
लैटिन अमेरिका में स्त्री-हत्या के सिलसिलेवार मामले: कानूनी चूक और सामाजिक संकट की गूंज
कोलंबिया, ब्राज़ील और मेक्सिको में पिछले सप्ताह सामने आईं हिंसक घटनाएं महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और कमजोर होते संरक्षण तंत्र की पड़ताल करने पर मजबूर करती हैं।
कोलंबिया के इतागुई नगर में सोमवार को 29 वर्षीय वैलेंटीना वानेगास की उसके ही साथी द्वारा हत्या कर दी गई। नगर निगम की खेल संस्थान में कार्यरत वैलेंटीना की चीखें सुनकर पड़ोसियों ने पुलिस को बुलाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इस मामले का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि आरोपी पहले भी घरेलू हिंसा के एक मामले में दोषी ठहराया जा चुका था, परंतु कानूनी अवधि समाप्त होने के कारण वह जेल से बाहर था। यह घटना दर्शाती है कि किस तरह न्यायिक प्रक्रियाओं की सुस्ती और संरक्षण आदेशों की ढीली पड़ताल महिलाओं की जान पर भारी पड़ रही है।
इसी दौरान ब्राज़ील से भी दो दिल दहलाने वाली खबरें आईं। गवर्नाडोर वालाडारेस शहर में एक पार्किंग स्थल पर वकील आना पाउला रोशा को उनके पूर्व पति ने गोली मार दी और फिर खुद को भी गोली मारकर आत्महत्या कर ली। वह अपनी कार लेने आई थीं, तभी अचानक हमला हुआ। दूसरी ओर, पेर्नाम्बुको राज्य के तामांदारे में सामुदायिक स्वास्थ्य कर्मी सिल्वानिसे बातिस्ता दा सिल्वा की उनके पूर्व पति ने गला काटकर हत्या कर दी। आरोपी को पहले हिरासत में लेकर छोड़ दिया गया था, और पांच दिन बाद गिरफ्तार किया गया। दोनों ही मामलों में पूर्व साथी द्वारा हिंसा और पुलिसिया ढिलाई का पैटर्न साफ नजर आता है।
मेक्सिको के पुएब्ला राज्य में भी महिलाओं के खिलाफ हिंसा की दो भिन्न परंतु समान रूप से भयावह घटनाएं दर्ज हुईं। साकापोआक्सतला में 34 वर्षीय सुसाना वास्केज़ मोरालेस की उसके प्रेमी ने बहस के बाद चाकू से गोदकर हत्या कर दी और फिर खुद अपना गला काटने की कोशिश की। वहीं तेहुआकान शहर में एक यातायात विवाद के दौरान एक महिला को वाहन चालक ने जानबूझकर कुचल दिया। वीडियो में महिला गाड़ी के आगे लटकी चीखती रही, लेकिन चालक ने गाड़ी दौड़ा दी और वह गिरकर पहियों के नीचे आ गई। यह मामला भले ही पारंपरिक स्त्री-हत्या की श्रेणी में न आता हो, लेकिन सार्वजनिक स्थान पर एक महिला के प्रति ऐसी क्रूरता गहरी जड़ें जमा चुकी स्त्री-द्वेष की मानसिकता को उजागर करता है।
ये तमाम घटनाएं लैटिन अमेरिका में स्त्री-हत्या और लैंगिक हिंसा के व्यापक संकट की बानगी हैं। कोलंबिया, ब्राज़ील और मेक्सिको दुनिया में स्त्री-हत्याओं की सर्वाधिक दर वाले देशों में शुमार हैं। कोरोना महामारी के दौरान घरेलू हिंसा में आई तेजी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कानूनों के बावजूद उनका क्रियान्वयन बेहद कमजोर है; पूर्व में हिंसा के दोषी पाए गए आरोपी बिना निगरानी के स्वतंत्र घूमते रहते हैं और पीड़िताओं को सुरक्षा मुहैया कराने की व्यवस्था ध्वस्त है।
आगे की राह तभी निकलेगी जब सरकारें संरक्षण आदेशों की सख्ती से निगरानी करें, पुलिस और अभियोजन में लैंगिक संवेदनशीलता बढ़े, और समाज में यह समझ विकसित हो कि महिलाओं के खिलाफ हिंसा किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। इन मामलों ने एक बार फिर साबित किया है कि कानूनी चूक और सामाजिक उदासीनता का सीधा संबंध महिलाओं की असामयिक मौतों से जुड़ा है।
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