
वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में स्विट्जरलैंड का ताज छिना, सिंगापुर और हांगकांग शीर्ष पर
आईएमडी की ताजा रैंकिंग में स्विट्जरलैंड तीसरे स्थान पर खिसका, एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का दबदबा बढ़ा और अमेरिका शीर्ष 10 में लौटा।
वैश्विक आर्थिक प्रतिस्पर्धात्मकता के मानचित्र पर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। स्विट्जरलैंड स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट (आईएमडी) द्वारा जारी वार्षिक रैंकिंग में स्विट्जरलैंड अपना शीर्ष स्थान गंवाकर तीसरे पायदान पर आ गया है। पिछले वर्ष शीर्ष पर रहने के बाद यह गिरावट यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं के सामने बढ़ती चुनौतियों का प्रतीक है। वहीं सिंगापुर ने पहला और हांगकांग ने दूसरा स्थान हासिल कर एशिया की बढ़त को और मजबूत कर दिया है। सिंगापुर की यह वापसी मुख्यतः उसकी कंपनियों की बेहतर कार्यकुशलता के बूते संभव हुई, जबकि हांगकांग ने लगातार तीन वर्षों के सुधार के बाद यह ऊंचाई छुई है।
स्विट्जरलैंड के फिसलने के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय दबाव काम कर रहे हैं। आईएमडी के विश्लेषण के अनुसार, अमेरिका द्वारा लगाए गए ऊंचे व्यापार शुल्क और स्विस फ्रैंक की मजबूती ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) के प्रवाह को कमजोर कर दिया। इससे आर्थिक प्रदर्शन के मापदंड में भारी गिरावट दर्ज की गई, जो रैंकिंग में पिछड़ने का प्रमुख कारण बना। यह झटका सिर्फ स्विट्जरलैंड तक सीमित नहीं है—जर्मनी चार स्थान लुढ़ककर 23वें और डेनमार्क चौथे से छठे स्थान पर आ गया। यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं में यह गिरावट वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापारिक तनावों की गहरी छाप छोड़ रही है।
दूसरी ओर, एशियाई अर्थव्यवस्थाओं का दबदबा स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया है। सिंगापुर और हांगकांग के अलावा ताइवान छठे से चौथे स्थान पर पहुंच गया, जबकि संयुक्त अरब अमीरात पांचवें स्थान पर बना रहा। आयरलैंड और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों ने भी अपनी स्थिति सुधारी, लेकिन शीर्ष पर एशिया की पकड़ मजबूत हुई है। अमेरिका 13वें से दसवें स्थान पर लौटकर एक बार फिर शीर्ष दस में शामिल हो गया, जो दर्शाता है कि बड़ी अर्थव्यवस्थाएं भी तेजी से बदलते पूंजी प्रवाह और नीतिगत अनिश्चितताओं के प्रति संवेदनशील हैं।
यह रैंकिंग 70 अर्थव्यवस्थाओं के मूल्यांकन पर आधारित है और चार प्रमुख स्तंभों—आर्थिक प्रदर्शन, सरकारी कार्यकुशलता, व्यावसायिक दक्षता और बुनियादी ढांचे—को मापती है। स्विट्जरलैंड बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में अब भी मजबूत है, लेकिन निवेश और व्यापार पर निर्भरता ने उसे कमजोर किया। यह घटनाक्रम भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए भी एक संकेत है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रहने के लिए निवेश-अनुकूल नीतियों, मुद्रा स्थिरता और भू-राजनीतिक जोखिमों से निपटने की क्षमता अनिवार्य होती जा रही है। आने वाले वर्षों में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की बढ़त और गहरा सकती है, बशर्ते व्यापार तनाव कम हों और पूंजी प्रवाह सुचारू रहे।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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स्विट्ज़रलैंड ने वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता का ताज खो दिया, निवेश में गिरावट और व्यापार विवादों के कारण तीसरे स्थान पर आ गया। स्विस मॉडल अब भी मजबूत है, लेकिन सिंगापुर और हांगकांग का उदय एशिया की बढ़ती ताकत को दर्शाता है। जर्मनी भी पीछे खिसका, जो यूरोपीय अर्थव्यवस्थाओं के बीच बढ़ती खाई को उजागर करता है।
सिंगापुर ने आईएमडी रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल किया, स्विट्ज़रलैंड को पीछे छोड़ दिया जो अमेरिकी शुल्कों और मजबूत फ्रैंक से प्रभावित हुआ। हांगकांग दूसरे स्थान पर पहुंचा, शीर्ष पर एशिया की पकड़ मजबूत हुई। स्विट्ज़रलैंड का पतन पश्चिमी अर्थव्यवस्थाओं की पूंजी प्रवाह और भू-राजनीतिक तनावों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है।
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