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भू-राजनीति और राजनीतिमंगलवार, 23 जून 2026

रूस ने यूक्रेन वार्ता के लिए इस्तांबुल समझौतों, एंकोरेज वार्ता और ज़मीनी हक़ीक़त को आधार बताया

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस 2022 के इस्तांबुल समझौतों, 2025 की एंकोरेज वार्ता और मोर्चे की वास्तविकताओं के आधार पर यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है, जबकि कीव के हमलों को केवल मज़बूत स्थिति का दिखावा बताया।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 23 जून को सरकारी बैठक में कहा कि मॉस्को यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है, जिसका आधार 2022 में इस्तांबुल में हुए समझौते, 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एंकोरेज में चर्चा की गई रूपरेखा और युद्ध के मोर्चे की मौजूदा वास्तविकताएँ होंगी। पुतिन ने यह भी कहा कि रूस इस्तांबुल समझौतों से पीछे हटने का कोई कारण नहीं देखता, जिन्हें उस समय यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने पुष्टि भी कर दी थी। उन्होंने कीव के हालिया हमलों को केवल “मज़बूत स्थिति का आभास” पैदा करने की कोशिश करार दिया, जबकि ज़मीनी हक़ीक़त में रूसी सेनाएँ लगातार आगे बढ़ रही हैं।

क्रेमलिन के अनुसार, इस्तांबुल वार्ता में यूक्रेन के स्थायी तटस्थता, नाटो से दूरी और सुरक्षा गारंटियों पर प्रारंभिक सहमति बनी थी, लेकिन बाद में कीव ने इसे छोड़ दिया। एंकोरेज शिखर वार्ता में पुतिन और ट्रंप के बीच एक ऐसी रूपरेखा पर चर्चा हुई जिसमें पूरे डोनबास पर रूसी नियंत्रण और ज़ापोरिज्जिया व ख़ेरसॉन क्षेत्रों में मोर्चे को स्थिर करने की बात शामिल थी। इसके अलावा, पुतिन ने 2024 में विदेश मंत्रालय में दिए अपने भाषण के सिद्धांत को भी वार्ता का हिस्सा बताया, जिसमें चारों क्षेत्रों से यूक्रेनी सेना की पूर्ण वापसी, नाटो सदस्यता का त्याग और इन इलाकों को अंतरराष्ट्रीय संधियों में रूस का हिस्सा मानने की माँग शामिल है। हालाँकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसी वर्ष मार्च में कहा था कि “वास्तविकता पूरी तरह बदल चुकी है” और इस्तांबुल समझौते अब वार्ता का आधार नहीं हैं, जो रूसी रुख़ में आंतरिक बदलाव का संकेत देता है।

कीव और यूरोपीय नेताओं की ओर से इन शर्तों को अधिकतमवादी माँगों के रूप में देखा गया है, जिन्हें पहले भी खारिज किया जा चुका है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस्तांबुल समझौता इसलिए टूटा क्योंकि पश्चिमी देश सुरक्षा गारंटी देने को तैयार नहीं थे और रूस पर भरोसा नहीं था। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस मामले में अपनी भूमिका के दावों को “पूरी तरह मनगढ़ंत” बताया था। हाल ही में फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के नेताओं ने मौजूदा अग्रिम पंक्ति पर युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, जिसे रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने “आत्मसमर्पण की माँग” कहकर नकार दिया। स्वतंत्र रूसी विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन द्वारा बताए गए तीनों आधार मिलकर वही शर्तें हैं जो मॉस्को 2022 से रखता आ रहा है और जिन पर कीव व यूरोप सहमत नहीं हुए हैं।

युद्ध के मोर्चे पर रूसी सेना धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है, और पुतिन ने दावा किया कि नागरिक ढाँचे पर यूक्रेनी हमले, जैसे बेलारूसी खिलाड़ियों की बस या स्टारोबेल्स्क कॉलेज पर हमला, मोर्चे की स्थिति नहीं बदल सकते। इससे मॉस्को का यह संकेत मज़बूत होता है कि ज़मीनी हक़ीक़त उसके पक्ष में है और वह अपनी शर्तों पर ही बातचीत करेगा। फरवरी में अबू धाबी में अमेरिकी मध्यस्थता में हुई रूस-यूक्रेन वार्ता के बाद से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है, हालाँकि तुर्की ने नई वार्ता के लिए मंच उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

भारत, जिसने शुरू से ही बातचीत और कूटनीति के ज़रिए समाधान की वकालत की है, के लिए यह घटनाक्रम संघर्ष की गहरी जटिलता को रेखांकित करता है। दोनों पक्षों की शर्तों के बीच बुनियादी अंतर बना हुआ है, जिससे निकट भविष्य में किसी सफलता की संभावना कम दिखती है। वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और सुरक्षा ढाँचे पर इस युद्ध का प्रभाव दक्षिण एशिया सहित पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, और भारत जैसे देशों के लिए स्थिरता की बहाली एक प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है। फिलहाल, वार्ता का डोज़ियर ठंडे बस्ते में है और अगला ठोस कदम किसी भी पक्ष की ओर से स्पष्ट नहीं है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

41%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
रूसी और सीआईएस प्रेसईरानी और संबद्ध प्रेस
रूसी और सीआईएस प्रेस/ राजकीय
व्यावहारिकतासंदेहउदासीनता

मॉस्को इस्तांबुल में हुए उन मसौदा समझौतों के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है, जिन पर कीव ने पहले हस्ताक्षर कर दिए थे, साथ ही एंकोरेज में चर्चा की गई रूपरेखा और ज़मीनी हकीकत को भी शामिल किया गया है। कीव की ताकत दिखाने की कोशिशों को दिखावा बताकर खारिज कर दिया जाता है, जबकि रूसी सेनाएँ रोज़ आगे बढ़ रही हैं। क्रेमलिन का मानना है कि उन शर्तों से हटने का कोई कारण नहीं, जिन्हें यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने खुद स्वीकार किया था।

ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
उदासीनताव्यावहारिकता

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि मॉस्को इस्तांबुल समझौतों के आधार पर यूक्रेन के साथ बातचीत के लिए तैयार है। इस खबर को बिना किसी अतिरिक्त टिप्पणी या विश्लेषण के संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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गर्भावस्था के कारण अनुबंध समाप्ति पर लाजियो महिला टीम को ऐतिहासिक मुआवजा देने का आदेश·विला सर्टोसा की बिक्री: बर्लुस्कोनी परिवार से कतर के शाही परिवार को 350 मिलियन यूरो में हस्तांतरण·ग्रुप बी की सिरमौर जंग: वैंकूवर में स्विट्जरलैंड और कनाडा के बीच अंक तालिका का फैसला·विश्व कप 2026: कोलंबिया की जीत से सात टीमें नॉकआउट में, अब ग्रुप चरण का आखिरी दौर·ऑस्ट्रियाई ग्रां प्री से पहले ब्रियातोरे का अल्टीमेटम: कोलापिंतो का भविष्य चार रेसों में तय होगा·सिएटल में बोस्निया और कतर की 'करो या मरो' की टक्कर, एक अंक पर दोनों का दम घुटता हुआ·केन्या में आयकर दाखिल करने की नई चरणबद्ध समय-सीमा, घाना में नियामक सख्ती·अफगानिस्तान से अंतिम अमेरिकी सैनिक की विदाई: जनरल डोनाह्यू का इस्तीफा और पेंटागन में बदलाव की लहर·गर्भावस्था के कारण अनुबंध समाप्ति पर लाजियो महिला टीम को ऐतिहासिक मुआवजा देने का आदेश·विला सर्टोसा की बिक्री: बर्लुस्कोनी परिवार से कतर के शाही परिवार को 350 मिलियन यूरो में हस्तांतरण·ग्रुप बी की सिरमौर जंग: वैंकूवर में स्विट्जरलैंड और कनाडा के बीच अंक तालिका का फैसला·विश्व कप 2026: कोलंबिया की जीत से सात टीमें नॉकआउट में, अब ग्रुप चरण का आखिरी दौर·ऑस्ट्रियाई ग्रां प्री से पहले ब्रियातोरे का अल्टीमेटम: कोलापिंतो का भविष्य चार रेसों में तय होगा·सिएटल में बोस्निया और कतर की 'करो या मरो' की टक्कर, एक अंक पर दोनों का दम घुटता हुआ·केन्या में आयकर दाखिल करने की नई चरणबद्ध समय-सीमा, घाना में नियामक सख्ती·अफगानिस्तान से अंतिम अमेरिकी सैनिक की विदाई: जनरल डोनाह्यू का इस्तीफा और पेंटागन में बदलाव की लहर·
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मंगलवार, 23 जून 2026

रूस ने यूक्रेन वार्ता के लिए इस्तांबुल समझौतों, एंकोरेज वार्ता और ज़मीनी हक़ीक़त को आधार बताया

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि रूस 2022 के इस्तांबुल समझौतों, 2025 की एंकोरेज वार्ता और मोर्चे की वास्तविकताओं के आधार पर यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है, जबकि कीव के हमलों को केवल मज़बूत स्थिति का दिखावा बताया।

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने 23 जून को सरकारी बैठक में कहा कि मॉस्को यूक्रेन के साथ शांति वार्ता के लिए तैयार है, जिसका आधार 2022 में इस्तांबुल में हुए समझौते, 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एंकोरेज में चर्चा की गई रूपरेखा और युद्ध के मोर्चे की मौजूदा वास्तविकताएँ होंगी। पुतिन ने यह भी कहा कि रूस इस्तांबुल समझौतों से पीछे हटने का कोई कारण नहीं देखता, जिन्हें उस समय यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने पुष्टि भी कर दी थी। उन्होंने कीव के हालिया हमलों को केवल “मज़बूत स्थिति का आभास” पैदा करने की कोशिश करार दिया, जबकि ज़मीनी हक़ीक़त में रूसी सेनाएँ लगातार आगे बढ़ रही हैं।

क्रेमलिन के अनुसार, इस्तांबुल वार्ता में यूक्रेन के स्थायी तटस्थता, नाटो से दूरी और सुरक्षा गारंटियों पर प्रारंभिक सहमति बनी थी, लेकिन बाद में कीव ने इसे छोड़ दिया। एंकोरेज शिखर वार्ता में पुतिन और ट्रंप के बीच एक ऐसी रूपरेखा पर चर्चा हुई जिसमें पूरे डोनबास पर रूसी नियंत्रण और ज़ापोरिज्जिया व ख़ेरसॉन क्षेत्रों में मोर्चे को स्थिर करने की बात शामिल थी। इसके अलावा, पुतिन ने 2024 में विदेश मंत्रालय में दिए अपने भाषण के सिद्धांत को भी वार्ता का हिस्सा बताया, जिसमें चारों क्षेत्रों से यूक्रेनी सेना की पूर्ण वापसी, नाटो सदस्यता का त्याग और इन इलाकों को अंतरराष्ट्रीय संधियों में रूस का हिस्सा मानने की माँग शामिल है। हालाँकि, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इसी वर्ष मार्च में कहा था कि “वास्तविकता पूरी तरह बदल चुकी है” और इस्तांबुल समझौते अब वार्ता का आधार नहीं हैं, जो रूसी रुख़ में आंतरिक बदलाव का संकेत देता है।

कीव और यूरोपीय नेताओं की ओर से इन शर्तों को अधिकतमवादी माँगों के रूप में देखा गया है, जिन्हें पहले भी खारिज किया जा चुका है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस्तांबुल समझौता इसलिए टूटा क्योंकि पश्चिमी देश सुरक्षा गारंटी देने को तैयार नहीं थे और रूस पर भरोसा नहीं था। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस मामले में अपनी भूमिका के दावों को “पूरी तरह मनगढ़ंत” बताया था। हाल ही में फ्रांस, ब्रिटेन और जर्मनी के नेताओं ने मौजूदा अग्रिम पंक्ति पर युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था, जिसे रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने “आत्मसमर्पण की माँग” कहकर नकार दिया। स्वतंत्र रूसी विश्लेषकों के अनुसार, पुतिन द्वारा बताए गए तीनों आधार मिलकर वही शर्तें हैं जो मॉस्को 2022 से रखता आ रहा है और जिन पर कीव व यूरोप सहमत नहीं हुए हैं।

युद्ध के मोर्चे पर रूसी सेना धीरे-धीरे आगे बढ़ रही है, और पुतिन ने दावा किया कि नागरिक ढाँचे पर यूक्रेनी हमले, जैसे बेलारूसी खिलाड़ियों की बस या स्टारोबेल्स्क कॉलेज पर हमला, मोर्चे की स्थिति नहीं बदल सकते। इससे मॉस्को का यह संकेत मज़बूत होता है कि ज़मीनी हक़ीक़त उसके पक्ष में है और वह अपनी शर्तों पर ही बातचीत करेगा। फरवरी में अबू धाबी में अमेरिकी मध्यस्थता में हुई रूस-यूक्रेन वार्ता के बाद से कोई ठोस पहल सामने नहीं आई है, हालाँकि तुर्की ने नई वार्ता के लिए मंच उपलब्ध कराने की पेशकश की है।

भारत, जिसने शुरू से ही बातचीत और कूटनीति के ज़रिए समाधान की वकालत की है, के लिए यह घटनाक्रम संघर्ष की गहरी जटिलता को रेखांकित करता है। दोनों पक्षों की शर्तों के बीच बुनियादी अंतर बना हुआ है, जिससे निकट भविष्य में किसी सफलता की संभावना कम दिखती है। वैश्विक ऊर्जा बाज़ारों और सुरक्षा ढाँचे पर इस युद्ध का प्रभाव दक्षिण एशिया सहित पूरी दुनिया को प्रभावित कर रहा है, और भारत जैसे देशों के लिए स्थिरता की बहाली एक प्रमुख प्राथमिकता बनी हुई है। फिलहाल, वार्ता का डोज़ियर ठंडे बस्ते में है और अगला ठोस कदम किसी भी पक्ष की ओर से स्पष्ट नहीं है।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 3 स्रोत · 3 भाषाएँ

41%मध्यम

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक71%
न्यूनत्र29%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 3 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
रूसी और सीआईएस प्रेसईरानी और संबद्ध प्रेस
रूसी और सीआईएस प्रेस/ राजकीय
व्यावहारिकतासंदेहउदासीनता

मॉस्को इस्तांबुल में हुए उन मसौदा समझौतों के आधार पर बातचीत के लिए तैयार है, जिन पर कीव ने पहले हस्ताक्षर कर दिए थे, साथ ही एंकोरेज में चर्चा की गई रूपरेखा और ज़मीनी हकीकत को भी शामिल किया गया है। कीव की ताकत दिखाने की कोशिशों को दिखावा बताकर खारिज कर दिया जाता है, जबकि रूसी सेनाएँ रोज़ आगे बढ़ रही हैं। क्रेमलिन का मानना है कि उन शर्तों से हटने का कोई कारण नहीं, जिन्हें यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने खुद स्वीकार किया था।

ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
उदासीनताव्यावहारिकता

रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि मॉस्को इस्तांबुल समझौतों के आधार पर यूक्रेन के साथ बातचीत के लिए तैयार है। इस खबर को बिना किसी अतिरिक्त टिप्पणी या विश्लेषण के संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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