
जकार्ता में 78% इलेक्ट्रिक कार मालिक पहली बार खरीदार नहीं, प्रोत्साहन नीति पर सवाल
दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़त के बीच आर्थिक असमानता, सुरक्षा जोखिम और राजकोषीय दबाव नीति निर्माताओं को नए सिरे से सोचने पर मजबूर कर रहे हैं।
जकार्ता के क्षेत्रीय राजस्व निकाय के आंकड़ों ने इलेक्ट्रिक वाहन प्रोत्साहनों की निष्पक्षता पर बहस छेड़ दी है। वहां 78 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कार मालिकों के लिए यह पहला वाहन नहीं, बल्कि दूसरा या तीसरा है। इस खुलासे के बाद अधिकारियों ने केंद्र सरकार के साथ मिलकर कर छूट की नीति की समीक्षा की जरूरत बताई है। जकार्ता में बैटरी इलेक्ट्रिक वाहनों को वाहन कर और स्वामित्व हस्तांतरण शुल्क से पूरी छूट है, साथ ही सम-विषम यातायात प्रतिबंधों से भी मुक्ति। राष्ट्रीय स्तर पर इंडोनेशिया में इलेक्ट्रिक कारों की थोक बिक्री 2023 की 15,716 इकाइयों से बढ़कर 2025 में 1,03,931 तक पहुंच गई, जिसका 63 प्रतिशत हिस्सा अकेले राजधानी में केंद्रित है।
आर्थिक गणित हर बाजार में अलग है। ब्यूनस आयर्स में एक लोकप्रिय इलेक्ट्रिक हैचबैक की 43.2 किलोवाट-घंटा की बैटरी को घर पर चार्ज करने पर करीब 6,480 पेसोस (लगभग 150 पेसोस प्रति किलोवाट-घंटा) खर्च आता है, जबकि सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पर यही काम 30,240 पेसोस का पड़ता है। तुलना के लिए, सबसे ज्यादा बिकने वाली पेट्रोल कार का 48 लीटर का टैंक भरने में 98,256 पेसोस लगते हैं। यानी घरेलू चार्जिंग पेट्रोल के मुकाबले 93 प्रतिशत सस्ती पड़ती है, लेकिन सार्वजनिक चार्जिंग पर यह अंतर काफी कम हो जाता है।
वहीं दूसरी ओर, हल्के इलेक्ट्रिक वाहनों की सुरक्षा चिंताएं गहरा रही हैं। अमेरिका के डेट्रॉयट में डॉक्टर ई-बाइक दुर्घटनाओं में तेज वृद्धि की रिपोर्ट कर रहे हैं, जहां 28 मील प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली ये बाइकें भारी होती हैं और अनुभवहीन सवार गंभीर चोटों का शिकार हो रहे हैं। न्यू जर्सी ने इस साल पंजीकरण और लाइसेंस अनिवार्य कर दिया है। ब्राजील के साओ पाउलो में 8.5 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक साइकिलें और हल्के वाहन सड़कों पर हैं, जहां साइकिल पथों पर 35 किमी प्रति घंटे की रफ्तार पकड़ी गई है, जबकि नियम 32 किमी प्रति घंटे की सीमा तय करते हैं। नगर निगम ने गति सीमा 20 किमी प्रति घंटा करने का प्रस्ताव रखा है।
राजकोषीय दबाव भी नीतियों को आकार दे रहा है। ब्रिटेन की पूर्ववर्ती स्टार्मर सरकार ने अप्रैल 2028 से इलेक्ट्रिक कारों पर प्रति मील 3 पेंस का परिचालन कर लगाने की घोषणा की है, जो पेट्रोल-डीजल वाहनों पर लगने वाले ईंधन उत्पाद शुल्क से राजस्व हानि की भरपाई करेगा। इससे सालाना 1.2 अरब पाउंड जुटने का अनुमान है। आलोचक इसे हरित प्रोत्साहन के विपरीत बताते हैं, जबकि सरकार का तर्क है कि यह कर न्याय का मामला है।
इन घटनाक्रमों के बीच अगला ठोस पड़ाव ब्रिटेन में 2028 में लागू होने वाला माइलेज कर है, जबकि साओ पाउलो में सार्वजनिक परामर्श के बाद नियमन का अंतिम रूप जल्द आने की उम्मीद है। जकार्ता में प्रोत्साहन समीक्षा के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या कर छूट का लाभ केवल पहली बार खरीदारों तक सीमित किया जाएगा।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
|---|---|---|
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.30 | critical |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | 0.00 | neutral |
लैटिन अमेरिकी उपभोक्ता बिजली के बिल और सुरक्षा के बीच इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की वास्तविक लागत का आकलन करता है।
यह एक ठोस स्थानीय डेटा बिंदु (बिजली की कीमत, दुर्घटनाएं) से शुरू होता है और एक कथा बनाता है जो वैश्विक राजकोषीय ढांचे को अनदेखा करता है।
लंदन और जकार्ता की राजकोषीय नीतियों को पूरी तरह से छोड़ देता है, घरेलू मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करता है।
जकार्ता सरकार प्रोत्साहनों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करती है, यह सवाल करते हुए कि क्या वे वास्तव में उन लोगों की सेवा करते हैं जिनके पास अभी तक कार नहीं है।
एक सांख्यिकीय तथ्य (78% पहली कार नहीं) का उपयोग करके प्रोत्साहनों के तर्क पर सवाल उठाता है, बिना अन्य नीतियों से जुड़े।
लंदन के प्रति मील कर या ईवी कराधान पर यूरोपीय बहस का उल्लेख नहीं करता।
अमेरिकी समुदाय दुर्घटनाओं और चोटों में वृद्धि के बाद ई-बाइक पर प्रतिबंध की मांग करते हैं।
तत्काल नकारात्मक परिणामों (दुर्घटनाएं, चोटें) पर जोर देता है ताकि तात्कालिकता की भावना पैदा हो और प्रतिबंधों को उचित ठहराया जा सके, राजकोषीय संदर्भ को अनदेखा करते हुए।
लंदन और जकार्ता की नीतियों को पूरी तरह से छोड़ देता है, केवल स्थानीय सड़क सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करता है।
ब्रिटिश सरकार इलेक्ट्रिक कारों के लिए प्रति मील कर लागू करती है, इसे राजकोषीय आवश्यकता के रूप में उचित ठहराती है, लेकिन आलोचक इसे हरित परिवहन के लिए एक निरुत्साहन के रूप में देखते हैं।
बहस के दोनों पक्षों (सरकार बनाम आलोचक) को संतुलित तरीके से प्रस्तुत करता है, बिना कोई रुख अपनाए, लेकिन मुद्दे को वैश्विक संदर्भ से अलग करता है।
जकार्ता की स्थिति का उल्लेख नहीं करता, जहां विपरीत प्रोत्साहनों पर विचार किया जा रहा है, न ही लैटिन अमेरिकी या अमेरिकी बहसों का।
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