
अमेरिकी अदालतों ने ट्रंप प्रशासन को देशव्यापी त्वरित निर्वासन और ग्रीन कार्ड धारकों पर सख्ती की अनुमति दी
वाशिंगटन की एक अपील अदालत ने विस्तारित 'त्वरित निष्कासन' नीति बहाल की, जबकि सर्वोच्च न्यायालय ने ग्रीन कार्ड धारकों के लिए प्रवेश बाधा कम की।
मंगलवार को अमेरिकी न्यायपालिका के दो महत्वपूर्ण फैसलों ने ट्रंप प्रशासन की आव्रजन नीति को कानूनी बल प्रदान किया। कोलंबिया जिले के अपील न्यायालय के एक विभाजित पैनल ने निचली अदालत के स्थगन आदेश को पलटते हुए, अवैध प्रवासियों के देशव्यापी 'त्वरित निष्कासन' (एक्सपेडाइटेड रिमूवल) को पुनः लागू करने की अनुमति दे दी। इसके साथ ही, सर्वोच्च न्यायालय ने 6-3 के बहुमत से एक अलग मामले में निर्णय दिया कि सीमा अधिकारी ग्रीन कार्ड धारकों को बिना ठोस सबूत के 'प्रवेश आवेदक' मान सकते हैं, जिससे उन्हें निरोध और निर्वासन का सामना करना पड़ सकता है।
अमेरिकी गृह सुरक्षा विभाग (डीएचएस) के अनुसार, कांग्रेस ने 1996 में त्वरित निष्कासन का अधिकार कार्यपालिका को दिया था, और इसका विस्तार अवैध आव्रजन से निपटने का एक आवश्यक उपकरण है। न्याय विभाग ने निचली अदालत के फैसले को 'गंभीर त्रुटि' बताया। दूसरी ओर, अमेरिकी सिविल लिबर्टीज यूनियन (एसीएलयू) और मेक द रोड न्यूयॉर्क जैसे अधिकार संगठनों का कहना है कि यह प्रक्रिया 'अनुचित और त्रुटि-प्रवण' है तथा संवैधानिक 'ड्यू प्रोसेस' का उल्लंघन करती है। अपील न्यायालय के बहुमत (ट्रंप-नियुक्त न्यायाधीश) ने माना कि प्रवासियों को सुनवाई का अवसर मिलता है, जबकि असहमति रखने वाले ओबामा-नियुक्त न्यायाधीश ने इसे आंतरिक क्षेत्रों में पकड़े गए लोगों के लिए 'अत्यंत अपर्याप्त' करार दिया।
इन फैसलों के ठोस परिणाम यह हैं कि अब आव्रजन अधिकारी अमेरिका के किसी भी हिस्से में ऐसे किसी भी अवैध प्रवासी को बिना न्यायाधीश के सुनवाई के निर्वासित कर सकते हैं, जो दो वर्ष से अधिक की निरंतर उपस्थिति सिद्ध नहीं कर पाता। सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय से ग्रीन कार्ड धारकों के लिए भी खतरा बढ़ गया है—अब किसी आपराधिक आरोप मात्र से उनकी स्थायी निवासी स्थिति को चुनौती दी जा सकती है। यह दोनों निर्णय ट्रंप प्रशासन की सामूहिक निर्वासन नीति के अनुरूप हैं, जिसके तहत वैध आव्रजन मार्गों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है। सर्वोच्च न्यायालय में लंबित अन्य मामले—जैसे जन्मसिद्ध नागरिकता, अस्थायी संरक्षित स्थिति (टीपीएस) और शरण नीति—भी इसी दिशा में संकेत दे रहे हैं।
दक्षिण एशियाई समुदायों के लिए इन निर्णयों के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। अमेरिका में बड़ी संख्या में भारतीय, पाकिस्तानी और बांग्लादेशी मूल के ग्रीन कार्ड धारक और अवैध प्रवासी रहते हैं। आव्रजन वकीलों के अनुसार, त्वरित निष्कासन के विस्तार से उन लोगों के लिए कानूनी सुरक्षा कमजोर होगी जो लंबे समय से वहां बसे हैं लेकिन दस्तावेजी प्रमाण नहीं जुटा पाते। सर्वोच्च न्यायालय का ग्रीन कार्ड मामला भी दक्षिण एशियाई पेशेवरों और व्यवसायियों को प्रभावित कर सकता है, जो अक्सर अंतरराष्ट्रीय यात्रा करते हैं। फिलहाल, अपील न्यायालय के फैसले के खिलाफ सर्वोच्च न्यायालय में अपील की संभावना बनी हुई है, और प्रशासन ने तत्काल प्रवर्तन शुरू करने की घोषणा की है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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संघीय न्यायपालिका प्रशासन की निर्वासन योजना का रास्ता साफ कर रही है। सुप्रीम कोर्ट और एक अपीलीय अदालत ने ग्रीन कार्ड धारकों सहित तेजी से निष्कासन की सरकारी शक्ति का विस्तार किया है। इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक व्यावहारिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, हालांकि कुछ लोग कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ग्रीन कार्ड धारक के निर्वासन मामले में ट्रम्प प्रशासन का पक्ष लिया। 6-3 के फैसले से आव्रजन अधिकारियों को विदेश से लौटने वाले स्थायी निवासियों को चुनौती देने का अधिक अधिकार मिल गया है। यह खबर सीधे तथ्यात्मक ढंग से प्रस्तुत की गई है, बिना किसी स्पष्ट टिप्पणी के।
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