
इज़राइल चुनाव: मोरक्को मूल के आइज़नकोट की बढ़त, नेतन्याहू के लिए मिज़राही वोट बैंक में सेंध
पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट की नई पार्टी यशर चुनावी सर्वेक्षणों में लिकुड से आगे, उनकी मोरक्कोई पृष्ठभूमि परंपरागत दक्षिणपंथी मतदाताओं को खींच सकती है।
इज़राइल में अक्टूबर 2026 के अंत तक होने वाले चुनावों से पहले जारी सर्वेक्षणों में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइज़नकोट की नई मध्यमार्गी पार्टी यशर ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड को पीछे छोड़ दिया है। इज़राइली चैनल 12 के एक सर्वेक्षण में यशर को 23 सीटें और लिकुड को 22 सीटें मिलने का अनुमान है, जबकि प्रधानमंत्री पद की सीधी पसंद में 43 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने आइज़नकोट को और 34 प्रतिशत ने नेतन्याहू को चुना। यह पहला चुनाव है जो 7 अक्टूबर 2023 की सुरक्षा विफलता और उसके बाद गाज़ा युद्ध की पृष्ठभूमि में हो रहा है।
इज़राइली मीडिया विश्लेषणों के अनुसार, आइज़नकोट की बढ़त का एक अहम कारण मिज़राही (मध्य-पूर्व और उत्तरी अफ़्रीकी मूल के यहूदी) मतदाताओं, विशेषकर मोरक्को मूल के लगभग दस लाख इज़राइलियों के बीच उनकी स्वीकार्यता है। यह वर्ग परंपरागत रूप से लिकुड का मुख्य आधार रहा है, जिसे 1970 के दशक में मेनाखेम बेगिन ने अश्केनाज़ी कुलीन वर्ग के प्रति असंतोष के आधार पर संगठित किया था। आइज़नकोट स्वयं मोरक्को के प्रवासियों के नौ बच्चों में दूसरे हैं, तिबेरियास और इलात में पले-बढ़े, और चार दशकों की सैन्य सेवा के बाद 2015-19 तक सेना प्रमुख रहे। उनके बेटे और भतीजे की गाज़ा युद्ध में मृत्यु ने उनकी छवि को और मज़बूत किया है, जबकि नेतन्याहू के सैन्य आयु के बेटे युद्ध के दौरान विदेश में रहे।
नेतन्याहू खेमे की रणनीति, पूर्व सलाहकार अवी बुशिंस्की के हवाले से जेरूसलम पोस्ट में छपी टिप्पणी के अनुसार, विपक्षी गुट को 61 सीटों के बहुमत से रोकने और गतिरोध पैदा करने पर केंद्रित है, ताकि वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री बने रहें और एक और चुनाव कराया जा सके। इसी क्रम में लिकुड की प्रचार मशीन ने आइज़नकोट की अंग्रेज़ी का मज़ाक उड़ाने वाला एक वीडियो जारी किया, जिसे इज़राइली टिप्पणीकारों ने ‘आत्मघाती गोल’ बताया, क्योंकि इसने मिज़राही समुदाय के प्रति पुरानी रूढ़ियों को पुष्ट किया। साथ ही, नेतन्याहू के पूर्व प्रवक्ता की कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों ने लिकुड के भीतर ही मिज़राही सांसदों में आक्रोश पैदा कर दिया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आइज़नकोट की नीतिगत स्थिति जटिल है। उन्होंने लेबनान में युद्धविराम के लिए अमेरिकी दबाव को स्वीकार करने पर नेतन्याहू की आलोचना की, और फ़लस्तीनी राज्य की माँग को ‘संदर्भहीन’ बताया। फिर भी, इज़राइली मीडिया में उन्हें एक ऐसे मध्यमार्गी के रूप में देखा जाता है जो वामपंथी दलों के साथ गठबंधन और कट्टर धार्मिक यहूदियों व अरबों की सैन्य भर्ती का समर्थन करते हैं। इस चुनावी माहौल में छोटे दलों का बिखराव एक बड़ी बाधा है; पूर्व प्रधानमंत्री नफ़्ताली बेनेट और याइर लैपिड के साथ संयुक्त मोर्चे के प्रस्ताव को आइज़नकोट ने ठुकरा दिया, जिससे विपक्षी वोटों का विभाजन हो सकता है।
चुनाव की तारीख अभी तय नहीं है, लेकिन इसे अक्टूबर 2026 के अंत तक कराना अनिवार्य है। इज़राइली संसदीय प्रणाली में गठबंधन की जटिलताओं के चलते परिणाम की भविष्यवाणी कठिन है। अरब दलों के पाँच-पाँच सीटें पाने के अनुमान के बीच, नेतन्याहू खेमा उनके समर्थन से सरकार बनाने को ‘देशभक्तिहीन’ करार दे रहा है, हालाँकि 2021 में उन्होंने स्वयं इस्लामी पार्टी राम के साथ सहयोग की कोशिश की थी। फ़िलहाल, सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि क्या आइज़नकोट मिज़राही पहचान और सैन्य बलिदान के सहारे लिकुड के गढ़ में पर्याप्त सेंध लगा पाते हैं, या नेतन्याहू एक बार फिर गतिरोध के ज़रिए सत्ता में बने रहने में सफल होते हैं।
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| इज़राइली प्रेस | −0.40 | critical |
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.30 | critical |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.40 | critical |
आइज़नकोट, मोरक्कन आप्रवासियों का पुत्र, नेतन्याहू के चुनावी आधार के लिए सीधी चुनौती पेश करता है।
अलंकारिक तकनीक जातीय वैयक्तिकरण है: आइज़नकोट की मिज़राही पहचान पर जोर देकर उनके उदय को समझाया जाता है, जिससे यह प्रशंसनीय होता है कि वे पारंपरिक रूप से लिकुड के प्रति वफादार मतदाताओं को आकर्षित कर सकते हैं।
यह नेतन्याहू के अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किए गए पैंतरेबाज़ी और उनकी गतिरोध रणनीति को छोड़ देता है, जो इज़राइली प्रेस में मौजूद हैं।
नेतन्याहू हताश पैंतरेबाज़ी के साथ सत्ता से चिपके हुए हैं, जबकि आइज़नकोट एक विश्वसनीय खतरे के रूप में उभर रहे हैं।
सामरिक विखंडन: कई पहलुओं (व्यक्तिगत सुरक्षा, चुनावी रणनीति, राजनीतिक आलोचना) को कवर करके, प्रेस एक मुश्किल में नेता का समग्र चित्र बनाता है।
यह मिज़राही मतदाताओं की भूमिका और आइज़नकोट की मोरक्कन पहचान पर गहराई से नहीं जाता, जो अरब प्रेस में केंद्रीय हैं।
ज़ायोनी शासन संकट में है: सर्वेक्षण नेतन्याहू की आसन्न हार दिखाते हैं।
प्रणालीगत अवैधकरण: 'शासन' शब्द का उपयोग और नेतन्याहू की हार पर ध्यान केंद्रित करना इज़राइली राज्य की वैधता को कमजोर करने का काम करता है।
यह आंतरिक इज़राइली विभाजन और आइज़नकोट की पृष्ठभूमि को छोड़ देता है, जो प्रतियोगिता को मानवीय बना सकते हैं।
नेतन्याहू एक कमजोर नेता हैं, जो 7 अक्टूबर के परिणामों और एक कठिन चुनाव अभियान से जूझ रहे हैं।
आलोचनात्मक ऐतिहासिकीकरण: चुनाव को 7 अक्टूबर की सुरक्षा विफलता के संदर्भ में रखकर, यह सुझाव देता है कि नेतन्याहू जिम्मेदार हैं और उनका पतन उचित है।
यह मिज़राही मतदाताओं की भूमिका या ईरानी दृष्टिकोण का उल्लेख नहीं करता, केवल नेतन्याहू और ऐतिहासिक संदर्भ पर ध्यान केंद्रित करता है।
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