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अमेरिका में भीषण गर्मी से स्वतंत्रता दिवस समारोह अस्त-व्यस्त, कई परेड और आतिशबाजी रद्दकमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से उभरते बाजारों को सहारा, मुद्राओं और शेयरों में तेजीमुराकामी की कतार से प्रोमेथियस तक: जब मशीनें तेज़ दौड़ें और इंसान सोचने लगेऑस्ट्रेलिया-स्वीडन में हिंसक घटनाओं का दौर, घरेलू हिंसा पर वैश्विक चेतावनीअमेरिकी स्वतंत्रता के 250 वर्ष: वैश्विक नज़रिए में स्वतंत्रता, ऐतिहासिक ऋण और वर्तमान विभाजनवैश्विक ऑटो उद्योग में मिले-जुले रुझान: ब्राज़ील, जर्मनी, मोरक्को में तेज़ी, अर्जेंटीना में गिरावटजब AI ने छीन ली एक्टर की नौकरी, तो सब्ज़ी बेचने लगा; चीनी समाज में बदलाव की कहानीजब रसोई युद्धक्षेत्र बनी और साहित्य ने टटोले मन के घाव: सृजन की आग में तपता सत्यअमेरिका में भीषण गर्मी से स्वतंत्रता दिवस समारोह अस्त-व्यस्त, कई परेड और आतिशबाजी रद्दकमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से उभरते बाजारों को सहारा, मुद्राओं और शेयरों में तेजीमुराकामी की कतार से प्रोमेथियस तक: जब मशीनें तेज़ दौड़ें और इंसान सोचने लगेऑस्ट्रेलिया-स्वीडन में हिंसक घटनाओं का दौर, घरेलू हिंसा पर वैश्विक चेतावनीअमेरिकी स्वतंत्रता के 250 वर्ष: वैश्विक नज़रिए में स्वतंत्रता, ऐतिहासिक ऋण और वर्तमान विभाजनवैश्विक ऑटो उद्योग में मिले-जुले रुझान: ब्राज़ील, जर्मनी, मोरक्को में तेज़ी, अर्जेंटीना में गिरावटजब AI ने छीन ली एक्टर की नौकरी, तो सब्ज़ी बेचने लगा; चीनी समाज में बदलाव की कहानीजब रसोई युद्धक्षेत्र बनी और साहित्य ने टटोले मन के घाव: सृजन की आग में तपता सत्य
भू-राजनीति और राजनीतिबुधवार, 1 जुलाई 2026

चीन का जातीय एकता कानून लागू, ताइवान ने 'लाल आतंक' करार देते हुए जवाबी कदम उठाए

मंदारिन अनिवार्यता और विदेशों में भी दायित्व तय करने वाले इस कानून पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच ताइपे ने आठ समूहों को जोखिम में बताया।

चीन में जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून 1 जुलाई से प्रभावी हो गया, जो स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में मंदारिन को प्राथमिक भाषा बनाने, पाठ्यक्रम में साझा चीनी राष्ट्र की भावना भरने और अभिभावकों को बच्चों को कम्युनिस्ट पार्टी से प्रेम करने के लिए मार्गदर्शन देने को बाध्य करता है। कानून का अनुच्छेद 63 चीन के बाहर के व्यक्तियों और संगठनों को भी कानूनी दायरे में लाने का प्रावधान करता है यदि वे जातीय एकता को कमजोर करने या विभाजन पैदा करने वाले कृत्य करते हैं। इसके तत्काल बाद ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई ने इसे 'लाल आतंक' बताते हुए पांच जवाबी उपायों की घोषणा की और समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर सीमापार दमन का मुकाबला करने की बात कही।

चीन के न्याय मंत्रालय ने इस कानून का बचाव करते हुए कहा कि यह जातीय एकता को कमजोर करने या अलगाववाद भड़काने वाले अवैध कृत्यों को लक्षित करता है, और विदेशों में प्रवर्तन का प्रावधान वैध, कानूनी और आवश्यक है। बीजिंग का आधिकारिक रुख है कि यह कानून सभी समूहों के अधिकारों की रक्षा करता है और राष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा देता है। इसके विपरीत, ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इसे लंबी भुजा वाली अधिकारिता और अंतरराष्ट्रीय दमन का नवीनतम प्रयास बताया, जिसकी अस्पष्ट भाषा का इस्तेमाल ताइवानी नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समर्थकों के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाने में किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कानून को निरस्त करने का आह्वान करते हुए चेतावनी दी कि इससे भाषा, शिक्षा, धर्म, संस्कृति, अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध गहरा सकते हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि यह कानून चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ राजनीतिक और वैचारिक संरेखण अनिवार्य करके जबरन आत्मसात्करण की नीतियों को संस्थागत बनाता है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के शीर्ष सदस्यों सहित नौ सांसदों ने वैचारिक अनुपालन की मांग और अतिरिक्त-क्षेत्रीय पहुंच पर गहरी चिंता व्यक्त की।

यह कानून दशकों पुरानी नीतियों को कानूनी बल देता है और स्कूलों, परिवारों, मीडिया, संग्रहालयों और स्थानीय सरकारों तक इसका विस्तार करता है। ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने आठ समूहों को विशेष जोखिम में बताया: विदेशों में रह रहे उइगर, तिब्बती और मंगोल जैसे अल्पसंख्यक; चीनी असंतुष्ट; विदेशी सांसद और राजनीतिक हस्तियां; पत्रकार और शोधकर्ता; ताइवानी यात्री और अधिकारी; आई-कुआन ताओ जैसे धार्मिक समूह; आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण या जबरन श्रम जांच में शामिल अंतरराष्ट्रीय कंपनियां; और ऑनलाइन सामग्री निर्माता। ताइपे के आकलन के अनुसार, इन समूहों को हिरासत, प्रत्यर्पण, वीजा इनकार, प्रतिबंध या समन्वित ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अनुच्छेद 63 कोई नया अपराध नहीं बनाता, बल्कि मौजूदा आपराधिक कानूनों को संदर्भित करता है, आलोचकों का कहना है कि इसकी व्यापक शब्दावली मनमाने प्रवर्तन की गुंजाइश देती है।

चीन आधिकारिक रूप से 56 जातीय समूहों को मान्यता देता है, जिनमें हान बहुमत 90 प्रतिशत से अधिक है। यह कानून राष्ट्रपति शी जिनपिंग की साझा चीनी राष्ट्रीय पहचान की परिकल्पना का हिस्सा है और ऐसे समय में आया है जब शिनजियांग और तिब्बत में अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय जांच जारी है। बीजिंग इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों को आतंकवाद-रोधी और विकास के उपाय बताता है। कानून के लागू होने के साथ ही ताइवान ने पूर्व चेतावनी तंत्र, सार्वजनिक मीडिया साक्षरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की घोषणा की है। अमेरिकी सांसदों ने भी इस मुद्दे पर निरंतर निगरानी का संकेत दिया है। फिलहाल कानून को निरस्त करने की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, और इसके पहले मामले, विशेषकर अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रवर्तन से जुड़े प्रकरण, वैश्विक ध्यान आकर्षित करेंगे।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

32%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
चीनी प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
चीनी प्रेस/ राजकीय
विजयव्यावहारिकता

नया कानून साझा राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करता है और दीर्घकालिक स्थिरता की आधारशिला के रूप में जातीय एकता को बढ़ावा देता है। यह अलगाववाद, उग्रवाद और आतंकवाद से निपटने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है, साथ ही सभी 56 जातीय समूहों के अधिकारों की रक्षा करता है। यह विधान कानून के शासन के तहत एक आधुनिक, सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण की सामूहिक इच्छा को दर्शाता है।

लैटिन अमेरिकी प्रेस
चेतावनीसंदेह

चीन का एक विवादास्पद जातीय एकता कानून अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों के बावजूद लागू हो गया है कि यह अल्पसंख्यकों पर जबरन आत्मसातीकरण थोपेगा। आलोचकों का कहना है कि यह कानून उइगरों, तिब्बतियों और मंगोलों पर राज्य-परिभाषित राष्ट्रीय पहचान के पक्ष में अपनी पहचान छोड़ने का दबाव डालता है, और व्यापक सुरक्षा लेबलों के तहत असहमति को अपराध घोषित करता है। कानून का बाह्य-क्षेत्रीय दायरा अंतरराष्ट्रीय दमन की आशंकाएं बढ़ाता है।

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अमेरिका में भीषण गर्मी से स्वतंत्रता दिवस समारोह अस्त-व्यस्त, कई परेड और आतिशबाजी रद्द·कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से उभरते बाजारों को सहारा, मुद्राओं और शेयरों में तेजी·मुराकामी की कतार से प्रोमेथियस तक: जब मशीनें तेज़ दौड़ें और इंसान सोचने लगे·ऑस्ट्रेलिया-स्वीडन में हिंसक घटनाओं का दौर, घरेलू हिंसा पर वैश्विक चेतावनी·अमेरिकी स्वतंत्रता के 250 वर्ष: वैश्विक नज़रिए में स्वतंत्रता, ऐतिहासिक ऋण और वर्तमान विभाजन·वैश्विक ऑटो उद्योग में मिले-जुले रुझान: ब्राज़ील, जर्मनी, मोरक्को में तेज़ी, अर्जेंटीना में गिरावट·जब AI ने छीन ली एक्टर की नौकरी, तो सब्ज़ी बेचने लगा; चीनी समाज में बदलाव की कहानी·जब रसोई युद्धक्षेत्र बनी और साहित्य ने टटोले मन के घाव: सृजन की आग में तपता सत्य·अमेरिका में भीषण गर्मी से स्वतंत्रता दिवस समारोह अस्त-व्यस्त, कई परेड और आतिशबाजी रद्द·कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से उभरते बाजारों को सहारा, मुद्राओं और शेयरों में तेजी·मुराकामी की कतार से प्रोमेथियस तक: जब मशीनें तेज़ दौड़ें और इंसान सोचने लगे·ऑस्ट्रेलिया-स्वीडन में हिंसक घटनाओं का दौर, घरेलू हिंसा पर वैश्विक चेतावनी·अमेरिकी स्वतंत्रता के 250 वर्ष: वैश्विक नज़रिए में स्वतंत्रता, ऐतिहासिक ऋण और वर्तमान विभाजन·वैश्विक ऑटो उद्योग में मिले-जुले रुझान: ब्राज़ील, जर्मनी, मोरक्को में तेज़ी, अर्जेंटीना में गिरावट·जब AI ने छीन ली एक्टर की नौकरी, तो सब्ज़ी बेचने लगा; चीनी समाज में बदलाव की कहानी·जब रसोई युद्धक्षेत्र बनी और साहित्य ने टटोले मन के घाव: सृजन की आग में तपता सत्य·
अपडेट 04:34 am1 भाषा · 3 स्रोत
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बुधवार, 1 जुलाई 2026

चीन का जातीय एकता कानून लागू, ताइवान ने 'लाल आतंक' करार देते हुए जवाबी कदम उठाए

मंदारिन अनिवार्यता और विदेशों में भी दायित्व तय करने वाले इस कानून पर अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच ताइपे ने आठ समूहों को जोखिम में बताया।

चीन में जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून 1 जुलाई से प्रभावी हो गया, जो स्कूलों और सरकारी दफ्तरों में मंदारिन को प्राथमिक भाषा बनाने, पाठ्यक्रम में साझा चीनी राष्ट्र की भावना भरने और अभिभावकों को बच्चों को कम्युनिस्ट पार्टी से प्रेम करने के लिए मार्गदर्शन देने को बाध्य करता है। कानून का अनुच्छेद 63 चीन के बाहर के व्यक्तियों और संगठनों को भी कानूनी दायरे में लाने का प्रावधान करता है यदि वे जातीय एकता को कमजोर करने या विभाजन पैदा करने वाले कृत्य करते हैं। इसके तत्काल बाद ताइवान के राष्ट्रपति विलियम लाई ने इसे 'लाल आतंक' बताते हुए पांच जवाबी उपायों की घोषणा की और समान विचारधारा वाले देशों के साथ मिलकर सीमापार दमन का मुकाबला करने की बात कही।

चीन के न्याय मंत्रालय ने इस कानून का बचाव करते हुए कहा कि यह जातीय एकता को कमजोर करने या अलगाववाद भड़काने वाले अवैध कृत्यों को लक्षित करता है, और विदेशों में प्रवर्तन का प्रावधान वैध, कानूनी और आवश्यक है। बीजिंग का आधिकारिक रुख है कि यह कानून सभी समूहों के अधिकारों की रक्षा करता है और राष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा देता है। इसके विपरीत, ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इसे लंबी भुजा वाली अधिकारिता और अंतरराष्ट्रीय दमन का नवीनतम प्रयास बताया, जिसकी अस्पष्ट भाषा का इस्तेमाल ताइवानी नागरिकों और अंतरराष्ट्रीय समर्थकों के खिलाफ मनगढ़ंत आरोप लगाने में किया जा सकता है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने कानून को निरस्त करने का आह्वान करते हुए चेतावनी दी कि इससे भाषा, शिक्षा, धर्म, संस्कृति, अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध गहरा सकते हैं। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा कि यह कानून चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ राजनीतिक और वैचारिक संरेखण अनिवार्य करके जबरन आत्मसात्करण की नीतियों को संस्थागत बनाता है। अमेरिकी सीनेट की विदेश संबंध समिति के शीर्ष सदस्यों सहित नौ सांसदों ने वैचारिक अनुपालन की मांग और अतिरिक्त-क्षेत्रीय पहुंच पर गहरी चिंता व्यक्त की।

यह कानून दशकों पुरानी नीतियों को कानूनी बल देता है और स्कूलों, परिवारों, मीडिया, संग्रहालयों और स्थानीय सरकारों तक इसका विस्तार करता है। ताइवान के राष्ट्रीय सुरक्षा अधिकारियों ने आठ समूहों को विशेष जोखिम में बताया: विदेशों में रह रहे उइगर, तिब्बती और मंगोल जैसे अल्पसंख्यक; चीनी असंतुष्ट; विदेशी सांसद और राजनीतिक हस्तियां; पत्रकार और शोधकर्ता; ताइवानी यात्री और अधिकारी; आई-कुआन ताओ जैसे धार्मिक समूह; आपूर्ति श्रृंखला विविधीकरण या जबरन श्रम जांच में शामिल अंतरराष्ट्रीय कंपनियां; और ऑनलाइन सामग्री निर्माता। ताइपे के आकलन के अनुसार, इन समूहों को हिरासत, प्रत्यर्पण, वीजा इनकार, प्रतिबंध या समन्वित ऑनलाइन उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अनुच्छेद 63 कोई नया अपराध नहीं बनाता, बल्कि मौजूदा आपराधिक कानूनों को संदर्भित करता है, आलोचकों का कहना है कि इसकी व्यापक शब्दावली मनमाने प्रवर्तन की गुंजाइश देती है।

चीन आधिकारिक रूप से 56 जातीय समूहों को मान्यता देता है, जिनमें हान बहुमत 90 प्रतिशत से अधिक है। यह कानून राष्ट्रपति शी जिनपिंग की साझा चीनी राष्ट्रीय पहचान की परिकल्पना का हिस्सा है और ऐसे समय में आया है जब शिनजियांग और तिब्बत में अल्पसंख्यकों के साथ व्यवहार को लेकर अंतरराष्ट्रीय जांच जारी है। बीजिंग इन आरोपों को लगातार खारिज करता रहा है और अपनी नीतियों को आतंकवाद-रोधी और विकास के उपाय बताता है। कानून के लागू होने के साथ ही ताइवान ने पूर्व चेतावनी तंत्र, सार्वजनिक मीडिया साक्षरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की घोषणा की है। अमेरिकी सांसदों ने भी इस मुद्दे पर निरंतर निगरानी का संकेत दिया है। फिलहाल कानून को निरस्त करने की कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, और इसके पहले मामले, विशेषकर अतिरिक्त-क्षेत्रीय प्रवर्तन से जुड़े प्रकरण, वैश्विक ध्यान आकर्षित करेंगे।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 3 स्रोत · 1 भाषा

32%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

न्यूनत्र20%
निंदक80%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 1 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
चीनी प्रेसलैटिन अमेरिकी प्रेस
चीनी प्रेस/ राजकीय
विजयव्यावहारिकता

नया कानून साझा राष्ट्रीय पहचान को मजबूत करता है और दीर्घकालिक स्थिरता की आधारशिला के रूप में जातीय एकता को बढ़ावा देता है। यह अलगाववाद, उग्रवाद और आतंकवाद से निपटने के लिए कानूनी ढांचा प्रदान करता है, साथ ही सभी 56 जातीय समूहों के अधिकारों की रक्षा करता है। यह विधान कानून के शासन के तहत एक आधुनिक, सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण की सामूहिक इच्छा को दर्शाता है।

लैटिन अमेरिकी प्रेस
चेतावनीसंदेह

चीन का एक विवादास्पद जातीय एकता कानून अंतरराष्ट्रीय चेतावनियों के बावजूद लागू हो गया है कि यह अल्पसंख्यकों पर जबरन आत्मसातीकरण थोपेगा। आलोचकों का कहना है कि यह कानून उइगरों, तिब्बतियों और मंगोलों पर राज्य-परिभाषित राष्ट्रीय पहचान के पक्ष में अपनी पहचान छोड़ने का दबाव डालता है, और व्यापक सुरक्षा लेबलों के तहत असहमति को अपराध घोषित करता है। कानून का बाह्य-क्षेत्रीय दायरा अंतरराष्ट्रीय दमन की आशंकाएं बढ़ाता है।

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