
निक्केई ने पहली बार 70,000 अंक पार किया, बैंक ऑफ जापान की दर वृद्धि के बाद रिकॉर्ड बंद
जापान के केंद्रीय बैंक द्वारा नीतिगत दर 1% तक बढ़ाए जाने के बाद निक्केई सूचकांक ने पहली बार 70,000 अंक पार किया, लेकिन व्यापक टोपिक्स सूचकांक में गिरावट रही।
जापान का बेंचमार्क निक्केई 225 सूचकांक मंगलवार को कारोबार के दौरान पहली बार 70,000 अंक के ऐतिहासिक स्तर को पार कर गया। बैंक ऑफ जापान (बीओजे) द्वारा नीतिगत दर में एक चौथाई प्रतिशत अंक की वृद्धि कर इसे 0.75% से 1% पर ले जाने के बाद सूचकांक ने 70,020.68 का इंट्राडे उच्च स्तर छुआ। यह दर 31 वर्षों में सबसे ऊंची है। हालांकि, दिन के अंत तक निक्केई 0.12% की बढ़त के साथ 69,404.50 के नए रिकॉर्ड क्लोजिंग स्तर पर आ गया, जबकि व्यापक टोपिक्स सूचकांक 0.21% गिरकर 3,991.14 पर बंद हुआ। बीओजे ने सरकारी बॉन्ड खरीद में कमी की योजना को अप्रैल 2027 तक स्थगित करने का भी निर्णय लिया, जिससे बाजार को मिश्रित संकेत मिले।
एशिया के अन्य बाजारों में सतर्कता का माहौल रहा। अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौते को लेकर सोमवार की तेजी मंगलवार को फीकी पड़ गई, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजरानी फिर से शुरू होने में हफ्तों लग सकते हैं। एमएससीआई एशिया-प्रशांत (जापान को छोड़कर) सूचकांक शुरुआती बढ़त गंवाकर सपाट रहा। दक्षिण कोरिया का कॉस्पी 2.1% उछलकर 8,721.64 के नए रिकॉर्ड पर पहुंचा, जबकि शंघाई कम्पोजिट 0.1% से कम बढ़त के साथ 4,100.53 पर रहा। कच्चे तेल में ब्रेंट वायदा 0.6% चढ़कर 83.74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जो भू-राजनीतिक जोखिमों के प्रति सतर्क रुख दर्शाता है।
जापानी सरकारी बॉन्ड में दर वृद्धि के बाद गिरावट आई, जबकि येन 160 प्रति डॉलर के आसपास स्थिर रहा—यह वह स्तर है जिसे व्यापारी जापानी अधिकारियों के हस्तक्षेप की संभावित सीमा मानते हैं। निवेशकों की निगाहें अब बीओजे गवर्नर की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जिससे भविष्य की मौद्रिक सख्ती की रफ्तार के संकेत मिल सकते हैं। वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों की नीतियां इस समय केंद्र में हैं, और जापान का यह कदम धीरे-धीरे सामान्यीकरण की ओर बढ़ते कदम के रूप में देखा जा रहा है।
भारतीय परिप्रेक्ष्य में, जापान की दर वृद्धि और येन की चाल कैरी ट्रेड के लिहाज से अहम हैं, जहां निवेशक कम ब्याज दर वाली मुद्रा में उधार लेकर ऊंची प्रतिफल वाले बाजारों में निवेश करते हैं। तेल की कीमतों में नरमी भारत जैसे आयातक के लिए राहत का संकेत है, लेकिन होर्मुज को लेकर अनिश्चितता जोखिम बनाए हुए है। आने वाले दिनों में वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और केंद्रीय बैंकों के संकेत एशियाई बाजारों की दिशा तय करेंगे, जिसमें भारतीय सूचकांक भी बाहरी संकेतों के प्रति संवेदनशील रहेंगे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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निक्केई 225 पहली बार संक्षिप्त रूप से 70,000 के पार पहुंचा, जो बैंक ऑफ जापान की अपेक्षित दर वृद्धि से प्रेरित था। यह एक नए रिकॉर्ड उच्च स्तर पर बंद हुआ, जबकि व्यापक टॉपिक्स में मामूली गिरावट आई। बाजार की प्रतिक्रिया शांत और पूर्वानुमानों के अनुरूप थी।
निक्केई ने 70,000 अंक पार किए जब बैंक ऑफ जापान ने 2027 तक बॉन्ड खरीद में कमी को रोकने और दरों को 1% तक बढ़ाने का निर्णय लिया, जो 31 वर्षों में सबसे अधिक है। येन कमजोर हुआ और ये कदम व्यापक रूप से अपेक्षित थे। यह निर्णय केंद्रीय बैंक के सतर्क दृष्टिकोण को रेखांकित करता है।
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