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न्याय और कानूनगुरुवार, 18 जून 2026

ईरानी गायिका को बिना हिजाब गाने पर 74 कोड़ों की सज़ा, कलाकारों पर दो साल का प्रतिबंध

क़ोम प्रांत की एक आपराधिक अदालत ने पारस्तू अहमदी और उनकी टीम के आठ सदस्यों को सार्वजनिक नैतिकता भंग करने का दोषी ठहराया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने इस कार्रवाई को यातना करार दिया।

ईरान की एक अदालत ने गायिका पारस्तू अहमदी को 74 कोड़े मारने, दो साल तक देश छोड़ने पर रोक और दो साल तक कलात्मक गतिविधियों से प्रतिबंधित करने की सज़ा सुनाई है। यह फ़ैसला क़ोम प्रांत की आपराधिक अदालत ने दिसंबर 2024 में यूट्यूब पर प्रसारित एक ऑनलाइन संगीत कार्यक्रम के लिए दिया, जिसमें अहमदी ने बिना हिजाब और खुले कंधों वाली काली पोशाक में 'अज़ ख़ूने जवानाने वतन' (वतन के युवाओं के रक्त से) जैसा देशभक्ति गीत गाया था। अदालत ने इसे 'अश्लील और अनैतिक सामग्री' का उत्पादन और प्रकाशन मानते हुए सार्वजनिक शालीनता को ठेस पहुँचाने का मामला बनाया। यह सज़ा अहमदी के साथ काम करने वाले आठ संगीतकारों और निर्माण दल के सदस्यों पर भी लागू की गई है।

पश्चिमी मानवाधिकार संगठनों और ईरानी क़ानूनी विशेषज्ञों ने इस सज़ा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के विपरीत बताया है। अमेरिका स्थित सेंटर फ़ॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की वकालत निदेशक बहार ग़ंदेहारी के अनुसार, यह मामला दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकार की स्थिति नहीं बदली है, भले ही अधिकारी अपनी छवि सुधारने का प्रयास कर रहे हों। मानवाधिकार वकील मोईन ख़ज़ाएली का कहना है कि ईरानी आपराधिक क़ानून में महिलाओं द्वारा गाना, संगीत प्रस्तुत करना या संगीत रचनाओं का प्रसार अपराध नहीं है, इसलिए इसे अश्लील सामग्री का प्रकाशन नहीं माना जा सकता। एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे समूह कोड़े मारने को यातना की श्रेणी में रखते हैं और इसे राज्यों की अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं का उल्लंघन मानते हैं।

यह मामला ईरान के भीतर महिलाओं और कलाकारों पर लगी पाबंदियों के व्यापक संदर्भ में सामने आया है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से महिलाओं का सार्वजनिक रूप से अकेले गाना प्रतिबंधित है और हिजाब अनिवार्य है। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में ईरानी महिलाओं ने सविनय अवज्ञा के तौर पर हिजाब छोड़ दिया था, और 2025 की शुरुआत से अधिकारियों ने हिजाब क़ानून को सख़्ती से लागू नहीं किया है। इसके बावजूद, अहमदी पर कार्रवाई यह संकेत देती है कि न्यायिक प्रणाली अब भी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सक्रिय है।

दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य से, यह घटनाक्रम ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के चलते प्रासंगिक है, जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता और महिला अधिकारों पर बहस जारी है। हाल ही में अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम और आंशिक इंटरनेट बहाली जैसे कूटनीतिक क़दमों के बीच आए इस फ़ैसले ने ईरान की आंतरिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय छवि के बीच तनाव को उजागर किया है। ईरानी अधिकारियों ने अभी तक राजकीय मीडिया के माध्यम से इस सज़ा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जिसे संभावित विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

फ़िलहाल, अहमदी और उनकी टीम इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं। मानवाधिकार संगठनों और ईरानी प्रवासी कलाकारों ने इस सज़ा को सांस्कृतिक दमन का ताज़ा उदाहरण बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संज्ञान लेने की अपील की है। आगे की क़ानूनी प्रक्रिया पर नज़र रहेगी, जबकि ईरान के भीतर हिजाब और कलात्मक स्वतंत्रता को लेकर सामाजिक दबाव बना हुआ है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

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लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
अरब लेवांत-मगरिब प्रेसइज़राइली प्रेस
अरब लेवांत-मगरिब प्रेस
आक्रोशचेतावनी

युवा गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब के यूट्यूब पर प्रस्तुति देने के लिए 74 कोड़े और दो साल की कलात्मक प्रतिबंध की सज़ा ने ईरान में महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों पर फिर से ध्यान खींचा है। उनके प्रदर्शन को महिला एकल गायन पर प्रतिबंध और अनिवार्य हिजाब के लिए सीधी चुनौती माना गया, जिससे वह सोशल मीडिया पर प्रतिरोध का प्रतीक बन गईं।

इज़राइली प्रेस/ सुरक्षा
आक्रोशचेतावनीसंरक्षणवाद

ईरानी शासन ने गायिका परस्तू अहमदी और आठ सहयोगियों को अश्लील और अनैतिक सामग्री फैलाने के आरोप में 74 कोड़े, दो साल की यात्रा प्रतिबंध और कलात्मक गतिविधि पर प्रतिबंध की सज़ा सुनाई है। क़ोम की एक अदालत द्वारा दिया गया यह फ़ैसला, महिलाओं और कलाकारों के प्रति इस्लामी गणराज्य के व्यवस्थित दमन का एक और सबूत है।

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गुरुवार, 18 जून 2026

ईरानी गायिका को बिना हिजाब गाने पर 74 कोड़ों की सज़ा, कलाकारों पर दो साल का प्रतिबंध

क़ोम प्रांत की एक आपराधिक अदालत ने पारस्तू अहमदी और उनकी टीम के आठ सदस्यों को सार्वजनिक नैतिकता भंग करने का दोषी ठहराया, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों ने इस कार्रवाई को यातना करार दिया।

ईरान की एक अदालत ने गायिका पारस्तू अहमदी को 74 कोड़े मारने, दो साल तक देश छोड़ने पर रोक और दो साल तक कलात्मक गतिविधियों से प्रतिबंधित करने की सज़ा सुनाई है। यह फ़ैसला क़ोम प्रांत की आपराधिक अदालत ने दिसंबर 2024 में यूट्यूब पर प्रसारित एक ऑनलाइन संगीत कार्यक्रम के लिए दिया, जिसमें अहमदी ने बिना हिजाब और खुले कंधों वाली काली पोशाक में 'अज़ ख़ूने जवानाने वतन' (वतन के युवाओं के रक्त से) जैसा देशभक्ति गीत गाया था। अदालत ने इसे 'अश्लील और अनैतिक सामग्री' का उत्पादन और प्रकाशन मानते हुए सार्वजनिक शालीनता को ठेस पहुँचाने का मामला बनाया। यह सज़ा अहमदी के साथ काम करने वाले आठ संगीतकारों और निर्माण दल के सदस्यों पर भी लागू की गई है।

पश्चिमी मानवाधिकार संगठनों और ईरानी क़ानूनी विशेषज्ञों ने इस सज़ा को अंतरराष्ट्रीय मानकों के विपरीत बताया है। अमेरिका स्थित सेंटर फ़ॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान की वकालत निदेशक बहार ग़ंदेहारी के अनुसार, यह मामला दिखाता है कि ईरान में मानवाधिकार की स्थिति नहीं बदली है, भले ही अधिकारी अपनी छवि सुधारने का प्रयास कर रहे हों। मानवाधिकार वकील मोईन ख़ज़ाएली का कहना है कि ईरानी आपराधिक क़ानून में महिलाओं द्वारा गाना, संगीत प्रस्तुत करना या संगीत रचनाओं का प्रसार अपराध नहीं है, इसलिए इसे अश्लील सामग्री का प्रकाशन नहीं माना जा सकता। एमनेस्टी इंटरनेशनल जैसे समूह कोड़े मारने को यातना की श्रेणी में रखते हैं और इसे राज्यों की अंतरराष्ट्रीय बाध्यताओं का उल्लंघन मानते हैं।

यह मामला ईरान के भीतर महिलाओं और कलाकारों पर लगी पाबंदियों के व्यापक संदर्भ में सामने आया है। 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद से महिलाओं का सार्वजनिक रूप से अकेले गाना प्रतिबंधित है और हिजाब अनिवार्य है। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद 'महिला, जीवन, स्वतंत्रता' आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में ईरानी महिलाओं ने सविनय अवज्ञा के तौर पर हिजाब छोड़ दिया था, और 2025 की शुरुआत से अधिकारियों ने हिजाब क़ानून को सख़्ती से लागू नहीं किया है। इसके बावजूद, अहमदी पर कार्रवाई यह संकेत देती है कि न्यायिक प्रणाली अब भी सांस्कृतिक अभिव्यक्ति पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए सक्रिय है।

दक्षिण एशियाई परिप्रेक्ष्य से, यह घटनाक्रम ईरान के साथ भारत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों के चलते प्रासंगिक है, जहाँ धार्मिक स्वतंत्रता और महिला अधिकारों पर बहस जारी है। हाल ही में अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम और आंशिक इंटरनेट बहाली जैसे कूटनीतिक क़दमों के बीच आए इस फ़ैसले ने ईरान की आंतरिक नीतियों और अंतरराष्ट्रीय छवि के बीच तनाव को उजागर किया है। ईरानी अधिकारियों ने अभी तक राजकीय मीडिया के माध्यम से इस सज़ा की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, जिसे संभावित विरोध प्रदर्शनों को रोकने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

फ़िलहाल, अहमदी और उनकी टीम इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ अपील कर सकते हैं। मानवाधिकार संगठनों और ईरानी प्रवासी कलाकारों ने इस सज़ा को सांस्कृतिक दमन का ताज़ा उदाहरण बताते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से संज्ञान लेने की अपील की है। आगे की क़ानूनी प्रक्रिया पर नज़र रहेगी, जबकि ईरान के भीतर हिजाब और कलात्मक स्वतंत्रता को लेकर सामाजिक दबाव बना हुआ है।

स्रोतों में मतभेद

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0%कम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

निंदक100%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
अरब लेवांत-मगरिब प्रेसइज़राइली प्रेस
अरब लेवांत-मगरिब प्रेस
आक्रोशचेतावनी

युवा गायिका परस्तू अहमदी को बिना हिजाब के यूट्यूब पर प्रस्तुति देने के लिए 74 कोड़े और दो साल की कलात्मक प्रतिबंध की सज़ा ने ईरान में महिलाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों पर फिर से ध्यान खींचा है। उनके प्रदर्शन को महिला एकल गायन पर प्रतिबंध और अनिवार्य हिजाब के लिए सीधी चुनौती माना गया, जिससे वह सोशल मीडिया पर प्रतिरोध का प्रतीक बन गईं।

इज़राइली प्रेस/ सुरक्षा
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ईरानी शासन ने गायिका परस्तू अहमदी और आठ सहयोगियों को अश्लील और अनैतिक सामग्री फैलाने के आरोप में 74 कोड़े, दो साल की यात्रा प्रतिबंध और कलात्मक गतिविधि पर प्रतिबंध की सज़ा सुनाई है। क़ोम की एक अदालत द्वारा दिया गया यह फ़ैसला, महिलाओं और कलाकारों के प्रति इस्लामी गणराज्य के व्यवस्थित दमन का एक और सबूत है।

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