
मोनाको डायमंड लीग: डुप्लांटिस की घरेलू जीत, कैनेडी का रिकॉर्ड और किपयेगॉन की वापसी
मोनाको में पहली बार स्थानीय निवासी के रूप में उतरे आर्मंड डुप्लांटिस ने 6.07 मीटर के साथ खिताब जीता, जबकि ऑस्ट्रेलिया की नीना कैनेडी ने 4.95 मीटर का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया और फेथ किपयेगॉन ने चोट के बाद लय हासिल करने की कोशिश की।
मोनाको की चमकदार रोशनी के बीच शुक्रवार रात दो ध्रुवीय कहानियाँ लिखी गईं। पुरुष पोल वॉल्ट में विश्व रिकॉर्डधारी आर्मंड ‘मोंडो’ डुप्लांटिस ने 6.07 मीटर की छलांग के साथ जीत दर्ज की और अपना ही मीट रिकॉर्ड दो सेंटीमीटर ऊपर पहुँचाया। यह उनकी पहली प्रतियोगिता थी जब वे मोनाको के स्थायी निवासी के रूप में उतरे—उन्होंने पत्नी देसिरे के साथ स्टॉकहोम से यहाँ रहने का फैसला किया था और खुद आयोजकों से आग्रह कर इस स्पर्धा को कार्यक्रम में शामिल करवाया। इसके बाद उन्होंने 6.15 मीटर की ऊँचाई पर तीन प्रयास किए, लेकिन लय और अनुभूति नहीं जुटा सके और तीनों बार असफल रहे।
डुप्लांटिस की इस जीत ने स्टॉकहोम में मिली दुर्लभ हार के बाद उनकी भूख को और तेज कर दिया। उन्होंने कहा कि शादी के बाद मानसिक रूप से थोड़ा असंतुलित महसूस कर रहे थे, लेकिन अब पूरी तरह से केंद्रित और तरोताजा हैं। नौ सत्रों से लगातार 6.00 मीटर की बाधा पार करने वाले इस 26 वर्षीय स्वीडिश-अमेरिकी खिलाड़ी ने स्वीकार किया कि समय बहुत तेजी से बीता है, फिर भी प्रेरणा और कड़ी मेहनत का जुनून बरकरार है। यूरोपीय परिप्रेक्ष्य से देखें तो मोनाको में बसने के बाद यह पहला मौका था जब उन्होंने ‘होम टर्फ’ पर छलांग लगाई और अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
महिला पोल वॉल्ट में ऑस्ट्रेलिया की नीना कैनेडी ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ 4.95 मीटर के साथ राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा और पिछले पाँच वर्षों में दुनिया की सर्वोच्च ऊँचाई हासिल की। यह प्रदर्शन उन्हें ऑल-टाइम सूची में पाँचवें स्थान पर ले गया। 29 वर्षीय कैनेडी ने बताया कि तकनीकी रूप से जटिल इस स्पर्धा में सब कुछ एक साथ जुड़ गया और मोनाको की पट्टी और भीड़ ने इसे खास बना दिया। पिछले वर्ष हैमस्ट्रिंग चोट के कारण 12 महीने बाहर रहने के बाद यह वापसी उनके आत्मविश्वास की नई ऊँचाई को दर्शाती है। उन्होंने ‘प्रोजेक्ट 5 मीटर’ का नारा दिया और कहा कि अगर सब कुछ सही रहा तो ग्लासगो में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों में वह पाँच मीटर की जादुई रेखा पार कर सकती हैं।
अफ्रीकी महाद्वीप की नजर फेथ किपयेगॉन पर टिकी रही, जो हैमस्ट्रिंग चोट से उबरते हुए 3000 मीटर दौड़ में उतरीं। केन्याई धाविका ने पिछले सप्ताह यूजीन में मील रेस में तीसरा स्थान पाने के बाद कहा कि हार खेल का हिस्सा है और वह अभी 98 प्रतिशत क्षमता पर हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पूर्ण फिटनेस के बिना दुनिया की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों से मुकाबला आसान नहीं, लेकिन मोनाको की दौड़ से लय और आत्मविश्वास वापस पाने की उम्मीद है। किपयेगॉन का बड़ा लक्ष्य सितंबर में बुडापेस्ट में होने वाली वर्ल्ड एथलेटिक्स की पहली अल्टीमेट चैंपियनशिप है, जहाँ वह पूरी तरह स्वस्थ होकर उतरना चाहती हैं।
अन्य स्पर्धाओं में ऑस्ट्रेलिया के कर्टिस मार्शल ने 5.85 मीटर के साथ पुरुष पोल वॉल्ट में कांस्य पदक जीता, जबकि महिला भाला फेंक में चीन की यान जियी ने 68.75 मीटर के प्रयास से सहज जीत दर्ज की। ऑस्ट्रेलिया की मैकेंजी लिटिल 57.67 मीटर के साथ पाँचवें स्थान पर रहीं। पुरुष 5000 मीटर में काई रॉबिन्सन 13:26.70 के समय के साथ 11वें स्थान पर रहे। अब सबकी निगाहें ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों पर हैं, जहाँ कैनेडी पाँच मीटर के सपने को साकार करने उतरेंगी और डुप्लांटिस अपनी लय को और ऊँचाई देने की कोशिश करेंगे।
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स्वीडिश चैंपियन डुप्लांटिस खुद को विजयी लेकिन मानवीय बताते हैं, अपनी सीमाओं को स्वीकार करते हैं।
अपेक्षित जीत और अगली छलांग में असफलता के बीच विरोधाभास पर जोर दिया जाता है, जिससे एथलीट को मानवीय बनाने वाला कथात्मक तनाव पैदा होता है।
कैनेडी के रिकॉर्ड या किपयेगॉन की वापसी का उल्लेख नहीं किया गया है, केवल डुप्लांटिस के प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
ऑस्ट्रेलियाई कैनेडी खुद को नई ऊंचाइयों की ओर प्रक्षेपित करती हैं, रिकॉर्ड को राष्ट्रमंडल खेलों के लिए एक स्प्रिंगबोर्ड के रूप में मनाती हैं।
विजयी भाषा का उपयोग किया जाता है और रिकॉर्ड को एक आसन्न भविष्य के लक्ष्य से जोड़ा जाता है, जो अजेय प्रगति की कथा बनाता है।
डुप्लांटिस की जीत या किपयेगॉन की स्थिति का उल्लेख नहीं किया गया है, केवल कैनेडी की सफलता पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
स्वीडिश चैंपियन डुप्लांटिस खुद को एक अथक एथलीट के रूप में प्रस्तुत करते हैं, दृढ़ संकल्प के साथ हार पर काबू पाते हैं।
सफलताओं की निरंतरता पर जोर दिया जाता है और हार को कम किया जाता है, जिससे अप्रतिम प्रभुत्व की छवि बनती है।
कैनेडी के रिकॉर्ड या किपयेगॉन के पुनर्वास का उल्लेख नहीं किया गया है, डुप्लांटिस के करियर पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
केन्याई किपयेगॉन खुद को एक यथार्थवादी और दृढ़ एथलीट के रूप में प्रस्तुत करती हैं, हार को प्रेरणा के रूप में उपयोग करने के लिए तैयार हैं।
एथलीट को स्वयं आवाज दी जाती है, उनके उद्धरणों का उपयोग करके लचीलापन और कठिनाइयों की स्वीकृति की कथा बनाई जाती है।
डुप्लांटिस या कैनेडी की सफलताओं का उल्लेख नहीं किया गया है, केवल किपयेगॉन की पुनर्वास यात्रा पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
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