
युवाओं में हिंसा और उत्पीड़न के वैश्विक आंकड़े: इटली, मैक्सिको और स्वीडन से एक साथ चेतावनी
इटली में 43% छात्र हिंसा से प्रभावित, मैक्सिको में हर पांचवीं महिला सार्वजनिक स्थानों पर यौन उत्पीड़न का शिकार, और स्वीडन में LGBT समुदाय के बीच यौन हिंसा की ऊंची दर—नए आंकड़े एक वैश्विक प्रवृत्ति की ओर इशारा करते हैं।
इटली की राष्ट्रीय अनुसंधान परिषद (सीएनआर-आईएफसी) के ईएसपीएडी अध्ययन के अनुसार, 2025 में 15 से 19 वर्ष के 43.4% छात्रों ने कम-से-कम एक हिंसक व्यवहार का सामना किया या उसे अंजाम दिया। 17,000 से अधिक प्रश्नावली पर आधारित इस सर्वेक्षण में लड़कों में यह दर 49.8% और लड़कियों में 37.2% रही। सबसे चिंताजनक पहलू गंभीर हिंसा के संकेतकों में 2018 की तुलना में लगभग तीन गुना वृद्धि है, जिसमें शिक्षकों पर हमले और सामान छीनने के लिए हथियारों का इस्तेमाल शामिल है। साथ ही, 11% छात्रों ने स्मार्टफोन पर फिल्माई गई हिंसा की घटनाओं को ऑनलाइन देखा या साझा किया, जो सात साल पहले के मुकाबले दोगुना है।
यह हिंसा सामाजिक-संबंधों की दरारों पर केंद्रित पाई गई। अध्ययन के अनुसार, जहां शिक्षकों, परिवार या साथियों के साथ संबंधों में गंभीर कठिनाइयां थीं, वहां हिंसक व्यवहार अधिक दिखा। अवैध नशीले पदार्थों के सेवन और जोखिम भरी आदतों से भी इसका सीधा संबंध मिला। इसके विपरीत, माता-पिता के साथ सकारात्मक संवाद और पढ़ने की आदत सुरक्षात्मक कारक के रूप में उभरे। सीएनआर-आईएफसी की शोध प्रमुख सबरीना मोलिनारो ने कहा, “साथियों के बीच हिंसा कोई छिटपुट घटना नहीं है, यह किशोरों के एक बड़े हिस्से की रोजमर्रा की जिंदगी में व्याप्त है।”
महिलाओं और यौन अल्पसंख्यकों के प्रति हिंसा के आंकड़े भी इसी तस्वीर को पुख्ता करते हैं। मैक्सिको की राष्ट्रीय शहरी सार्वजनिक सुरक्षा सर्वेक्षण (ईएनएसयू) के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में 22.1% वयस्क महिलाओं ने सार्वजनिक स्थानों पर कम-से-कम एक बार यौन उत्पीड़न या हिंसा का अनुभव किया, जबकि पुरुषों में यह दर 8.9% रही। सबसे आम शिकायत अश्लील टिप्पणियां थीं, लेकिन डिजिटल माध्यमों से यौन अपमान और बिना सहमति के शारीरिक स्पर्श भी बड़ी संख्या में सामने आए। स्वीडन में लोक स्वास्थ्य प्राधिकरण की 2024 की रिपोर्ट, जिसमें 16,000 उत्तरदाताओं में से 1,000 से अधिक LGBT व्यक्ति शामिल थे, बताती है कि आधी उभयलिंगी महिलाओं, एक-तिहाई ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और हर पांचवें उभयलिंगी पुरुष ने अपनी इच्छा के विरुद्ध यौन क्रिया का सामना किया। 18 से 40% LGBT उत्तरदाताओं ने पिछले तीन महीनों में ही भेदभाव या अपमानजनक व्यवहार झेला था।
भारत का शैक्षिक परिदृश्य इस संदर्भ में एक अलग लेकिन जुड़ी चुनौती प्रस्तुत करता है। शिक्षा मंत्रालय की यूडीआईएसई+ 2025-26 रिपोर्ट के अनुसार, माध्यमिक स्तर (कक्षा 9-10) पर शुद्ध नामांकन अनुपात 50.8% और उच्चतर माध्यमिक पर 39% है, जो 2022-23 से स्थिर बना हुआ है। प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर घटकर 0.3% रह गई है, लेकिन उसी अवधि में पुनरावृत्ति दर 1.3% से बढ़कर 2.2% हो गई। बिहार जैसे राज्यों में सभी आयु वर्गों के लिए आयु-विशिष्ट नामांकन अनुपात राष्ट्रीय औसत से काफी नीचे है। स्कूलों में पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं लगभग सार्वभौमिक हो गई हैं, लेकिन सौर पैनल, वर्षा जल संचयन और दिव्यांग छात्रों के लिए शौचालय जैसी सुविधाएं अभी भी पीछे हैं।
इटली के शोधकर्ताओं ने भावनात्मक कौशल, डिजिटल शिक्षा और समूह गतिशीलता पर लगातार काम करने की सिफारिश की है, जिसमें स्कूल, परिवार और क्षेत्रीय सेवाओं को एक नेटवर्क में जोड़ा जाए। स्वीडन की लोक स्वास्थ्य एजेंसी ने यौन हिंसा की रोकथाम, स्वास्थ्य सेवा में LGBT-सक्षम व्यवहार और यौन संचारित संक्रमणों की रोकथाम के उपायों को प्राथमिकता देने का आह्वान किया है। भारत में शिक्षा मंत्रालय की रिपोर्ट बुनियादी ढांचे और नामांकन के अंतराल को दूर करने की दिशा में नीतिगत कदमों का आधार बनेगी। अगला ध्यान देने योग्य कदम इन सिफारिशों पर आधारित ठोस कार्ययोजनाओं की घोषणा और उनका क्रियान्वयन होगा।
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.30 | critical |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.10 | neutral |
| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
CNR और Folkhälsomyndigheten के आंकड़े दिखाते हैं कि युवा हिंसा और यौन उत्पीड़न सामाजिक आपात स्थितियाँ हैं जिनके लिए तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
प्रतिशत और आधिकारिक उद्धरणों का उपयोग एक वस्तुनिष्ठ तात्कालिकता की भावना पैदा करता है, जिससे समस्या एक निर्विवाद संकट के रूप में दिखाई देती है।
यह भारतीय ब्लॉक के स्कूल छोड़ने के आंकड़ों का उल्लेख नहीं करता, जो सामाजिक कमजोरियों पर एक अलग दृष्टिकोण प्रदान करते हैं।
Inegi दर्ज करता है कि 22.1% महिलाओं ने उत्पीड़न का सामना किया है, जो पुरुषों की दर से दोगुना से अधिक है, एक व्यवस्थित लैंगिक असमानता को उजागर करता है।
सांख्यिकीय डेटा की तटस्थ प्रस्तुति असमानता के एक अंतर्निहित निर्णय को छिपाती है, जिससे समस्या बिना टिप्पणी के स्पष्ट हो जाती है।
यह युवा हिंसा या स्कूल छोड़ने का उल्लेख नहीं करता, केवल सार्वजनिक स्थानों में उत्पीड़न पर ध्यान केंद्रित करता है।
शिक्षा मंत्रालय UDISE+ डेटा प्रकाशित करता है जो स्कूल नामांकन में प्रगति और चुनौतियों को दिखाता है, बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए एक अंतर्निहित आह्वान के साथ।
संख्याओं और राज्य तुलनाओं पर जोर एक वस्तुनिष्ठ जवाबदेही का ढांचा बनाता है, लक्षित हस्तक्षेपों के लिए प्रेरित करता है।
यह यूरोपीय और लैटिन अमेरिकी ब्लॉकों से हिंसा और उत्पीड़न के आंकड़ों का उल्लेख नहीं करता, खुद को शैक्षिक क्षेत्र तक सीमित रखता है।
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