
स्वीडन: पत्नी को 120 पुरुषों के साथ यौन संबंध बनाने पर मजबूर करने वाले पूर्व हेल्स एंजेल्स सदस्य को साढ़े चार साल की जेल
हार्नोसैंड की अदालत ने 61 वर्षीय व्यक्ति को गंभीर दलाली, हमले और धमकियों का दोषी ठहराया, पीड़िता को 2 लाख क्रोनर मुआवजा देने का आदेश।
स्वीडन की एक अदालत ने मंगलवार को एक 61 वर्षीय व्यक्ति को अपनी पत्नी को तीन साल तक यौन शोषण के लिए मजबूर करने के आरोप में साढ़े चार साल कैद की सज़ा सुनाई। हार्नोसैंड ज़िला न्यायालय ने उसे गंभीर दलाली, बलात्कार के प्रयास, छह मामलों में मारपीट और छह धमकियों के साथ-साथ मादक पदार्थों से जुड़े एक छोटे अपराध का दोषी पाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पति ने अपनी पत्नी को ‘राक्षस छोड़ देने’ की चेतावनी देकर भयभीत किया और सुरक्षा कैमरों के ज़रिए उसकी हर गतिविधि पर नज़र रखी। इस मामले ने फ्रांस के पेलिको प्रकरण की याद ताज़ा कर दी, जहाँ पति ने पत्नी को नशीली दवाएँ देकर दर्जनों अजनबियों द्वारा बलात्कार करवाया था।
अदालत ने पाया कि दोषी व्यक्ति ने न केवल पत्नी को वेश्यावृत्ति में धकेला, बल्कि पूरे संचालन का प्रबंधन भी स्वयं किया। तीन वर्षों में लगभग 120 पुरुषों ने पीड़िता के साथ पैसे देकर यौन संबंध बनाए, जिनमें से 28 खरीदारों को भी अदालत ने दोषी ठहराया। पति पूर्व में हेल्स एंजेल्स मोटरसाइकिल गिरोह का सदस्य रहा था और पिछले अक्टूबर से हिरासत में है, जब पत्नी ने तलाक की कार्यवाही के दौरान शिकायत दर्ज कराई। अदालत ने पीड़िता को 2 लाख स्वीडिश क्रोनर (लगभग 18,370 यूरो) का हर्जाना देने का भी आदेश दिया।
इस मामले ने अंतरराष्ट्रीय मीडिया का ध्यान खींचा है। इटली, कोलंबिया, अर्जेंटीना और ब्रिटेन के समाचार आउटलेट्स ने इसे ‘स्वीडन का पेलिको केस’ करार दिया है, हालांकि दोनों मामलों में अपराध की प्रकृति भिन्न है। फ्रांस में डोमिनिक पेलिको को 20 साल की सज़ा मिली थी, जबकि स्वीडन में सज़ा अपेक्षाकृत कम है, जिससे न्यायिक दृष्टिकोण पर सवाल उठ रहे हैं। स्वीडिश कानून के तहत गंभीर दलाली के लिए अधिकतम 10 साल की सज़ा हो सकती है, लेकिन इस मामले में अदालत ने मध्यमार्गी रुख अपनाया।
यह प्रकरण उत्तरी यूरोप में घरेलू यौन शोषण और मानव तस्करी के छिपे हुए खतरों को उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि पीड़िता द्वारा वर्षों तक चुप्पी साधने के पीछे मनोवैज्ञानिक दबाव और सामाजिक बंधन प्रमुख कारण रहे। स्वीडन जैसे प्रगतिशील देश में भी ऐसे मामले सामने आना दर्शाता है कि यौन हिंसा और शोषण के विरुद्ध जागरूकता और कानूनी सुरक्षा को लगातार मज़बूत करने की ज़रूरत है। दक्षिण एशियाई संदर्भ में देखें तो भारत और पड़ोसी देशों में घरेलू हिंसा और जबरन वेश्यावृत्ति के मामले अक्सर सामने आते हैं, लेकिन पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया धीमी और जटिल बनी रहती है। स्वीडन का यह फ़ैसला एक मिसाल पेश करता है कि कैसे पीड़िता की आवाज़ को केंद्र में रखकर अपराधी और खरीदार दोनों को जवाबदेह ठहराया जा सकता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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A Swedish man has been sentenced to four and a half years for ruthlessly exploiting his wife, forcing her into prostitution with over a hundred men. The court detailed his aggravated pimping, threats, and assault, noting he initiated and administered the entire operation. The report emphasizes the calculated nature of the crime and the victim's profound fear of her husband.
A Swedish court has convicted a former Hells Angels member for sexually exploiting his wife over three years, forcing her into paid sex with dozens of men. The case is immediately compared to the French Pelicot affair, framing it as another shocking instance of systemic male violence and marital exploitation. The narrative amplifies the victim's suffering and the husband's cruel control, portraying the sentence as a measure of justice for a deeply traumatized woman.
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