
रूबियो की मनीला यात्रा: ईरान संकट और चीन की चुनौती के बीच अमेरिका का एशियाई सहयोगियों को भरोसा दिलाने का प्रयास
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो अगले सप्ताह मनीला में आसियान बैठकों में शामिल होंगे, जहां ईरान युद्ध से उपजी ऊर्जा असुरक्षा और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच वे एशियाई सहयोगियों को अमेरिकी प्रतिबद्धता का आश्वासन देंगे।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 19 से 23 जुलाई तक फिलीपींस की राजधानी मनीला में आसियान से जुड़ी तीन बहुपक्षीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य "एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है जो क्षेत्र और अमेरिकी जनता के लिए सुरक्षा, संरक्षण और समृद्धि सुनिश्चित करे।" यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब ईरान के साथ जारी सैन्य संघर्ष के कारण हॉरमुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले हाइड्रोकार्बन के 80 प्रतिशत हिस्से की आपूर्ति बाधित है, जिससे एशियाई देशों में ऊर्जा संकट गहरा गया है। साथ ही, क्षेत्र में चीन की बढ़ती सामरिक उपस्थिति और अमेरिकी चुनावों में हस्तक्षेप के आरोपों ने वाशिंगटन और उसके एशियाई सहयोगियों के बीच विश्वास बहाली की जरूरत पैदा कर दी है।
वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (सीएसआईएस) के विशेषज्ञों के अनुसार, रूबियो से अपेक्षा है कि वे दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यवहार की आलोचना करेंगे, लेकिन यह प्रयास संतुलित होगा ताकि चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ संभावित द्विपक्षीय वार्ता पटरी से न उतरे। दोनों नेताओं के बीच पिछले वर्ष भी आसियान मंच के इतर मुलाकात हुई थी, और इस बार उनकी बैठक का मुख्य एजेंडा सितंबर में वाशिंगटन में प्रस्तावित ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन की तैयारी करना हो सकता है। वहीं, जापानी विदेश मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि क्वाड (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के विदेश मंत्री भी इसी दौरान अलग से बैठक कर सकते हैं, जिसमें ऊर्जा सुरक्षा, दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला और समुद्री सुरक्षा पर सहयोग की पुष्टि की जाएगी।
दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की स्थिति अलग-अलग चिंताओं से जुड़ी है। फिलीपींस, जो इस वर्ष आसियान की अध्यक्षता कर रहा है, दक्षिण चीन सागर में आचार संहिता पर बातचीत को "सारगर्भित और प्रभावी" बनाने की कोशिश कर रहा है, जबकि म्यांमार के मामले में आसियान विदेश मंत्रियों ने 2021 के सैन्य तख्तापलट के बाद पहली बार अनौपचारिक वार्ता कर शांति योजना पर ठोस प्रगति की मांग की है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने रेडियो फारदा से कहा कि रूबियो की इस यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए, क्योंकि हॉरमुज जलडमरूमध्य के बंद होने से एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर भारी दबाव है। मई में बैंकॉक शिखर सम्मेलन में दक्षिण-पूर्व एशियाई नेताओं ने साझा ईंधन भंडार बनाने पर चर्चा की थी, जो इस संकट के प्रति क्षेत्र की सामूहिक प्रतिक्रिया को दर्शाता है।
विश्लेषकों का मानना है कि रूबियो की यात्रा की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एशियाई सहयोगी यह मानते हैं या नहीं कि अमेरिका के पास एक साथ कई मोर्चों पर उलझने की क्षमता और राजनीतिक इच्छाशक्ति है। मैरीलैंड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर लुकास मायर्स के हवाले से कहा गया है कि रूबियो को सहयोगियों को यह भरोसा दिलाना होगा कि ईरान युद्ध समाप्त होगा और अमेरिका चीन के मुकाबले अपनी प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखेगा। साथ ही, उन्हें निराश सहयोगियों का झुकाव चीन की ओर बढ़ने से रोकना होगा। इस यात्रा के दौरान आपूर्ति श्रृंखला सहनशीलता, महत्वपूर्ण खनिज और बुनियादी ढांचा सहयोग जैसे ठोस मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है, जो भारत जैसे दक्षिण एशियाई देशों के लिए भी प्रासंगिक हैं, क्योंकि क्वाड के मंच पर यही विषय प्रमुखता से उठाए जाएंगे।
फिलहाल, सभी पक्षों की निगाहें मनीला में होने वाली इन बैठकों पर टिकी हैं। अमेरिकी विदेश विभाग ने रूबियो की द्विपक्षीय वार्ताओं का विस्तृत कार्यक्रम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह तय है कि वे फिलीपींस के राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस से मिलेंगे और क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक भी आयोजित करने का प्रयास करेंगे। इन वार्ताओं के नतीजे न केवल आगामी ट्रंप-शी शिखर सम्मेलन की दिशा तय करेंगे, बल्कि यह भी स्पष्ट करेंगे कि बहुध्रुवीय संकटों के इस दौर में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अमेरिकी नेतृत्व कितना प्रभावी बना रह सकता है।
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | +0.10 | neutral |
|---|---|---|
| महाद्वीपीय यूरोपीय प्रेस | −0.10 | neutral |
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | 0.00 | neutral |
संयुक्त राज्य अमेरिका एक स्वतंत्र और खुले इंडो-पैसिफिक के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है, आसियान भागीदारों को स्थिरता प्रदान करता है।
अमेरिकी सक्रिय जुड़ाव पर जोर देकर और यात्रा को साझेदारी की स्वाभाविक निरंतरता के रूप में प्रस्तुत करके, ब्लॉक किसी भी प्रतिक्रियात्मक या संकट-प्रेरित उद्देश्यों को कम करता है, जिससे अमेरिका एक विश्वसनीय और सुसंगत भागीदार के रूप में दिखाई देता है।
ब्लॉक ट्रम्प-शी शिखर सम्मेलन और क्वाड बैठक की संभावना को छोड़ देता है, जो अन्य ब्लॉकों में उजागर किए गए हैं, ताकि ध्यान अमेरिका-आसियान साझेदारी पर बना रहे।
रुबियो की यात्रा क्षेत्रीय कैलेंडर में एक नियमित राजनयिक नियुक्ति है, जो तनावों की पृष्ठभूमि में है लेकिन बिना जोर के।
कई बैठकों की सूची बनाकर और तटस्थ भाषा का उपयोग करके, ब्लॉक यात्रा को सामान्य करता है और दोष या तात्कालिकता निर्धारित करने से बचता है।
ब्लॉक अन्य ब्लॉकों में मौजूद विशिष्ट अमेरिका-चीन शिखर सम्मेलन की तैयारी और ऊर्जा संकट के विवरण को छोड़ देता है, कार्यक्रम और क्वाड पर ध्यान केंद्रित करता है।
ट्रम्प प्रशासन शी जिनपिंग के साथ शिखर सम्मेलन के लिए जमीन तैयार कर रहा है, मनीला को चीन के साथ प्रतिस्पर्धा के लिए एक मंच के रूप में उपयोग कर रहा है।
ट्रम्प-शी की संभावित बैठक और लावरोव की उपस्थिति को उजागर करके, ब्लॉक यात्रा को एक नियमित आसियान बैठक से एक उच्च-दांव वाली राजनयिक चाल तक बढ़ा देता है।
ब्लॉक ईरान युद्ध के संदर्भ और दक्षिण पूर्व एशिया में ऊर्जा संकट को छोड़ देता है, इसके बजाय अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता पर ध्यान केंद्रित करता है।
अपना नज़रिया बढ़ाएँ
ब्राजील ने अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ WTO में परामर्श का अनुरोध किया
5 भाषाएँ · 9 स्रोत
Technology सेAI की मांग से बढ़ी मेमोरी की कीमतें, 100 डॉलर वाले स्मार्टफोन का बाजार खत्म होने की कगार पर
4 भाषाएँ · 7 स्रोत
Science & Health सेहेपेटाइटिस: टीकाकरण में 20% गिरावट, खामोश संक्रमण और जांच की नई रणनीति
7 भाषाएँ · 14 स्रोत