
बुर्किना फासो ने फ्रांस से राजनयिक संबंध तोड़े, नव-उपनिवेशवादी महत्वाकांक्षाओं का आरोप
पश्चिम अफ्रीकी राष्ट्र ने पेरिस पर आतंकवादियों को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए 26 जून से संबंध समाप्त कर दिए, जो साहेल क्षेत्र में फ्रांस के घटते प्रभाव का ताजा संकेत है।
बुर्किना फासो की सैन्य सरकार ने शुक्रवार को पूर्व औपनिवेशिक शासक फ्रांस के साथ सभी राजनयिक संबंध तोड़ने की घोषणा की, जो 26 जून 2026 से प्रभावी होगी। संचार मंत्री गिल्बर्ट उएड्राओगो ने राजकीय टेलीविजन पर एक बयान में कहा कि पारस्परिक सम्मान, विश्वास, आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और राष्ट्रीय संप्रभुता पर आधारित संबंधों के लिए आवश्यक शर्तें अब मौजूद नहीं हैं। इस कदम के तहत दोनों देशों के बीच राजनयिक संस्थागत ढांचा समाप्त हो गया है, हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया कि इससे बुर्किनाबे और फ्रांसीसी जनता के बीच ऐतिहासिक, मानवीय और सांस्कृतिक संबंध प्रभावित नहीं होंगे।
बुर्किनाबे सरकार ने फ्रांस पर लगातार अपने हितों के विरुद्ध कार्य करने और 'नव-उपनिवेशवादी महत्वाकांक्षाओं' को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। बयान में कहा गया कि पेरिस 'विध्वंसक नेटवर्कों और आतंकवादियों' को सक्रिय समर्थन दे रहा है, जो देश और साहेल क्षेत्र को शोक में डुबो रहे हैं। फ्रांसीसी विदेश मंत्रालय ने पहले आतंकवाद के समर्थन के आरोपों को खारिज किया है। बुर्किना फासो पिछले एक दशक से अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट से जुड़े जिहादी समूहों की घातक हिंसा से जूझ रहा है, जिसमें हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों विस्थापित हुए हैं।
यह विच्छेद साहेल क्षेत्र में व्यापक भू-राजनीतिक पुनर्संरेखण का हिस्सा है। 2022 में कैप्टन इब्राहिम ट्राओरे के नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन के बाद से बुर्किना फासो ने माली (2021) और नाइजर (2023) की तरह फ्रांस के साथ सैन्य और राजनयिक संबंधों को क्रमिक रूप से समाप्त किया है। इन तीनों देशों ने साहेल राज्यों का गठबंधन (एईएस) बनाया है और सुरक्षा सहयोग के लिए रूस की ओर रुख किया है। रूसी विदेश खुफिया सेवा (एसवीआर) ने फरवरी 2026 में दावा किया था कि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अफ्रीका के 'अवांछित नेताओं' को खत्म करने की योजना को मंजूरी दी थी, और पेरिस 3 जनवरी 2026 को बुर्किना फासो में तख्तापलट की कोशिश में शामिल था, जिसका लक्ष्य राष्ट्रपति ट्राओरे को मारना था। मई 2025 में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मास्को में ट्राओरे से मुलाकात की और द्विपक्षीय सहयोग में प्रगति पर जोर दिया।
फ्रांस ने 1960 में स्वतंत्रता के बाद से बुर्किना फासो (तब अपर वोल्टा) में गहरा प्रभाव बनाए रखा था, लेकिन हाल के वर्षों में उसकी सैन्य उपस्थिति और विकास सहायता को लेकर स्थानीय आक्रोश बढ़ा। 2023 में बुर्किना फासो ने फ्रांसीसी सेना को एक महीने के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया था और सैन्य अताशे को 'विध्वंसक गतिविधियों' के लिए निष्कासित कर दिया था। फ्रांस ने जवाब में अपनी सहायता निलंबित कर दी थी। वर्तमान में, दोनों पक्षों के बीच किसी भी बातचीत की कोई घोषणा नहीं हुई है, और राजनयिक संबंधों की बहाली की संभावना अनिश्चित बनी हुई है।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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बुर्किना फासो का फ्रांस से संबंध तोड़ने का निर्णय पेरिस के लगातार हस्तक्षेप और नव-उपनिवेशवादी महत्वाकांक्षाओं का उचित जवाब है। रूसी खुफिया एजेंसियों ने पहले ही अफ्रीकी नेताओं को खत्म करने की फ्रांसीसी साजिशों का पर्दाफाश किया था, और यह विच्छेद पश्चिमी वर्चस्व की व्यापक अस्वीकृति को दर्शाता है। इस कदम को सच्ची संप्रभुता की ओर एक कदम और क्षेत्र में फ्रांसीसी प्रभाव के लिए एक झटका माना जा रहा है।
बुर्किना फासो में सैन्य जुंटा ने आपसी सम्मान की कमी का हवाला देते हुए फ्रांस के साथ राजनयिक संबंध तोड़ दिए हैं। हालांकि, शासन तेजी से सत्तावादी दिशा में बढ़ रहा है, राजनीतिक दलों को भंग कर रहा है और असहमति पर कार्रवाई कर रहा है। यह विच्छेद एक गंभीर सुरक्षा संकट के बीच हुआ है और इसे जुंटा के सत्ता के दमनकारी समेकन के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है।
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