
ईरान संग तनाव बढ़ने से अमेरिका में पेट्रोल फिर 4 डॉलर प्रति गैलन पार, वैश्विक बाजार सतर्क
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी ठप होने से कच्चे तेल की कीमतें उछलीं, अमेरिकी उपभोक्ताओं और सत्तारूढ़ रिपब्लिकन पार्टी के लिए चुनावी चुनौती गहराई।
अमेरिका में पेट्रोल की औसत खुदरा कीमत सोमवार को एक महीने से अधिक समय बाद पुनः 4 डॉलर प्रति गैलन के पार पहुंच गई। अमेरिकी ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार, राष्ट्रीय औसत 4.003 डॉलर रहा, जो एक सप्ताह पहले के 3.87 डॉलर से 13 सेंट अधिक है। यह उछाल अमेरिका और ईरान के बीच पुनः भड़की लड़ाई से उपजा है, जिसने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वैश्विक तेल प्रवाह को बुरी तरह बाधित किया है। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 3.2% बढ़कर 90.95 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी बेंचमार्क 2.8% चढ़कर 84.04 डॉलर पर पहुंच गया। डीज़ल का राष्ट्रीय औसत भी 5.11 डॉलर प्रति गैलन तक जा पहुंचा।
कीमतों में यह तेज़ी मुख्यतः आपूर्ति व्यवधान से प्रेरित है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जिससे पूर्व-संघर्ष काल में वैश्विक तेल का लगभग 20% गुज़रता था, अब जहाजरानी के लिए लगभग ठप है। इसके साथ ही यूक्रेनी हमलों से रूसी रिफाइनिंग क्षमता में आई कमी और अमेरिकी ईंधन भंडारों का पांच-वर्षीय औसत से 15 लाख बैरल नीचे होना वैश्विक आपूर्ति की तंगी को और गहरा रहा है। अमेरिका के भीतर भी कीमतों में भारी क्षेत्रीय अंतर है—दक्षिणी राज्यों में यह 3.60 डॉलर के आसपास है जबकि कैलिफोर्निया में 5.50 डॉलर तक, जिसके पीछे स्थानीय आपूर्ति शृंखला और राज्य कर अहम कारक हैं।
अमेरिकी राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की बढ़ती लागत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के लिए संवेदनशील मुद्दा बन गई है। गैलप सर्वेक्षण में दो-तिहाई अमेरिकियों ने ईंधन खर्च को अपने घर के लिए वित्तीय कठिनाई का कारण बताया। ट्रंप ने खुदरा विक्रेताओं को कीमतें तत्काल घटाने की चेतावनी दी है और कुछ राज्यों में ‘फ्रीडम फ्यूल नेटवर्क’ के तहत रियायती दर पर पेट्रोल बिक्री शुरू की है। व्हाइट हाउस ने जून में मुद्रास्फीति में आई नरमी को रेखांकित करने का प्रयास किया, लेकिन जुलाई में ईंधन की बढ़ती कीमतें मतदाताओं की आर्थिक चिंता को फिर हवा दे सकती हैं।
वैश्विक स्तर पर भी इसके प्रभाव दिख रहे हैं। ऊंचे ईंधन दाम खाद्य व अन्य वस्तुओं की कीमतों को ऊपर धकेल सकते हैं। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने तनाव कम करने के लिए मध्यस्थों के प्रस्तावों का संकेत दिया, जिसके बाद ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर से नीचे आकर 88.10 डॉलर पर स्थिर हुआ। हालांकि, बाज़ार की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीतिक पहल से युद्ध विराम की कोई संभावना बनती है या संघर्ष और गहराएगा। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव नज़दीक आने के साथ, ईंधन की सामर्थ्य एक निर्णायक चुनावी मुद्दा बन सकती है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.40 | critical |
|---|---|---|
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.60 | critical |
| अरब लेवांत-मगरिब प्रेस | −0.50 | critical |
Republicans fear that the surge in gas prices, caused by the war with Iran, could cost them the midterm elections.
It emphasizes the immediate impact on voters' wallets, turning a geopolitical event into a domestic voting issue.
It omits Iranian reasons for the conflict and the human impact in Iran.
The American and Israeli aggression against Iran has triggered an energy crisis that now hits US consumers.
It reverses causality: the war is the cause of the price increase, not a response to Iranian provocations.
It omits Iran's role in closing the Strait of Hormuz and previous sanctions.
The war launched by the United States and Israel against Iran has disrupted oil flows through the Strait of Hormuz, pushing up US gas prices.
It highlights the joint US-Israel aggression, presenting Iran as a victim.
It omits Iranian provocations and the context of previous tensions.
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