
अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय को 'ध्वस्त' करने का वैश्विक अभियान शुरू किया
विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने आईसीसी को अमेरिकी संप्रभुता के लिए ख़तरा बताते हुए सहयोगियों पर अदालत छोड़ने का दबाव बनाने, वीज़ा प्रतिबंध और नए प्रतिबंधों की घोषणा की।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) को “व्यवस्थित रूप से निष्क्रिय” करने के लिए एक व्यापक राजनयिक अभियान की शुरुआत की घोषणा की। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस अभियान के तहत आईसीसी कर्मियों की वीज़ा रद्द करना, यात्रा प्रतिबंध लगाना, अदालत और उससे जुड़े संगठनों पर प्रतिबंध बढ़ाना, तथा अन्य देशों पर रोम संविधि से हटने का दबाव डालना शामिल है। विभाग ने कहा कि कोई भी राजनयिक विकल्प सीमा से बाहर नहीं रखा जाएगा, और ख़ास तौर पर उन देशों पर निगरानी बढ़ाई जाएगी जो अमेरिकी सुरक्षा सहायता पर निर्भर होते हुए भी आईसीसी के अधिकार क्षेत्र को अस्वीकार नहीं करते।
वाशिंगटन का मुख्य तर्क यह है कि आईसीसी अमेरिकी सैनिकों और अधिकारियों पर मुकदमा चलाने का दावा करती है, जबकि अमेरिका ने कभी रोम संविधि का अनुमोदन नहीं किया। रुबियो ने एक वीडियो संदेश और वॉल स्ट्रीट जर्नल में लेख के ज़रिए आरोप लगाया कि अदालत “वामपंथी गैर-सरकारी संगठनों, अभिमानी वैश्विकवादियों और शत्रुतापूर्ण तीसरी दुनिया की सरकारों के नेटवर्क” द्वारा संचालित है। अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी कहा कि आईसीसी ने पहले अफ़गानिस्तान में अमेरिकी सैन्य और ख़ुफ़िया कर्मियों के ख़िलाफ़ जांच शुरू की थी और उसे बंद करने से इनकार कर दिया। हालांकि, आईसीसी के ढांचे के तहत अदालत किसी सदस्य देश के क्षेत्र में हुए अपराधों पर अधिकार क्षेत्र रखती है, भले ही आरोपी का देश सदस्य न हो—यही वह कानूनी आधार है जिससे अमेरिका स्वयं को असुरक्षित मानता है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाओं में जापान ने चिंता व्यक्त की और आईसीसी के प्रति अपने समर्थन को दोहराया। जापान के मुख्य कैबिनेट सचिव मिनोरू किहारा ने कहा कि टोक्यो गंभीर अपराधों के उन्मूलन और क़ानून के शासन को बढ़ावा देने के दृष्टिकोण से लगातार आईसीसी का समर्थन करता रहा है। वहीं, हंगरी, बुर्किना फासो, माली और नाइजर जैसे देश पहले ही आईसीसी से बाहर निकलने की घोषणा कर चुके हैं, और उन्होंने अदालत को “राजनीतिक औज़ार” बताया है। आईसीसी के प्रवक्ता ने फ़िलहाल इस मामले पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
यह अभियान ऐसे समय में आया है जब आईसीसी ने गाज़ा में युद्ध अपराधों के आरोप में इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के ख़िलाफ़ गिरफ़्तारी वारंट जारी किए थे, जिसके बाद अमेरिका ने पहले ही आईसीसी के मुख्य अभियोजक और कई न्यायाधीशों पर प्रतिबंध लगा दिए थे। तीन प्रतिबंधित न्यायाधीशों—कनाडा की किम्बर्ली प्रॉस्ट, युगांडा की सोलोमी बालुंगी बोसा और बेनिन की रीन एडिलेड सोफी अलापिनी-गांसो—ने जून में न्यूयॉर्क की एक अदालत में ट्रंप प्रशासन के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया, जिसमें इन प्रतिबंधों को “अवैध” और “न्यायेतर दबाव” बताया गया।
दक्षिण एशिया के संदर्भ में, अफ़गानिस्तान आईसीसी का सदस्य है, और वहाँ अमेरिकी बलों के ख़िलाफ़ जांच का मामला लंबित है। भारत न तो रोम संविधि का पक्षकार है और न ही उसने आईसीसी के अधिकार क्षेत्र को स्वीकार किया है, लेकिन वैश्विक न्याय व्यवस्था में इस अभियान के दूरगामी प्रभाव हो सकते हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में रुबियो, उप-विदेश मंत्री और विभिन्न राजदूत विदेशी सरकारों से सीधे संपर्क कर आईसीसी से हटने का आग्रह करेंगे, और जो देश अमेरिकी सहायता पर निर्भर हैं, उन पर निर्णय का दबाव बढ़ेगा।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.80 | critical |
|---|---|---|
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.60 | critical |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
The United States attacks the ICC to protect its impunity, while the court investigates war crimes in Gaza and Afghanistan.
By emphasizing that the US is not a signatory and that the ICC investigates war crimes, a moral contrast is created between a legitimate court and a superpower that rejects international law.
Omits the US legal justification that the ICC has no jurisdiction over non-signatories, present in other blocs' reports.
Washington declares war on the ICC, accused of threatening American sovereignty, but it is actually an attack on international justice.
By using warlike vocabulary ('war', 'all-out offensive'), diplomatic action is equated to a conflict, suggesting an existential threat to global justice.
Omits the historical US position against the ICC, present in Asian reports.
The US administration announces a campaign to disable the ICC, citing sovereignty concerns, and pressures allies to withdraw.
By reporting official statements without comment, the news is presented as an objective fact, avoiding judgment of US motives.
Omits the moral criticism of the US action, present in Latin American and Atlantic reports.
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