
गाजा में अकाल टला, पर 67 फीसदी आबादी को भुखमरी का खतरा
अक्तूबर 2025 के युद्धविराम के बाद सहायता बढ़ने से स्थिति में सुधार आया, लेकिन वित्तीय कटौती और इस्राईली रोक के चलते लाभ कमजोर।
संयुक्त राष्ट्र समर्थित एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (आईपीसी) के 23 जुलाई के आकलन के अनुसार, गाजा पट्टी के सभी पाँच प्रशासनिक क्षेत्र इस समय ‘संकट’ (चरण 3) स्तर की तीव्र खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। अप्रैल-जून 2026 के दौरान 1.2 मिलियन (59 प्रतिशत) लोग संकट या उससे अधिक गंभीर स्थिति में थे, जो अक्तूबर 2025 के युद्धविराम के बाद मानवीय सहायता और व्यावसायिक आपूर्ति में वृद्धि के बावजूद दर्ज किया गया। आईपीसी का अनुमान है कि दिसंबर 2026 तक यह संख्या बढ़कर 1.4 मिलियन (67 प्रतिशत) हो जाएगी।
युद्धविराम के बाद खाद्य आपूर्ति और पोषण सेवाओं के त्वरित विस्तार से कुपोषण दरों में गिरावट आई है—तीव्र कुपोषण का स्तर अब स्वीकार्य श्रेणी में आ गया है—लेकिन अधिकांश परिवारों के लिए भोजन की मात्रा, गुणवत्ता और विविधता अपर्याप्त बनी हुई है। सहायता एजेंसियों के बजट में कमी और इस्राईल द्वारा लगाए गए प्रवेश प्रतिबंध इस सुधार को उलट सकते हैं। इस्राईली सेना द्वारा निर्धारित ‘यैलो लाइन’ लगातार पश्चिम की ओर खिसक रही है, जिससे 20 लाख से अधिक लोग पट्टी के एक-तिहाई हिस्से में सिमट गए हैं। केवल तीन प्रतिशत कृषि भूमि उपयोग योग्य है और गैर-दोहरे उपयोग वाली कृषि सामग्री के आयात पर भी पाबंदी जारी है।
प्रभावितों में 74,000 से अधिक पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चे और 25,000 गर्भवती एवं स्तनपान कराने वाली महिलाएँ शामिल हैं, जिन्हें अगले एक वर्ष में पोषण उपचार की आवश्यकता होगी। यूनिसेफ के अनुसार लंबे समय तक उचित पोषण न मिलने से बच्चों में ‘स्टंटिंग’ के मामले बढ़े हैं। स्वास्थ्य ढाँचा ध्वस्त है—अक्तूबर 2023 से अब तक कम से कम 1,700 स्वास्थ्यकर्मी मारे जा चुके हैं और जल-स्वच्छता व्यवस्था चरमरा गई है। आईपीसी ने चेतावनी दी है कि मानवीय पहुँच में थोड़ा सा भी व्यवधान हाल की उपलब्धियों को तेजी से पलट सकता है।
आगामी मील का पत्थर जुलाई-दिसंबर 2026 की अवधि का आईपीसी पूर्वानुमान है, जिसमें हालात और खराब होने की आशंका है। वित्तीय कमी के कारण गर्भवती महिलाओं के लिए पूरक आहार कार्यक्रम पहले ही जनवरी से मई के बीच आधे कर दिए गए हैं। स्थानीय खाद्य उत्पादन बहाली के संकेत केवल उन्हीं इलाकों में मिले हैं जहाँ समर्थन जारी रहा है, लेकिन वृहद स्तर पर पुनर्बहाली तब तक संभव नहीं जब तक पट्टी में प्रवेश करने वाली वस्तुओं पर से प्रतिबंध नहीं हटाए जाते।
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.90 | critical |
|---|---|---|
| इज़राइली प्रेस | −0.80 | critical |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.10 | neutral |
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.30 | critical |
Palestine suffers a planned genocide by Israel; the international community is complicit. Hunger is a weapon of war.
It attributes every statistic to Israeli political will, turning neutral indicators into proof of criminal intent.
It does not mention aid funding cuts as an independent factor, attributing everything to the occupation.
The Israeli army kills children every day; the ceasefire is fictitious. There is no real improvement.
It uses a daily impact testimonial (one child a day) to counter aggregate nutrition data, creating an emotional counter-narrative.
It does not report improvements in malnutrition rates or the role of international funds, focusing only on killings.
Independent monitoring shows acute hunger is rising despite progress. The international community must act on funding.
It relies on the authority of the IPC (technical body) and presents data as objective, avoiding attributions of blame.
It does not explicitly assign responsibility to Israel or Hamas, leaving the cause vague.
Humanitarian agencies are making progress but are hindered by restrictions and lack of funding; children remain the most vulnerable.
It combines data from multiple UN/NGO sources to create a picture of fragility, balancing improvement and risk.
It does not delve into the role of Israeli occupation as a structural cause, unlike the Latin American bloc.
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