
यूरोपीय संघ का 21वां प्रतिबंध पैकेज ग्रीस की आपत्ति से अटका, रूस ने सीमा पर सटीक हमलों की चेतावनी दी
ग्रीस के एलएनजी शिपिंग हितों के कारण यूरोपीय संघ के नए रूस-विरोधी प्रतिबंधों पर सहमति नहीं बन पाई, जबकि मॉस्को ने नाटो सीमा के निकट सैन्य अभ्यास को सीधी चुनौती बताया।
यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के स्थायी प्रतिनिधि बुधवार को रूस के खिलाफ 21वें प्रतिबंध पैकेज पर सहमति बनाने में विफल रहे, जिसके बाद गुरुवार सुबह अंतिम प्रयास के लिए बैठक बुलाई गई है। इस गतिरोध के कारण रूसी कच्चे तेल पर 44.1 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा को 23 जुलाई तक अस्थायी रूप से बढ़ाना पड़ा, ताकि वैश्विक तेल कीमतों में उछाल के बीच यह स्वतः न बढ़ जाए। यूरोपीय आयोग ने यह पैकेज महीनों पहले प्रस्तावित किया था, लेकिन सदस्य देशों के बीच बढ़ती आपत्तियों ने इसकी राह रोक दी है।
गतिरोध का केंद्र ग्रीस है, जो यूरोपीय जहाजों द्वारा रूसी तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को तीसरे देशों में ले जाने पर प्रस्तावित प्रतिबंध का विरोध कर रहा है। ग्रीक सरकार के अनुसार, इस प्रतिबंध से देश की प्रमुख शिपिंग कंपनी डायनागास को भारी नुकसान होगा, जो आर्कटिक क्षेत्र के यमल एलएनजी संयंत्र से गैस ढोने वाले विशेष बर्फतोड़ जहाजों का संचालन करती है। ग्रीस का तर्क है कि इन विशिष्ट जहाजों का अन्यत्र उपयोग संभव नहीं है और प्रतिबंध से यह लाभदायक व्यवसाय एशियाई प्रतिस्पर्धियों के हाथों में चला जाएगा। इसके अतिरिक्त, फ्रांस और इटली ने रूसी सैन्यकर्मियों पर वीज़ा प्रतिबंधों में ढील की मांग की है, जबकि पुर्तगाल और जर्मनी ने मछली आयात प्रतिबंधों पर आपत्ति जताई है। बुल्गारिया ने रूसी ऑर्थोडॉक्स चर्च के पैट्रिआर्क किरिल को प्रतिबंध सूची में शामिल करने से रोकने का दावा किया है।
इस बीच, रूस ने यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों को अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताते हुए चेतावनी दी है कि अब किसी भी विस्तार का सीधा और व्यापक नुकसान यूरोपीय देशों को उठाना पड़ेगा। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि अब तक प्रतिबंधों का अप्रत्यक्ष प्रभाव यूरोपीय करदाताओं और व्यवसायों पर पड़ता था, लेकिन आगे यह सीधे तौर पर होगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देश पोलैंड में संयुक्त सैन्य अभ्यास की योजना बना रहे हैं, जिसे यूरोपीय सांसदों और रूसी विश्लेषकों ने यूक्रेन में संभावित सैन्य तैनाती की पूर्व तैयारी बताया है। मॉस्को ने संकेत दिया है कि ऐसी तैनाती की स्थिति में पोलैंड और स्लोवाकिया की सीमा के निकट सटीक लंबी दूरी के हथियारों से हमले बढ़ाए जा सकते हैं।
यूरोपीय राजनयिक सूत्रों के अनुसार, सदस्य देशों की बढ़ती छूट मांगें प्रतिबंधों की प्रभावशीलता को कमजोर कर सकती हैं और मॉस्को के प्रति यूरोपीय एकता में दरार का संकेत हैं। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक संभावित समझौते के तहत यूरोपीय कंपनियों को 2025 के स्तर पर सीमित मात्रा में एक वर्ष तक रूसी एलएनजी का तीसरे देशों में परिवहन जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है। आयरलैंड की अध्यक्षता में गुरुवार को होने वाली बैठक में इसी आधार पर सहमति बनाने का प्रयास होगा, लेकिन ग्रीस के अलावा अन्य देशों की आपत्तियां बनी हुई हैं। यदि 23 जुलाई तक समझौता नहीं होता, तो तेल मूल्य सीमा स्वतः बढ़ जाएगी, जिससे रूसी तेल राजस्व पर अंकुश लगाने की यूरोपीय रणनीति कमजोर पड़ सकती है।
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.80 | critical |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
Russia denounces EU sanctions as illegal and self-harming, and highlights the bloc's impotence in the face of internal divisions.
Russian rhetoric uses the metaphor of 'madness' to delegitimize sanctions, and cites national resistance as proof of the failure of the European strategy.
The context of Russia's invasion of Ukraine as the cause of sanctions is omitted, as is the support of the majority of EU states for the measures.
The EU seeks a technical compromise to approve the 21st package, but Greece blocks measures on LNG and the oil price cap.
The account focuses on deadlines and procedural obstacles, presenting sanctions as a matter of negotiation between national interests, not as a geopolitical confrontation.
The role of Russia as aggressor and the moral dimension of sanctions are omitted, reducing the issue to a problem of internal coordination.
Six EU countries oppose new sanctions, demanding exceptions; European unity is in question.
The article lists exemption requests without delving into motivations, creating the impression of a fragmented and indecisive bloc.
The context of the Russian invasion and the position of the majority of EU countries in favor of sanctions are omitted, emphasizing only the dissenting voices.
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