
जापान-दक्षिण कोरिया रक्षा वार्ता: परमाणु निरस्त्रीकरण लक्ष्य दोहराया, सहयोग बढ़ाने पर सहमति
सियोल बैठक में दोनों मंत्रियों ने खोज-बचाव अभ्यास और एरोबेटिक दलों के बीच आदान-प्रदान पर सहमति जताई, किंतु रसद समझौते पर कोरियाई जनभावना बाधा बनी रही।
जापान के रक्षा मंत्री शिंजीरो कोइज़ुमी और दक्षिण कोरियाई समकक्ष आह्न ग्यु-बाक ने रविवार को सियोल में मुलाकात कर कोरियाई प्रायद्वीप के पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण और स्थायी शांति के लक्ष्य की पुष्टि की। सियोल रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ त्रिपक्षीय सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। बैठक में जापान की वायु आत्मरक्षा बल की ब्लू इम्पल्स और दक्षिण कोरियाई वायुसेना की ब्लैक ईगल्स एरोबेटिक टीमों के बीच सहयोग और आदान-प्रदान गहराने का निर्णय लिया गया। साथ ही, दोनों देशों ने समुद्री खोज-बचाव अभ्यासों को विकसित करने और पूर्वी चीन सागर में चीनी-रूसी बमवर्षकों की संयुक्त उड़ान की जानकारी साझा की।
हालाँकि, जापान के आत्मरक्षा बलों और दक्षिण कोरियाई सेना के बीच ईंधन व गोला-बारूद की आपूर्ति संभव बनाने वाले अधिग्रहण एवं क्रॉस-सर्विसिंग समझौते (एसीएसए) पर कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने 8 जून को कहा था कि कोरियाई जनता की भावनाओं को देखते हुए इस समय एसीएसए का निष्कर्ष कठिन होगा। जापानी रक्षा मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि वे दक्षिण कोरिया की परिस्थितियों से पूरी तरह अवगत हैं और यह बैठक सहयोग का माहौल बनाने के लिए थी। गौरतलब है कि जापान ने अप्रैल में हथियार निर्यात प्रतिबंध हटाकर अपनी रक्षा उपकरण नीति में बड़ा बदलाव किया है, जबकि दक्षिण कोरिया एक उभरता हुआ हथियार निर्यातक बन रहा है। कोइज़ुमी ने संवाददाताओं से कहा, 'हमें दक्षिण कोरिया की नीतियों से सीखने की जरूरत है।'
यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय हुई है जब उत्तर कोरिया अपने परमाणु शस्त्रागार का विस्तार करने और नौसेना को परमाणु हथियारों से लैस करने की घोषणा कर चुका है। उत्तर कोरियाई नेता किम जोंग उन ने हाल ही में कहा था कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के सैन्य आधुनिकीकरण प्रयास क्षेत्र को 'परमाणु युद्ध के कगार' पर धकेल रहे हैं। वहीं, 2019 हनोई शिखर वार्ता के विफल होने के बाद से प्योंगयांग ने खुद को एक 'अपरिवर्तनीय' परमाणु शक्ति घोषित कर रखा है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक तनाव—जापान के 20वीं सदी के शुरुआती औपनिवेशिक शासन से उपजा—के बावजूद, 2022 से वाशिंगटन के प्रोत्साहन पर सियोल और टोक्यो संबंध सुधार रहे हैं। प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची और राष्ट्रपति ली ने जनवरी 2026 में शटल कूटनीति बढ़ाने पर सहमति जताई थी और मई में ऊर्जा सहयोग का विस्तार किया।
रविवार की बैठक के बाद, दोनों मंत्रियों ने जापानी और कोरियाई युवाओं के साथ एक संवाद कार्यक्रम में भाग लिया, जिसका उद्देश्य रक्षा सहयोग की समझ बढ़ाना था। कोइज़ुमी दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्युन से भी शिष्टाचार भेंट करेंगे। यह पहली बार है जब दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की पारस्परिक यात्राएँ एक वर्ष से कम अंतराल में हुई हैं—2002-03 के बाद से ऐसा नहीं हुआ था। साथ ही, इसी महीने नौ वर्षों में पहली बार समुद्री खोज-बचाव अभ्यास आयोजित किया गया। आगे की राह में, एरोबेटिक टीमों के बीच ईंधन भरने की सहायता को नियमित बनाने पर विचार किया जा रहा है, जिसकी शुरुआत जनवरी में ओकिनावा के नाहा एयर बेस पर हुई थी। विश्लेषकों के अनुसार, एसीएसए पर तत्काल प्रगति की संभावना नहीं है, लेकिन छोटे-छोटे विश्वास-निर्माण कदमों से दोनों देशों के रक्षा संबंध धीरे-धीरे मजबूत हो रहे हैं।
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