
जब जॉन बॉन जोवी ने मैनहट्टन के मंच पर कहा, 'मैं आहत हूं, गाना नहीं होगा जारी'
न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में एक कॉन्सर्ट के दौरान अचानक आवाज़ बैठने से जॉन बॉन जोवी को शो रोकना पड़ा; यह घटना हालिया वोकल सर्जरी के बाद उनकी संगीत यात्रा में एक नए मोड़ की तरह देखी गई।
मैडिसन स्क्वायर गार्डन के मंच पर जब जॉन बॉन जोवी ने 'लिविन ऑन अ प्रेयर' के ऊंचे सुरों को सधाने के बजाय भीड़ का रुख किया, तो माहौल में कुछ अलग था। लगभग 90 मिनट और 14 गानों के बाद, उनकी आवाज़ में थकान साफ़ झलक रही थी। फिर अचानक उन्होंने संगीत रोक दिया और माइक पर बोले: "मुझे माफ़ करें, मैं आहत हूं और आपको अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पा रहा।" यह कहते हुए उन्होंने दर्शकों से टिकट संभालकर रखने का आग्रह किया और वादा किया कि वह इस शो को दोबारा आयोजित करने का कोई रास्ता निकालेंगे।
यह घटना उनके 'फॉरएवर टूर' की न्यूयॉर्क रेज़िडेंसी के आठवें शो के दौरान घटी। बाद में उनके प्रतिनिधि ने बताया कि बॉन जोवी साइनस संक्रमण से जूझ रहे थे, जिसके कारण उनके लिए गाना जारी रखना संभव नहीं रहा। 64 वर्षीय रॉक स्टार पिछले चार वर्षों में यह उनका पहला बड़ा दौरा था। 2022 में उनकी वोकल कॉर्ड सर्जरी हुई थी, जिसमें एक स्वर रज्जु क्षतिग्रस्त पाई गई थी। हालिया साक्षात्कारों और डॉक्यूसीरीज़ 'थैंक यू, गुडनाइट' में उन्होंने अपनी आवाज़ की बहाली की लंबी लड़ाई और उस डर को साझा किया था कि शायद वह फिर कभी मंच पर न लौट पाएं।
बॉन जोवी की यह अचानक खामोशी सिर्फ एक स्वास्थ्य संबंधी झटका नहीं थी, बल्कि एक ऐसे कलाकार की कहानी का भावनात्मक अध्याय थी जिसने खुद को पूरी तरह स्वस्थ घोषित कर दिया था। इसके बावजूद, दर्शकों ने उन्हें निराशा नहीं, बल्कि खड़े होकर तालियों और "हम तुमसे प्यार करते हैं" के नारों से विदा किया। सोशल मीडिया पर प्रशंसकों ने लिखा कि कोई गुस्सा नहीं था, बस समर्थन था। लैटिन अमेरिका से लेकर यूरोप और एशिया तक की मीडिया ने इस घटना को एक संवेदनशील क्षण के रूप में रेखांकित किया, जहां एक रॉक आइकन ने अपनी कमज़ोरी को बिना लाग-लपेट के स्वीकार किया।
मंच से उतरते समय जॉन बॉन जोवी ने भीड़ की ओर देखा और कहा, "जल्द ही मिलेंगे।" यह दृश्य एक ऐसे कलाकार की छवि छोड़ गया जिसने अपनी आवाज़ के साथ-साथ अपने श्रोताओं के विश्वास को थामे रखा। जिस रात उनकी आवाज़ साथ नहीं दे पाई, उस रात दर्शकों ने उनके गीतों को अपनी आवाज़ देकर उस कमी को पूरा कर दिया। संगीत के इतिहास में यह मुक़ाम एक याद दिलाता है कि सितारों की चमक के पीछे एक इंसानी धड़कन होती है, जो कभी-कभी लड़खड़ा भी जाती है।
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