
संयुक्त राष्ट्र और इज़राइली मानवाधिकार संगठन की रिपोर्ट में फ़लस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने के आरोप
ग़ाज़ा और पश्चिमी तट पर बच्चों की मौत के पैटर्न पर अंतरराष्ट्रीय जाँच और बी'त्सेलम की रिपोर्ट ने जवाबदेही की कमी को रेखांकित किया, जबकि इज़राइल ने आरोपों को खारिज किया।
संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र जाँच आयोग ने ग़ाज़ा में अक्टूबर 2023 से मार्च 2026 के बीच 20,000 से अधिक फ़लस्तीनी बच्चों की मौत और 44,000 से अधिक के घायल होने का दस्तावेज़ीकरण किया है, और इस पैमाने को आधुनिक संघर्षों में 'अभूतपूर्व' बताया है। आयोग के अनुसार, फोरेंसिक साक्ष्य और सैन्य विश्लेषण के आधार पर यह मानने के उचित आधार हैं कि कुछ बच्चों को स्नाइपर या ड्रोन से सिर और ऊपरी धड़ पर एकल गोली मारकर जानबूझकर निशाना बनाया गया। इसी अवधि में इज़राइली मानवाधिकार संगठन बी'त्सेलम ने पश्चिमी तट पर 235 फ़लस्तीनी बच्चों और किशोरों की मौत दर्ज की, जिनमें से अधिकांश इज़राइली सैनिकों द्वारा मारे गए, और 2025 में ही 54 बच्चों की मौत हुई। बी'त्सेलम की कार्यकारी निदेशक यूली नोवाक ने इसे एक ऐसी व्यापक नीति का परिणाम बताया जो सैनिकों को बिना जवाबदेही के गोली चलाने और मारने की 'लाइसेंस' देती है।
इज़राइली सरकार ने संयुक्त राष्ट्र आयोग की रिपोर्ट को सिरे से खारिज कर दिया और जाँच में सहयोग नहीं किया, जबकि फ़लस्तीनी प्राधिकरण और ग़ाज़ा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने जानकारी उपलब्ध कराई। इज़राइली रक्षा बलों (आईडीएफ) के प्रवक्ता ने कहा कि सेना जानबूझकर असंलग्न नागरिकों को निशाना नहीं बनाती और हर आरोप की जाँच की जाती है। आईडीएफ ने यह भी दावा किया कि 2023-2024 में पश्चिमी तट पर मारे गए 96% फ़लस्तीनी 'आतंकी गतिविधि' में शामिल थे, जिसे बी'त्सेलम ने स्पष्ट झूठ बताते हुए कहा कि 2025 में मारे गए नाबालिगों के विश्लेषण में उनके ख़तरा या उग्रवादी समूहों का सदस्य होने का कोई सबूत नहीं मिला।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने पश्चिमी तट पर इज़राइली बस्तियों के 'अनवरत विस्तार और त्वरण' की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इससे तनाव भड़कता है, अवैध कब्ज़ा मज़बूत होता है और फ़लस्तीनी आत्मनिर्णय का अधिकार कमज़ोर होता है। सुरक्षा परिषद को दी गई एक तिमाही रिपोर्ट में उन्होंने ई1 क्षेत्र में बस्ती योजना को दो-राज्य समाधान के लिए 'अस्तित्वगत ख़तरा' बताया। संयुक्त राष्ट्र के उप विशेष समन्वयक रामिज़ अलाकबारोव ने परिषद को बताया कि सभी बस्तियाँ और संबंधित ढाँचा अंतरराष्ट्रीय कानून का स्पष्ट उल्लंघन हैं और इन्हें तुरंत रोका जाना चाहिए। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इज़राइल का एरिया सी में भूमि पंजीकरण का कदम कब्ज़े को और स्थायी बना सकता है।
मानवीय स्थिति पर अलाकबारोव ने बताया कि युद्धविराम के बावजूद ग़ाज़ा में भारी पीड़ा जारी है, इज़राइल अब लगभग 70% क्षेत्र को नियंत्रित करता है जिससे नागरिक सीमित इलाकों में सिमट रहे हैं, और लगभग 70% आबादी के पास उचित आश्रय नहीं है। पश्चिमी तट में बसने वालों की हिंसा, पहुँच प्रतिबंध और लंबे सुरक्षा अभियानों ने 1967 के बाद का सबसे बड़ा विस्थापन संकट पैदा कर दिया है। सुरक्षा परिषद की पाँच यूरोपीय सदस्यों—फ्रांस, ब्रिटेन, ग्रीस, लातविया और डेनमार्क—ने बस्ती गतिविधियों की निंदा की और इज़राइल से जवाबदेही सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
ये रिपोर्ट और बयान अंतरराष्ट्रीय कानूनी रिकॉर्ड में इज़ाफ़ा करते हैं, हालाँकि स्वयं अभियोजन नहीं करते। बी'त्सेलम और येश दिन के आँकड़ों के अनुसार अक्टूबर 2023 के बाद से पश्चिमी तट में किसी फ़लस्तीनी की हत्या के लिए किसी इज़राइली पर आरोप नहीं लगाया गया है। आईडीएफ ने कुछ मामलों की जाँच जारी रहने की बात कही है, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि जाँचें अक्सर बिना कानूनी नतीजे के समाप्त हो जाती हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 2803 (2025) के तहत फ़लस्तीनी प्राधिकरण को ग़ाज़ा में पूर्ण ज़िम्मेदारी संभालने के लिए तैयार करने हेतु अंतरराष्ट्रीय समर्थन जारी रखने पर ज़ोर दिया गया है, और दो-राज्य समाधान की दिशा में कूटनीतिक प्रयासों के तेज़ होने की उम्मीद है।
| अरब खाड़ी प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.40 | critical |
Palestine denounces the settlement plan as a war crime, calling for international intervention.
International law language is used to turn a political dispute into a legal violation, making moral condemnation inevitable.
Israeli security concerns and the context of Palestinian attacks that might justify the measures are omitted.
Iran responds with cyber attacks to Israeli aggression, showing the war is widening.
Escalation is presented as a symmetrical and inevitable reaction, legitimizing Iranian actions as countermeasures.
The proportionality of the attacks and Israeli civilian victims of cyber attacks are not discussed.
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