
लाल सागर में हूती हमलों से ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के पार, तेल आपूर्ति को दोहरा झटका
यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों ने दो सऊदी तेल टैंकरों पर हमले का दावा किया, जिसके बाद ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत पहली बार मई के बाद 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बंद हुई।
इस सप्ताह वैश्विक तेल बाजार में तब हलचल मच गई जब हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दो सऊदी टैंकरों को निशाना बनाने की घोषणा की। इसके तुरंत बाद ब्रेंट क्रूड का वायदा भाव 7 प्रतिशत उछलकर 101.06 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया और यह साप्ताहिक आधार पर 14.6 प्रतिशत की बढ़त की ओर अग्रसर है। अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट भी 91.20 डॉलर पर पहुंचकर 11 जून के बाद के सर्वोच्च स्तर पर है।
यह तेज़ी केवल एक घटना का नहीं, बल्कि आपूर्ति के दो प्रमुख मार्गों के एक साथ अवरुद्ध होने के भय का परिणाम है। पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य वस्तुतः बंद है—केप्लर के जहाज़ ट्रैकिंग आंकड़ों के अनुसार गुरुवार को केवल एक टैंकर वहां से गुज़रा, जो 7 मई के बाद सबसे कम दैनिक आवाजाही है। अब बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य, जो लाल सागर से हिंद महासागर को जोड़ता है, पर भी ख़तरा मंडरा रहा है। रिस्टाड एनर्जी के विश्लेषण के अनुसार, हूती हमलों से पहले तक़रीबन 25 लाख बैरल प्रतिदिन सऊदी तेल इसी मार्ग से गुज़रता था। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात होर्मुज की बंदी से बचने के लिए पाइपलाइनों के ज़रिए लाल सागर के रास्ते से प्रतिदिन लगभग 68 लाख बैरल का निर्यात कर रहे थे, जो अब जोखिम में है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने इस संकट को और गहरा किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ख़िलाफ़ “बड़े हमले” की धमकी दी, जबकि तेहरान ने चेतावनी दी कि ऐसी कार्रवाई में मदद करने वाले किसी भी देश को ज़िम्मेदार ठहराया जाएगा। क्षेत्रीय सूत्रों के अनुसार, ईरान ने हूतियों पर यह दबाव डाला कि यदि अमेरिकी हमले जारी रहे तो वे बाब अल-मंदेब को बंद कर दें। इसके अलावा, कज़ाख़स्तान के ऊर्जा मंत्रालय ने बताया कि यूक्रेनी ड्रोन हमलों के कारण कैस्पियन पाइपलाइन कंसोर्टियम के टर्मिनल से लोडिंग रुकने पर उत्पादन में कटौती करनी पड़ी, जिससे वैश्विक आपूर्ति का लगभग 2 प्रतिशत प्रभावित हुआ।
कीमतों के इस उछाल का असर वैश्विक स्तर पर दिखने लगा है। अमेरिका में पेट्रोल की औसत कीमत 4.09 डॉलर प्रति गैलन हो गई, जर्मनी में डीज़ल 2.18 यूरो प्रति लीटर के करीब पहुंच गया, और पाकिस्तान व फिलीपींस में भी तेज़ वृद्धि दर्ज हुई। इसके विपरीत, भारत में सरकारी तेल कंपनियों ने फिलहाल बढ़ी लागत को अवशोषित किया है, जिससे खुदरा मूल्य स्थिर हैं। अर्जेंटीना जैसे ऊर्जा निर्यातक देश को अतिरिक्त 5 अरब डॉलर तक की आमदनी की संभावना है, परंतु वैश्विक वित्तीय बाजारों पर दबाव बढ़ा है—अमेरिकी दस-वर्षीय बांड यील्ड 4.70 प्रतिशत पर पहुंच गई, जिससे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए उधारी महंगी होगी और जोखिम प्रीमियम बढ़ेगा।
अगला ध्यान देने योग्य पड़ाव यह होगा कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच राजनयिक संपर्क बहाल होता है या फिर तनाव और बढ़कर बाब अल-मंदेब के पूर्ण अवरोध की ओर ले जाता है। साथ ही, 30 प्रतिशत से अधिक की मासिक बढ़त के साथ तेल बाजार अब केंद्रीय बैंकों की नीतिगत प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा कर रहा है, जो मुद्रास्फीति और विकास के बीच संतुलन साधने की कोशिश करेंगे।
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