
कोटा विवाद से साइबर हमले तक: इंडोनेशिया, ईरान, इज़राइल, रूस में डिजिटल मोर्चे पर खींचतान
दक्षिण पूर्व एशिया की अदालतों में इंटरनेट कोटा के आर्थिक मूल्य पर बहस से लेकर पश्चिम एशिया में साइबर सुरक्षा विफलताओं और रूस में ऑनलाइन धोखाधड़ी तक, डिजिटल अधिकार और खतरे नए आयाम ले रहे हैं।
इंडोनेशिया की संवैधानिक अदालत में इंटरनेट कोटा की अवधि समाप्ति के बाद उसके हनन के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई ने दक्षिण पूर्व एशिया में दूरसंचार उपभोक्ता अधिकारों को केंद्र में ला खड़ा किया है। साउथईस्ट एशिया फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन नेटवर्क (सेफनेट) ने न्याय मित्र के रूप में तर्क दिया कि अग्रिम भुगतान से खरीदा गया अप्रयुक्त डेटा आर्थिक मूल्य रखता है और संविधान के अनुच्छेद 28H(4) के तहत निजी संपत्ति के रूप में संरक्षित है। अदालत ने अपनी टिप्पणी में कहा कि ‘क्वोटा नहीं, बल्कि भुगतान के बाद भी अप्राप्त आर्थिक मूल्य और सेवा लाभ’ की रक्षा आवश्यक है। इस मामले में प्रीपेड व पोस्टपेड उपयोगकर्ताओं के क्रमशः 23 जीबी (लगभग 48,000 रुपये) और 36 जीबी (81,000 रुपये) मासिक नुकसान के प्रमाण प्रस्तुत किए गए।
ईरान में एक अलग ही डिजिटल संकट सामने आया है, जहाँ फ़िल्टरिंग की अक्षमता और साइबर हमले एक साथ चर्चा में हैं। एक कानूनी विशेषज्ञ ने बताया कि फ़िल्टर तोड़ने वाले वीपीएन के व्यापक प्रयोग ने नीति-निर्माताओं को पूर्ण इंटरनेट कटौती की ओर धकेल दिया, जबकि ऐसे कदम हाल के साइबर हमलों को रोकने में नाकाम साबित हुए। दूसरी ओर, सुरक्षा विश्लेषकों ने चेतावनी दी कि संक्रमित मोबाइल फोन से वास्तविक फोन नंबरों के ज़रिए भेजे गए अनुरोधों की बाढ़ से घरेलू प्लेटफ़ॉर्म ठप हो सकते हैं, क्योंकि फ़ायरवॉल के लिए इन्हें पहचानना कठिन है। ईरान में पूर्व में अलीबाबा, ज़रीनपाल और फ्लाइटियो जैसे प्लेटफ़ॉर्म रैनसमवेयर हमलों का शिकार हुए हैं, जहाँ बिटकॉइन में फिरौती माँगी गई।
इज़राइल और रूस में डिजिटल स्पेस पर अलग-अलग प्रकृति के खतरे दर्ज हुए। इज़राइल इंटरनेट एसोसिएशन ने वॉट्सऐप खातों के असामान्य पैमाने पर ब्लॉक होने की पुष्टि करते हुए उपयोगकर्ताओं को डेटा बैकअप लेने और भुगतान लेकर बहाली का दावा करने वाले तृतीय-पक्ष सेवा प्रदाताओं से बचने की सलाह दी। मेटा ने स्वीकार किया कि कभी-कभी ग़लतियाँ होती हैं और वह उन्हें सुधारने का प्रयास कर रही है। रूस में सांसद अंतोन नेमकिन ने बताया कि जालसाज़ अब ऑनलाइन मार्केटप्लेस के कर्मचारी बनकर फ़र्ज़ी स्टोरेज शुल्क रोकने के बहाने एसएमएस कोड प्राप्त करते हैं, जिससे खातों पर कब्ज़ा किया जा सके। ये घटनाएँ इंगित करती हैं कि उपभोक्ता संरक्षण और बुनियादी सुरक्षा के बीच संतुलन वैश्विक स्तर पर नाज़ुक बना हुआ है, और आगामी न्यायिक निर्णयों व नीतिगत प्रतिक्रियाओं पर नज़र रखनी होगी।
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