
प्रवासन नीतियों का उल्टा असर: संख्या घटी पर दक्षिणपंथी लोकप्रियता क्यों बढ़ी?
जर्मनी और स्वीडन में प्रवासन संख्या गिरने के बावजूद धुर-दक्षिणपंथी दल मजबूत हो रहे हैं, जबकि स्पेन उदार नियमितीकरण की राह पर — यूरोप में प्रवासन राजनीति के विरोधाभास गहराते जा रहे हैं।
यूरोप की प्रवासन राजनीति में एक अजीब विरोधाभास उभर रहा है: जहाँ प्रवासन के आँकड़े गिर रहे हैं, वहाँ धुर-दक्षिणपंथी दलों का जनाधार बढ़ रहा है। जर्मनी में अवैध प्रवासन कई वर्षों के निचले स्तर पर है, फिर भी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (एएफडी) सत्तारूढ़ कंज़र्वेटिव गठबंधन को पीछे छोड़ते हुए सर्वकालिक उच्च लोकप्रियता पर पहुँच गई है। कंज़र्वेटिव नेतृत्व की यह मान्यता ध्वस्त हो गई है कि प्रवासन संख्या घटने से मतदाता स्वतः संतुष्ट हो जाएँगे। स्थिति यहाँ तक पहुँच गई है कि फ्रेडरिक मेर्ज़ के शीर्ष आर्थिक सलाहकार मार्टिन ब्लेसिंग ने चेतावनी दी है कि विदेशी निवेशक एएफडी से अधिक वामपंथी लिंक्सपार्टई को ख़तरनाक मान रहे हैं, क्योंकि संपत्ति अधिकारों में हस्तक्षेप की बहस उन्हें डरा रही है।
इसके ठीक विपरीत, स्पेन एक उदार प्रवासन नीति की मिसाल बनकर उभरा है। पेद्रो सांचेज़ की समाजवादी सरकार ने अवैध प्रवासियों के लिए एक असाधारण नियमितीकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें शुरुआती अनुमान पाँच से साढ़े सात लाख आवेदनों का था। लेकिन समयसीमा ख़त्म होने में दो सप्ताह शेष रहते हुए भी नौ लाख से अधिक आवेदन आ चुके हैं — यह 2005 के पिछले रिकॉर्ड को भी पार कर गया है। सरकार का तर्क है कि इससे श्रम बाज़ार को क़ानूनी श्रमिक मिलेंगे और अर्थव्यवस्था को लाभ होगा। हालाँकि, आलोचक इसे एक धोखा बताते हैं: स्पेन शरण देने के मामले में यूरोप में तीसरे सबसे निचले पायदान पर है, और पिछले वर्ष की तुलना में शरण आवेदनों में 13.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। यानी, नियमितीकरण का यह दिखावा वास्तविक शरण प्रणाली की विफलताओं को ढक रहा है।
स्वीडन की तस्वीर एक और विरोधाभास प्रस्तुत करती है। वहाँ की कंज़र्वेटिव सरकार ने स्वीडन डेमोक्रेट्स के समर्थन से स्वैच्छिक पुनर्वापसी अनुदान को 10,000 क्रोनोर से बढ़ाकर 350,000 क्रोनोर प्रति व्यक्ति कर दिया — एक परिवार को छह लाख तक मिल सकते हैं। इस भारी वृद्धि के बाद आवेदनों में उछाल आया है: इस वर्ष मई अंत तक 608 लोग आवेदन कर चुके हैं, जिनमें से कुछ को शर्मिंदगी भी महसूस हो रही है। लेकिन सख़्त प्रवासन नीति के बावजूद, सितंबर में होने वाले संसदीय चुनाव से पहले जनमत सर्वेक्षणों में स्पष्ट वामपंथी झुकाव दिख रहा है। सोशल डेमोक्रेट नेता मागदालेना आंदरशॉन के गठबंधन को 55 प्रतिशत से अधिक समर्थन मिल रहा है, जबकि उल्फ क्रिस्टरशॉन की कंज़र्वेटिव सरकार का गठबंधन 43 प्रतिशत से भी कम पर सिमट गया है।
ये घटनाक्रम बताते हैं कि प्रवासन नीति और चुनावी नतीजों के बीच कोई सीधा-सादा संबंध नहीं है। जर्मनी में गिरते प्रवासन आँकड़ों ने एएफडी को कमज़ोर नहीं किया, बल्कि आर्थिक अनिश्चितता और संपत्ति अधिकारों जैसे मुद्दे निवेशकों की चिंता का केंद्र बन गए हैं। स्वीडन में कठोर क़दमों के बाद भी मतदाता वामपंथ की ओर लौट रहे हैं, जबकि स्पेन में उदार नियमितीकरण के पीछे शरण व्यवस्था की कमज़ोरियाँ छिपी हैं। आने वाले महीनों में जर्मन राज्य चुनावों और स्वीडिश आम चुनाव में यह विरोधाभास और गहरा सकता है, जिससे पारंपरिक दलों के लिए प्रवासन को हथियार बनाने की रणनीति की सीमाएँ उजागर होंगी।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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आगमन में भारी गिरावट के बावजूद, अति-दक्षिणपंथी दल चुनावी सर्वेक्षणों में लगातार बढ़ रहे हैं। यह धारणा कि सख्त प्रवासन नीतियाँ लोकलुभावन समर्थन को कम कर देंगी, एक भ्रम साबित हुई है। स्पेन के बड़े पैमाने पर नियमितीकरण को एक भ्रामक चाल या नीतिगत विफलता के रूप में चित्रित किया जाता है।
स्पेन के असाधारण नियमितीकरण कार्यक्रम में लगभग दस लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो प्रारंभिक अनुमानों से कहीं अधिक है। इस पहल का उद्देश्य अनियमित प्रवासियों को औपचारिक श्रम बाज़ार में शामिल करना है। आवेदनों की उच्च संख्या को बिना किसी स्पष्ट निर्णय के एक सीधे तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
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