
मोटापे की दवाओं से स्ट्रोक तक: पुरानी दवाएं बदल रही हैं चिकित्सा जगत
फ्रांस में ओज़ेम्पिक-जैसी दवाओं की सरकारी प्रतिपूर्ति, अमेरिका में सुगंध बाज़ार पर असर और कनाडा का टैमीफ्लू पर स्ट्रोक-रोधी शोध – नई खोजें पुरानी दवाओं को नए आयाम दे रही हैं।
इस सप्ताह, फ्रांस ने यूरोप में एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए गंभीर मोटापे से जूझ रहे मरीज़ों के लिए मौन्जारो और वेगोवी जैसी इंजेक्शन दवाओं की सरकारी स्वास्थ्य बीमा से प्रतिपूर्ति शुरू कर दी। ये दवाएं, जो असल में जीएलपी-1 हार्मोन की नकल करती हैं, मधुमेह और वजन घटाने के इलाज में क्रांति ला रही हैं। फ्रांस की एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ. गेराल्डिन स्कुर्निक बताती हैं कि पिछले दो हफ़्तों में ही उनके पास डेढ़ दर्जन से अधिक मरीज़ों के फ़ोन आए, जो इन नई दवाओं से इलाज की उम्मीद लगाए बैठे हैं। यूरोप में पहली बार हो रही इस पहल ने दवा उद्योग और मोटापा पीड़ितों के लिए नई राह खोली है।
जीएलपी-1 एगोनिस्ट कहे जाने वाले इन यौगिकों की खूबी सिर्फ भूख कम करने तक सीमित नहीं है। ये आंत से खाने के बाद निकलने वाले एक प्राकृतिक हार्मोन की तरह काम करते हैं, जो अग्न्याशय को इंसुलिन बनाने का संकेत देता है और मस्तिष्क को पेट भर जाने का अहसास कराता है। अब वैज्ञानिक जाँच कर रहे हैं कि क्या यही तंत्र कैंसर, मस्तिष्क रोगों, अवसाद और नशे की लत जैसी गंभीर स्थितियों में भी लाभकारी हो सकता है। हालाँकि कुछ दावे अतिरंजित हैं, लेकिन कई प्रारंभिक नतीजे सचमुच रोमांचक हैं और बड़े नैदानिक परीक्षणों की माँग कर रहे हैं।
लेकिन इन दवाओं का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका में, जहाँ हर आठ में से एक व्यक्ति कभी-न-कभी जीएलपी-1 थेरेपी ले चुका है, एक विचित्र सामाजिक प्रवृत्ति देखने को मिली है: ओज़ेम्पिक जैसी दवाएं लेने वाले लोग मिठाई की लालसा को इत्र की सुगंध में स्थानांतरित कर रहे हैं। फ्रांसीसी अख़बार ले फिगारो की रिपोर्ट के अनुसार, वेनिला, स्ट्रॉबेरी कैंडी और भुने पिस्ता जैसे गॉरमांड परफ्यूम की बिक्री आसमान छू रही है। यह बदलाव वैश्विक सुगंध बाज़ार के रुझानों को भी प्रभावित कर रहा है, जो दर्शाता है कि एक दवा किस तरह अर्थव्यवस्था के अप्रत्याशित कोनों को छू सकती है।
इस बीच, दवाओं की नई भूमिकाओं की एक और कहानी कनाडा से आई है। वहाँ यूनिवर्सिटी ऑफ मैनिटोबा के डॉ. शायन अमीरी के नेतृत्व में हुए एक शोध से पता चला है कि सामान्य फ्लू की दवा टैमीफ्लू (ओज़ेल्टामिविर) इस्केमिक ब्रेन स्ट्रोक के बाद मस्तिष्क के ऊतकों को होने वाले नुकसान को सीमित कर सकती है। यह खोज इसलिए भी चौंकाने वाली है क्योंकि किसी ने नहीं सोचा था कि एक एंटीवायरल दवा मस्तिष्क के मोटर फंक्शन को बहाल करने में मददगार हो सकती है। यह शोध उन लाखों स्ट्रोक पीड़ितों के लिए उम्मीद की किरण है, जिनके लिए समय पर इलाज बेहद अहम होता है।
इन विकासों का असर भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए भी बहुआयामी हो सकता है। भारत में मधुमेह और मोटापे की बढ़ती महामारी को देखते हुए जीएलपी-1 दवाएं गेम-चेंजर साबित हो सकती हैं, अगर कीमत और पहुँच सुनिश्चित की जाए। दूसरी ओर, स्ट्रोक भारत में मृत्यु और विकलांगता का एक बड़ा कारण है, ऐसे में टैमीफ्लू जैसी सस्ती और बहुलता से उपलब्ध दवा का नया उपयोग जन स्वास्थ्य नीति को दिशा दे सकता है। कुल मिलाकर, यह दौर इस बात का गवाह है कि पुरानी दवाएँ नए अवतार में किस तरह चिकित्सा और समाज को व्यापक रूप से बदलने की क्षमता रखती हैं, बशर्ते अनुसंधान और नियामक संस्थाएं तेज़ी से अनुकूल हों।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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फ्रांस में मोटापा-रोधी दवाओं का चलन बढ़ रहा है, मौन्जारो और वेगोवी अब स्वास्थ्य प्रणाली द्वारा प्रतिपूर्ति योग्य हैं, जो मोटापे के इलाज में क्रांति ला रहे हैं। स्वास्थ्य से परे, ये दवाएं उपभोक्ता आदतों को बदल रही हैं, गोरमंड इत्रों की बिक्री बढ़ रही है क्योंकि लोग चीनी की लालसा को सुगंध की ओर मोड़ रहे हैं।
वजन घटाने के अलावा, शोधकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या Ozempic जैसी GLP-1 दवाएं कैंसर से लेकर अवसाद तक की स्थितियों का इलाज कर सकती हैं। कुछ निष्कर्ष वास्तव में रोमांचक हैं, लेकिन अन्य को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है, जिसके लिए सतर्क मूल्यांकन की आवश्यकता है।
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