
न्यूयॉर्क प्राइमरी में ममदानी समर्थित उम्मीदवारों की जीत से डेमोक्रेटिक पार्टी में वामपंथी लहर
मेयर ज़ोहरान ममदानी के तीनों प्रत्याशियों ने स्थापित नेताओं को हराकर पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन बदल दिया, जिसके राष्ट्रीय राजनीति पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकते हैं।
न्यूयॉर्क शहर में 23 जून को हुए डेमोक्रेटिक प्राइमरी चुनावों में मेयर ज़ोहरान ममदानी द्वारा समर्थित तीनों प्रत्याशियों—ब्रैड लैंडर, डारियालिज़ा अविला शेवेलियर और क्लेयर वाल्डेज़—ने जीत दर्ज की। इनमें से दो ने मौजूदा कांग्रेस सदस्यों डैन गोल्डमैन और एड्रियानो एस्पाइलाट को हराया, जबकि तीसरे ने एक खुली सीट पर स्थापित दल के पसंदीदा उम्मीदवार को पीछे छोड़ा। ये सीटें भारी डेमोक्रेटिक बहुलता वाली हैं, इसलिए नवंबर के आम चुनाव में इनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है, जिससे अमेरिकी कांग्रेस में वामपंथी प्रगतिशील धड़े की संख्या बढ़ेगी।
अमेरिकी प्रगतिशील गुट के अनुसार, ये नतीजे मतदाताओं के बीच आर्थिक असमानता, आवास संकट और गाज़ा युद्ध पर सख्त रुख की मांग को दर्शाते हैं। डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका (डीएसए) से जुड़े इन उम्मीदवारों ने अमीरों पर अधिक कर, आव्रजन एजेंसी आईसीई की समाप्ति और इज़राइल को सैन्य सहायता रोकने जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी। वहीं, डेमोक्रेटिक पार्टी के परंपरावादी नेतृत्व—जिसमें हाउस माइनॉरिटी लीडर हकीम जेफ़रीज़ शामिल हैं—ने इसे आंतरिक विभाजन बढ़ाने वाला कदम बताया है। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने सार्वजनिक रूप से निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि पार्टी को ‘उड़ाने’ के बजाय समझ बनानी चाहिए।
रिपब्लिकन पार्टी के नेताओं और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन जीत को ‘कम्युनिस्टों’ का उदय करार दिया और चेतावनी दी कि डेमोक्रेटिक पार्टी अब समाजवादी एजेंडे की ओर बढ़ चुकी है। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा कि यह ‘गणतंत्र को बचाने की लड़ाई’ है। इज़राइली विश्लेषकों के अनुसार, इन नतीजों ने अमेरिकी यहूदी समुदाय और इज़राइल समर्थकों के लिए चिंता पैदा की है, क्योंकि विजयी उम्मीदवारों ने अमेरिकी सैन्य सहायता और एआईपीएसी जैसे प्रभावशाली समूहों की खुलेआम आलोचना की। यूरोपीय मीडिया में इसे डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर ‘टी पार्टी मूवमेंट’ जैसे बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जो 2010 में रिपब्लिकन पार्टी में उभरा था।
भारतीय पर्यवेक्षकों के लिए यह घटनाक्रम अमेरिकी घरेलू राजनीति में वामपंथी लहर के विस्तार का संकेत है, जो व्यापार, आव्रजन और विदेश नीति पर असर डाल सकता है। हालांकि, विश्लेषक यह भी रेखांकित करते हैं कि यह सफलता मुख्यतः शहरी और उच्च शिक्षित मतदाताओं वाले क्षेत्रों तक सीमित है; ग्रामीण और उपनगरीय स्विंग जिलों में उदारवादी डेमोक्रेट अब भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। ममदानी ने स्वयं इसे ‘शुरुआत’ बताया है, जबकि डेमोक्रेटिक नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि उनका ध्यान बहुमत के लिए ज़रूरी 218 सीटों पर है, न कि गहरे नीले क्षेत्रों की आंतरिक लड़ाइयों पर।
फिलहाल, ये तीनों उम्मीदवार नवंबर में होने वाले आम चुनाव की ओर बढ़ रहे हैं, जहाँ उनकी जीत प्रबल संभावना है। इसके बाद कांग्रेस में डेमोक्रेटिक सोशलिस्टों की संख्या बढ़ने से पार्टी के भीतर नीतिगत प्राथमिकताओं पर खिंचाव और तेज़ हो सकता है, ख़ासकर इज़राइल-फ़लस्तीन नीति और आर्थिक एजेंडे को लेकर। आगामी सप्ताहों में डेमोक्रेटिक नेतृत्व को यह तय करना होगा कि वह इस नई राजनीतिक वास्तविकता के साथ कैसे तालमेल बिठाता है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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अमेरिका विरोधी बयानों के इतिहास वाली एक समाजवादी उम्मीदवार की जीत चिंताजनक है। ये प्राइमरी मेयर ममदानी द्वारा समर्थित कट्टर वामपंथ के खतरनाक प्रभाव को दर्शाती हैं और पारंपरिक मूल्यों के लिए खतरा पैदा करती हैं।
ममदानी समर्थित उम्मीदवारों की जीत, जो अमेरिका-इज़राइल संबंधों पर मौलिक पुनर्विचार की वकालत करते हैं, गंभीर चिंताएँ पैदा करती है। यह परीक्षण करता है कि डेमोक्रेटिक मतदाता इज़राइल के समर्थन को छोड़ने में कितनी दूर जाने को तैयार हैं। परिणाम लोकतांत्रिक समाजवादी धड़े को मजबूत करते हैं और दीर्घकालिक गठबंधन को खतरे में डाल सकते हैं।
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