
रूस ने 2025 में 1,100 से अधिक विदेशियों को 'पारंपरिक मूल्यों' पर वीज़ा दिए, जर्मनी और फ्रांस सबसे आगे
पुतिन के आदेश के तहत रूस ने उदारवाद विरोधी विदेशियों को आकर्षित करने के लिए विशेष वीज़ा जारी किए, जबकि यूरोपीय संघ रूसी सैनिकों पर प्रतिबंध लगाने की कानूनी चुनौतियों से जूझ रहा है।
रूस ने 2025 में अपने एक विवादास्पद कार्यक्रम के तहत 1,112 विदेशी नागरिकों को 'पारंपरिक रूसी आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों' को साझा करने के आधार पर वीज़ा प्रदान किए। यह पहल अगस्त 2024 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन द्वारा हस्ताक्षरित एक आदेश से शुरू हुई थी, जो उन देशों के नागरिकों को तीन महीने का विशेष वीज़ा और बाद में निवास की अनुमति देती है जिन्हें मॉस्को 'विनाशकारी नवउदारवादी वैचारिक नीतियां' लागू करने वाला मानता है। विदेश मंत्रालय के कांसुलर विभाग के निदेशक अलेक्सी क्लिमोव के अनुसार, सबसे अधिक वीज़ा जर्मनी (168), फ्रांस (140) और संयुक्त राज्य अमेरिका (105) के नागरिकों को मिले, इसके बाद इटली (100), एस्टोनिया (63), लातविया (60), कनाडा (54), लिथुआनिया (46) और ऑस्ट्रेलिया (43) का स्थान रहा। यूरोपीय संघ के नागरिकों ने कुल वीज़ा का आधे से अधिक हिस्सा प्राप्त किया, जो पश्चिमी यूरोप में उदारवादी सामाजिक बदलावों के प्रति बढ़ते असंतोष को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम को पश्चिमी मीडिया में 'एंटी-वोक' वीज़ा के रूप में वर्णित किया गया है, जो रूस की वैश्विक सांस्कृतिक लड़ाई में एक नरम शक्ति उपकरण के रूप में उभरा है। पात्र देशों की सूची में मुख्य रूप से यूरोपीय राष्ट्र, अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं, लेकिन भारत या दक्षिण एशियाई देश इसमें नहीं हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि मॉस्को का लक्ष्य विशेष रूप से उन समाजों को प्रभावित करना है जहां एलजीबीटीक्यू+ अधिकार और लैंगिक समानता जैसे मुद्दों पर गहरी सांस्कृतिक दरारें हैं। रूसी अधिकारियों ने इस पहल को उन लोगों के लिए 'मानवीय समर्थन' बताया है जो अपने देशों की मुख्यधारा की विचारधारा से असहमत हैं, और निज़नी नोवगोरोद क्षेत्र में ऐसे प्रवासियों के लिए एक विशेष गांव बनाने की योजना भी सामने आई है।
इस बीच, यूरोपीय संघ एक विपरीत दिशा में कदम बढ़ा रहा है, जहां रूस के 'विशेष सैन्य अभियान' में भाग लेने वाले सैनिकों के लिए पर्यटक वीज़ा और प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की चर्चा तेज़ हो गई है। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काया कालास ने दावा किया कि ब्लॉक के पास सभी प्रतिभागियों की खुफिया जानकारी है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों ने इस प्रस्ताव की व्यवहार्यता पर सवाल उठाए हैं। बाल्टिक संघीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वादिम वोइनिकोव के अनुसार, सामूहिक प्रतिबंध यूरोपीय संघ के अपने वीज़ा नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून दोनों का उल्लंघन कर सकता है, और सैकड़ों हजारों व्यक्तियों की पहचान करना तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल होगा। यह कानूनी दुविधा रूस के खुले आमंत्रण के ठीक विपरीत खड़ी है, जो दोनों पक्षों के बीच वैचारिक और कानूनी खाई को और गहरा करती है।
भौगोलिक दृष्टि से देखें तो यह पारस्परिक वीज़ा राजनीति एक व्यापक वैश्विक विभाजन को रेखांकित करती है। पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका से आने वाले आवेदक रूस को एक वैकल्पिक सांस्कृतिक शरणस्थल के रूप में देख रहे हैं, जबकि पूर्वी यूरोपीय देशों जैसे बाल्टिक राज्यों से अपेक्षाकृत कम संख्या में आवेदन आए, संभवतः रूस के साथ उनके ऐतिहासिक तनाव के कारण। एशिया-प्रशांत क्षेत्र से ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के नागरिकों ने भी रुचि दिखाई, लेकिन दक्षिण एशिया इस कार्यक्रम से पूरी तरह बाहर है, जो बताता है कि मॉस्को की सांस्कृतिक अपील मुख्यतः ईसाई-बहुल या पश्चिमी उदारवाद से मोहभंग वाले समाजों पर केंद्रित है।
विश्लेषकों का मानना है कि यह वीज़ा कार्यक्रम आने वाले वर्षों में और विस्तार पा सकता है, खासकर यदि पश्चिमी देशों में सांस्कृतिक ध्रुवीकरण जारी रहता है। हालांकि, यह पहल मुख्यतः प्रतीकात्मक बनी हुई है और अभी तक बड़े पैमाने पर प्रवासन उत्पन्न नहीं कर पाई है। दूसरी ओर, यूरोपीय संघ का प्रस्तावित प्रतिबंध यदि लागू हुआ तो यह रूसी नागरिकों की आवाजाही को गंभीर रूप से सीमित कर सकता है, लेकिन इसकी कानूनी बाधाएं इसे शीघ्र लागू होने से रोक सकती हैं। दोनों ही मामले दिखाते हैं कि किस प्रकार वीज़ा नीति अब केवल प्रशासनिक मामला नहीं रह गई है, बल्कि भू-राजनीतिक और सांस्कृतिक युद्ध का एक सक्रिय मोर्चा बन चुकी है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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रूस उन विदेशियों को मानवीय सहायता प्रदान करता है जो विनाशकारी नवउदारवादी एजेंडे को अस्वीकार करते हैं और पारंपरिक मूल्यों को अपनाते हैं। 2025 में, पश्चिमी देशों के 1,100 से अधिक लोगों को ऐसे वीज़ा मिले, जिनमें जर्मन, फ्रांसीसी और अमेरिकी सबसे आगे रहे। यह रूस के नैतिक रुख के आकर्षण को दर्शाता है।
मॉस्को का दावा है कि उसने उदार नीतियों से शरण चाहने वाले पश्चिमी लोगों को एक हज़ार से अधिक 'एंटी-वोक' वीज़ा जारी किए हैं। पुतिन द्वारा शुरू किए गए इस कार्यक्रम का लक्ष्य उन देशों के नागरिक हैं जो कथित तौर पर विनाशकारी नवउदारवादी मूल्यों को थोपते हैं। आंकड़ों को सफलता के रूप में प्रस्तुत किया गया है, लेकिन इस पहल को व्यापक रूप से विदेशी रूढ़िवादियों को आकर्षित करने का प्रचार उपकरण माना जाता है।
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