमन में मानवीय संकट गहरा रहा है—बक़ाई ने ज़रूरी वस्तुओं, ईंधन और सेवाओं पर लगी रोक को लोगों की ज़िंदगी की मुश्किलों का मुख्य कारण बताते हुए सभी प्रतिबंध तुरंत हटाने की माँग की।
मौजूदा स्थिति में 2022 के संयुक्त राष्ट्र-मध्यस्थता वाले युद्धविराम के बाद का सबसे गंभीर तनाव देखा जा रहा है। ईरान ने यमन शांति के लिए किसी भी रचनात्मक पहल का समर्थन करने की बात कही है, लेकिन अभी तक किसी ठोस वार्ता की घोषणा नहीं हुई है। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सभी पक्ष रोडमैप पर अमल के लिए तैयार नहीं होते, हिंसा का यह दौर जारी रह सकता है और इसकी आँच पूरे पश्चिम एशिया और उससे जुड़े वैश्विक व्यापार मार्गों पर पड़ती रहेगी।
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