
अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस पर श्वेत वर्चस्ववादियों का मार्च: ट्रंप प्रशासन ने इसे 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' बताया
वाशिंगटन में पैट्रियट फ्रंट के नकाबपोश सैकड़ों सदस्यों ने 'रिक्लेम अमेरिका' के नारे लगाए, अमेरिकी गृह सचिव ने इसे लोकतंत्र की 'अव्यवस्थित' लेकिन संवैधानिक अभिव्यक्ति करार दिया।
अमेरिका के 250वें स्वतंत्रता दिवस पर वाशिंगटन डीसी में श्वेत वर्चस्ववादी संगठन पैट्रियट फ्रंट के सैकड़ों सदस्यों ने सैन्य अनुशासन के साथ मार्च निकाला। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी और कॉन्फेडरेट झंडे लहराए और 'अमेरिका को पुनः प्राप्त करो' के नारे लगाए। ट्रंप प्रशासन के आंतरिक मंत्री डग बरगम ने रविवार को इस प्रदर्शन को 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' के तहत संरक्षित बताया, हालांकि उन्होंने समूह के विचारों से असहमति जताई।
पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारी सुबह 11 बजे से पहले शहर छोड़ गए और किसी हिंसा की सूचना नहीं है। जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय के उग्रवाद विशेषज्ञों का कहना है कि पैट्रियट फ्रंट 2017 की 'यूनाइट द राइट' रैली के बाद उभरा एक नव-फासीवादी समूह है जो आप्रवासन और बहु-जातीय लोकतंत्र को अस्तित्व के लिए खतरा मानता है और श्वेत जाति-राज्य की वकालत करता है। समूह की सोशल मीडिया के लिए कोरियोग्राफ की गई यह मार्च पोशाक (खाकी पैंट, नीली शर्ट, टोपी व चेहरा ढके) ने वाशिंगटनवासियों और ऑनलाइन आलोचकों के बीच घृणा और व्यंग्य को जन्म दिया।
सीएनएन से बातचीत में बरगम ने कहा, "वे जिन विचारों के लिए खड़े हैं, उनसे मैं संभवत: सहमत नहीं हो सकता, लेकिन अमेरिका के मूलभूत सिद्धांतों में से एक, जो लोकतंत्र को अव्यवस्थित बनाता है, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।" उन्होंने समूह की सीधे निंदा करने या राष्ट्रपति से ऐसा करने का आग्रह करने से परहेज किया और इसकी तुलना अन्य आपत्तिजनक राजनीतिक भाषणों से की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने भाषण में 'साम्यवादी खतरे' पर चेतावनी दी लेकिन मार्च का कोई उल्लेख नहीं किया। चार्लोट्सविले हिंसा के बाद 2017 में भी ट्रंप ने "दोनों पक्षों में बहुत अच्छे लोग" वाली टिप्पणी की थी, जिसने विवाद खड़ा किया था।
अमेरिकी नागरिक अधिकार संगठन जैसे सदर्न पॉवर्टी लॉ सेंटर पैट्रियट फ्रंट को 'श्वेत राष्ट्रवादी घृणा समूह' की श्रेणी में रखते हैं। बाइडन प्रशासन ने अति-दक्षिणपंथी उग्रवाद को प्रमुख खतरा माना था, जबकि ट्रंप प्रशासन ने मई में जारी आतंकवाद-रोधी रणनीति में 'हिंसक वामपंथी चरमपंथियों' को शीर्ष खतरों में शामिल किया है। इस मार्च ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और घृणास्पद विचारधाराओं के बीच की सीमा पर बहस को पुनर्जीवित किया है। फिलहाल, प्रशासन ने कोई कानूनी कदम उठाने के संकेत नहीं दिए हैं, और यह प्रकरण अमेरिकी लोकतंत्र की जटिलताओं पर वैश्विक बहस का हिस्सा बन गया है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.20 | neutral |
|---|---|---|
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.80 | critical |
The US administration faces a dilemma: defending free speech without legitimizing hate.
The frame presents the event as a balancing act between constitutional rights and social safety, using the rhetoric of a 'test' to suggest unresolved tension.
The international perspective condemning the march as a human rights violation is omitted.
Latin America denounces US tolerance of white nationalism as proof of international hypocrisy.
The frame uses a double-standard rhetoric, contrasting the US's stated values with their selective application.
The legal context of free speech as a constitutional principle is omitted.
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