
मनीला वार्ता में अंकोरेज प्रस्तावों की विफलता स्वीकार, यूक्रेन शांति के लिए 'नए विचारों' पर जोर
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि 2025 का अंकोरेज शांति फॉर्मूला यूक्रेन की असहमति के कारण काम नहीं आया, जबकि रूस ने हथियारों की आपूर्ति रोकने की मांग दोहराई।
23 जुलाई 2026 को मनीला में आसियान विदेश मंत्रियों की बैठक के इतर रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच 35 मिनट की मुलाकात हुई। इस दौरान रुबियो ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि अगस्त 2025 में अलास्का के अंकोरेज में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई शिखर वार्ता में उभरे प्रस्ताव 'विफल' हो चुके हैं। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इन प्रस्तावों का मुख्य कारण यूक्रेन द्वारा उन्हें अस्वीकार किया जाना था, और अब युद्ध समाप्त करने के लिए 'नए विचारों और अवधारणाओं' की आवश्यकता है।
रूसी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि लावरोव ने रुबियो को अग्रिम मोर्चे की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया और यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति जारी रखने को 'अस्वीकार्य' बताया। मॉस्को ने यह भी स्पष्ट किया कि वह राजनीतिक-कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है, लेकिन अंकोरेज में अमेरिकी वार्ताकारों द्वारा प्रस्तुत सूत्रों के प्रति प्रतिबद्ध है। दूसरी ओर, रुबियो ने कहा कि अमेरिका नाटो सहयोगियों के माध्यम से पीयूआरएल पहल के तहत यूक्रेन को हथियारों की बिक्री जारी रखेगा और इस नीति में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
इस मुलाकात से कुछ घंटे पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने ट्रंप के विशेष दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर से बातचीत की, जिसे उन्होंने 'कूटनीति को पुनर्जीवित करने और शांति को करीब लाने' की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। यूरोपीय विश्लेषकों के अनुसार, अंकोरेज का तथाकथित '3+2' फॉर्मूला—जिसमें क्रीमिया, डोनेट्स्क और लुहान्स्क पर रूसी नियंत्रण को मान्यता देने के साथ ख़ेरसॉन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों पर आंशिक समझौता शामिल था—कीव के लिए कभी स्वीकार्य नहीं रहा। यूक्रेनी पक्ष ने बार-बार कहा है कि वह डोनबास से अपनी सेना नहीं हटाएगा और मौजूदा अग्रिम पंक्ति पर युद्धविराम चाहता है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्री पेस्कोव ने इन घटनाक्रमों पर 'अत्यधिक आशावाद' के प्रति आगाह करते हुए कहा कि अभी किसी नई गतिशीलता की बात करना जल्दबाजी होगी। हालांकि, उन्होंने पुष्टि की कि अमेरिकी दूतों के मॉस्को आने की संभावना पर बातचीत जारी है। यह गतिरोध वैश्विक ऊर्जा बाजारों और खाद्य सुरक्षा को प्रभावित कर रहा है, जिसका दक्षिण एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर भी असर पड़ता है। फिलहाल, अमेरिकी-रूसी संवाद जारी रहने के संकेत हैं, लेकिन ठोस शांति वार्ता की बहाली के लिए कोई समय-सीमा तय नहीं हुई है।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.10 | neutral |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.20 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
रूस हथियारों के खिलाफ चेतावनी देता है लेकिन बातचीत के लिए तैयार है। यूरोप बिना पक्ष लिए दोनों आवाज़ों को दर्ज करता है।
तकनीक समदूरी है: दोनों पक्षों के बयान रिपोर्ट किए जाते हैं, लेकिन रूसी चेतावनी से शुरू करने से एक अंतर्निहित पदानुक्रम बनता है।
संयुक्त राज्य अमेरिका खुद को शांतिदूत के रूप में पेश करता है, एक संवेदनहीन युद्ध के अंत की सुविधा के लिए तैयार। रूसी चेतावनी गौण है।
तकनीक राज्य का व्यक्तिकरण है: अमेरिका सक्रिय अभिनेता है जो समाधान प्रदान करता है, जबकि रूस पृष्ठभूमि में चला जाता है।
रिपोर्ट में लावरोव की हथियार आपूर्ति के खिलाफ चेतावनी को छोड़ दिया गया है, केवल रुबियो के बयान पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध समाप्त करने के लिए प्रतिबद्ध है, जबकि रूस चेतावनी देता है लेकिन सुना नहीं जाता। प्रचलित कथा अमेरिकी है।
तकनीक सार्वभौमिकीकरण है: शांति के लिए अमेरिकी प्रतिबद्धता को एक सार्वभौमिक हित के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जबकि रूसी स्थिति विशिष्ट और गौण है।
कुछ लैटिन अमेरिकी मीडिया लावरोव की चेतावनी को छोड़ देते हैं, केवल रुबियो के बयान को स्थान देते हैं।
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