
पारिवारिक हिंसा की तीन त्रासदियाँ: सिडनी से तेहरान और चाको तक, बच्चों और माताओं की जान क्यों जा रही है?
ऑस्ट्रेलिया में पिता द्वारा बेटी को नदी में फेंकने, ईरान में 20 साल पुरानी मां की गुमशुदगी और अर्जेंटीना में मां द्वारा बेटी की हत्या—ये मामले घरेलू हिंसा के वैश्विक संकट को उजागर करते हैं।
सिडनी के इनर वेस्ट में पैरामाटा नदी के ठंडे पानी ने एक ऐसी दरिंदगी को समेट लिया जिसने ऑस्ट्रेलिया को झकझोर कर रख दिया। पुलिस के अनुसार, एक 47 वर्षीय पिता ने किराए की नाव से अपनी छह साल की बेटी को जानबूझकर नदी में फेंक दिया और फिर खुद भी छलांग लगा दी। दोनों के शव बरामद हुए, और जांचकर्ताओं को एक आत्महत्या-पत्र मिला जिसने इस घटना को घरेलू हिंसा से प्रेरित हत्या-आत्महत्या की ओर इंगित किया। यह अकेला मामला नहीं है—दुनिया के तीन महाद्वीपों से आई खबरें बताती हैं कि पारिवारिक कलह किस तरह सबसे कमजोर सदस्यों की जान ले रही है।
ईरान की राजधानी तेहरान में एक युवती ने 20 साल बाद न्याय की गुहार लगाई है। वह उस समय नौ साल की थी जब उसकी मां पिता के साथ भीषण झगड़े के बाद गुस्से में घर छोड़कर चली गईं और फिर कभी नहीं लौटीं। परिवार ने हर संभव जगह तलाश की, लेकिन मां का कोई सुराग नहीं मिला। अब पिता और नाना-नानी सब गुजर चुके हैं, और बेटी आपराधिक अदालत में यह जानने की मांग कर रही है कि उसकी मां के साथ आखिर हुआ क्या। यह गुमशुदगी घरेलू विवादों के उस स्याह पक्ष को उजागर करती है जहां महिलाएं बिना किसी निशान के गायब हो जाती हैं और दशकों तक सवाल अनुत्तरित रह जाते हैं।
इसी देश में एक और त्रासदी ने न्यायिक प्रक्रिया को छुआ। चार साल पहले एक छह साल की बच्ची मरियम खेलने के लिए गली में गई और लापता हो गई। दो हफ्ते बाद शहर के बाहरी इलाके में उसका शव मिला—सिर पर किसी सख्त चीज से वार कर उसे मारा गया था। मां ने अपनी बहन के पति पर शक जताया, क्योंकि कुछ हफ्ते पहले बच्ची ने उसके बेटे का टैबलेट उठा लिया था और इस बात पर दोनों में जबरदस्त झगड़ा हुआ था। आरोपी उस वक्त एक अन्य मामले में जेल की सजा काट रहा था, लेकिन छुट्टी पर बाहर आया हुआ था। पुलिस हिरासत में उसने कबूल कर लिया। अदालत में पीड़ित पिता ने किसास (प्रतिशोध) की मांग की—एक छोटी सी बात पर हुआ विवाद कैसे एक मासूम की जान ले सकता है, इसका यह सिलसिला ईरानी समाज में पारिवारिक तनाव की गहराई को बयान करता है।
अर्जेंटीना के चाको प्रांत के त्रेस इस्लेतास इलाके से एक और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। 60 वर्षीय इरमा ग्लादिस पेरेस पर आरोप है कि उसने अपनी 28 वर्षीय बेटी पामेला मगाली गाउना को चाकू मारकर हत्या कर दी। मामला तब खुला जब पीड़िता के भाई ने पुलिस को बताया कि उसकी बहन ने उसे कबूल किया था कि उसने अपनी बेटी को घर में मार डाला। पुलिस मौके पर पहुंची तो युवती के शरीर में जान नहीं थी, और इसी दौरान आरोपी मां ने खुद थाने जाकर आत्मसमर्पण कर दिया। यह मामला दिखाता है कि हिंसा का चक्र पीढ़ियों को पार कर सकता है और मां जैसी देखभाल करने वाली भी बेटी की जान ले सकती है।
ये चारों घटनाएं—चाहे वे सिडनी की नदी में घटी हों, तेहरान की अदालतों में गूंज रही हों या चाको के एक मोहल्ले में सामने आई हों—एक साझा सच्चाई की ओर इशारा करती हैं: पारिवारिक हिंसा किसी एक संस्कृति या भूगोल तक सीमित नहीं है। दक्षिण एशिया, लैटिन अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित समाजों में भी आपसी रंजिश, मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी और कमजोर सहारा प्रणालियां बच्चों और महिलाओं को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचा रही हैं। ईरान की 20 साल पुरानी गुमशुदगी यह सवाल उठाती है कि क्या पुलिस और कानूनी ढांचा ऐसे मामलों को समय पर सुलझाने में सक्षम है; ऑस्ट्रेलिया की घटना बताती है कि घरेलू हिंसा को केवल निजी मामला मानने की सोच कितनी घातक हो सकती है। आगे का रास्ता मजबूत कानूनी हस्तक्षेप, पीड़ितों के लिए सुलभ सुरक्षा तंत्र और पारिवारिक कलह पर चुप्पी तोड़ने की सामूहिक जिम्मेदारी से ही निकलेगा।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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पारिवारिक विवाद के बाद बीस साल पहले लापता हुई एक माँ के मामले में अब उसकी बड़ी हो चुकी बेटी तेहरान की अदालत में इंसाफ़ की गुहार लगा रही है। एक अलग घटना में, एक छह साल की बच्ची की उसके मामा ने टैबलेट को लेकर हत्या कर दी; उस वक्त वह जेल से छुट्टी पर बाहर आया था।
चाको प्रांत में एक 60 वर्षीय महिला को अपनी 28 वर्षीय बेटी की चाकू मारकर हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया। पुलिस को संदिग्ध के बेटे ने सूचना दी, जिसने बताया कि मां ने अपराध स्वीकार कर लिया था; पुलिस के पहुंचने पर पीड़िता के जीवित होने का कोई संकेत नहीं मिला।
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