
नाइजीरिया, भारत, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में हिंसा की चार घटनाओं ने खींचा ध्यान
एक किशोर पत्नी की चोटों से लेकर दिल्ली में बलात्कार के आरोप और विक्टोरिया में इमाम पर हमले तक, पीड़ितों की प्रतिक्रियाओं और अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठे हैं।
नाइजीरिया के एबोनी राज्य में एक 18 वर्षीय विवाहिता के चेहरे पर गंभीर चोटों का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें पड़ोसी उसके पति पर दैनिक पिटाई का आरोप लगाते दिखे। स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ता हैरिसन ग्वामनिशु के अस्पताल में लिए गए दूसरे वीडियो में युवती ने पति की गिरफ्तारी न करने की गुहार लगाई और कहा कि वह विवाह छोड़ रही है। लागोस राज्य घरेलू एवं यौन हिंसा एजेंसी ने सोशल मीडिया पर टैग किए जाने के बाद कहा कि वे मामले पर काम कर रहे हैं।
दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक 36 वर्षीय सोशल मीडिया प्रभावकार ने आरोप लगाया कि 2022 में इंस्टाग्राम के जरिए मिले एक व्यक्ति ने रील्स शूट करने के बहाने होटल बुलाकर उसके साथ बलात्कार किया और बाद में परिवार सहित धर्म परिवर्तन का दबाव डाला। पुलिस सूत्रों के अनुसार पीड़िता ने 11 मई को मुख्यालय में शिकायत दी, जबकि टाइम्स ऑफ इंडिया ने 10 जून को बुराड़ी थाने में एफआईआर दर्ज होने की सूचना दी। उत्तर दिल्ली के पुलिस उपायुक्त राजा बंथिया ने मामले की जांच की पुष्टि की है, पर धर्मांतरण के आरोप की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
कनाडा के विक्टोरिया शहर में एक इमाम पर हमले की घटना में पुलिस ने एक पूर्व अपराधी को हिरासत में लिया है। इमाम इब्राहिम अली ने बताया कि नमाज के बाद कार में बैठे थे, तभी एक व्यक्ति ने दरवाजा खोलकर उन्हें बाहर खींचने की कोशिश की, थूका और ‘घर वापस जाओ’ कहा। अली के चेहरे की हड्डी टूटी है। राष्ट्रीय कनाडाई मुस्लिम परिषद ने इस्लामोफोबिया की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई और संघीय मंत्री मार्क मिलर ने हमले को ‘घृणित’ बताया। इमाम ने सार्वजनिक रूप से हमलावर को क्षमा करने और भविष्य में किसी को नुकसान न पहुंचाने का वचन लेने की इच्छा जताई।
ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य में एक पुलिस अधिकारी को अत्यधिक बल प्रयोग के दस आरोपों में दोषी ठहराया गया। मई 2024 में वाररागुल स्थित एक घर में पारिवारिक हिंसा की शिकायत पर गए सीनियर कांस्टेबल आरोन बोवेन ने बेडरूम में अंडरवियर पहने लेटे व्यक्ति के चेहरे पर कैप्सिकम स्प्रे छिड़का और 46 सेकंड में नौ बार टेज़र का इस्तेमाल किया। मजिस्ट्रेट जेसन ओंग ने इसे ‘गैरकानूनी, असंगत और अत्यधिक’ बताते हुए 11,000 डॉलर का जुर्माना लगाया। पीड़ित ने कहा कि मनोवैज्ञानिक क्षति शारीरिक चोटों से अधिक गंभीर है और सुप्रीम कोर्ट में सिविल दावा दायर किया गया है।
चारों मामलों में पीड़ितों की प्रतिक्रियाएं भिन्न रहीं—नाईजीरियाई युवती ने पति को बचाने की कोशिश की, दिल्ली की प्रभावकार ने कानूनी रास्ता अपनाया, इमाम ने क्षमा को चुना और ऑस्ट्रेलियाई पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। सभी घटनाओं में जांच जारी है या न्यायिक प्रक्रिया चल रही है, और अधिकारियों ने आगे की कार्रवाई जांच परिणामों पर निर्भर बताई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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दिल्ली की एक इन्फ्लुएंसर ने बलात्कार और इस्लाम में धर्मांतरण के दबाव का आरोप लगाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी, जिससे महिला सुरक्षा और जबरन धर्मांतरण पर बहस तेज हो गई।
नाइजीरिया में, चोटों के निशान वाली एक 18 वर्षीय पत्नी ने पुलिस से अपने हिंसक पति को गिरफ्तार न करने की गुहार लगाई और कहा कि वह चली जाएगी। वायरल वीडियो ने घरेलू हिंसा पीड़ितों की सुरक्षा पर आक्रोश और सवाल खड़े कर दिए।
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