
चीन और जापान के पुन: प्रयोज्य रॉकेट परीक्षणों से अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा में नया अध्याय
एक ही सप्ताहांत में चीन ने समुद्र में जाल-आधारित रॉकेट रिकवरी का पहला सफल प्रदर्शन किया और जापान ने अपने प्रोटोटाइप पुन: प्रयोज्य रॉकेट की पहली उड़ान भरी।
दो दिनों के भीतर एशिया की दो प्रमुख अंतरिक्ष शक्तियों ने पुन: प्रयोज्य रॉकेट प्रौद्योगिकी में महत्वपूर्ण प्रगति दर्ज की, जिससे वैश्विक प्रक्षेपण बाजार में स्पेसएक्स के एकाधिकार को चुनौती मिलने की संभावना बढ़ गई है। 10 जुलाई को चीन ने लॉन्ग मार्च-10बी रॉकेट के पहले चरण को समुद्री प्लेटफॉर्म पर जाल-प्रणाली से सफलतापूर्वक पकड़ा, जो दुनिया में अपनी तरह का पहला ऑपरेशनल परीक्षण है। अगले दिन जापान की एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (जाक्सा) ने आरवी-एक्स प्रोटोटाइप की 40 सेकंड की उड़ान भरी, जिसमें रॉकेट ने 11 मीटर ऊंचाई तक जाकर ऊर्ध्वाधर स्थिति में सुरक्षित लैंडिंग की।
तकनीकी दृष्टि से चीन का जाल-आधारित रिकवरी सिस्टम स्पेसएक्स के फाल्कन 9 में उपयोग होने वाले लैंडिंग लेग्स से भिन्न है। चाइना एकेडमी ऑफ लॉन्च व्हीकल टेक्नोलॉजी के विशेषज्ञों के अनुसार, यह विधि रॉकेट के ऑनबोर्ड ढांचे को सरल बनाती है, वजन घटाती है और पेलोड क्षमता बढ़ाती है। लॉन्ग मार्च-10बी लगभग 63 मीटर ऊंचा दो-चरणीय रॉकेट है, जो पुन: प्रयोज्य अवस्था में 16 टन तक का पेलोड निचली पृथ्वी कक्षा में ले जा सकता है। जापान का आरवी-एक्स 7.3 मीटर लंबा और 1.8 मीटर व्यास का प्रोटोटाइप है, जिसे भविष्य के बड़े रॉकेटों के पुन: प्रयोज्य पहले चरण के लिए विकसित किया जा रहा है। जाक्सा ने बताया कि यह परीक्षण फ्रांस और जर्मनी के साथ संयुक्त विकास कार्यक्रम का हिस्सा है, और अगले वित्त वर्ष में फ्रेंच गुयाना से इसी इंजन वाले बड़े प्रोटोटाइप का प्रक्षेपण नियोजित है।
ये परीक्षण ऐसे समय में हुए हैं जब क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में चीन की दोहरे-उपयोग वाली गतिविधियों पर निगरानी बढ़ी हुई है। जून के मध्य में चीनी समुद्र विज्ञान पोत शियांग यांग होंग 22 ने ताइवान के पूर्वी जलक्षेत्र में तीन दिनों तक सर्वेक्षण किया। अमेरिकी नौसेना वॉर कॉलेज के रणनीतिकार जेम्स होम्स और चाइना मैरीटाइम स्टडीज इंस्टीट्यूट के निदेशक क्रिस्टोफर शर्मन जैसे पश्चिमी विश्लेषकों का आकलन है कि ऐसे सर्वेक्षणों से प्राप्त तापमान, लवणता और धारा संबंधी आंकड़े पनडुब्बी संचालन और पनडुब्बी-रोधी युद्ध के लिए ध्वनिक मॉडल तैयार करने में सहायक होते हैं। यह क्षेत्र गहरे पानी के कारण पनडुब्बियों की आवाजाही के लिए उपयुक्त माना जाता है।
भारत और दक्षिण एशिया के लिए ये घटनाक्रम अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता और लागत-प्रतिस्पर्धा के महत्व को रेखांकित करते हैं। चीन की सफलता से कम लागत वाले प्रक्षेपण बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी, जबकि जापान का सहयोगात्मक दृष्टिकोण तकनीकी साझेदारी का एक मॉडल प्रस्तुत करता है। अगला पड़ाव चीन द्वारा इसी वर्ष के अंत तक पुनर्प्राप्त पहले चरण का पुन: प्रक्षेपण और जापान द्वारा आरवी-एक्स को 100 मीटर की ऊंचाई तक ले जाने वाली परीक्षण उड़ानें होंगी।
| जापानी-कोरियाई प्रेस | 0.00 | neutral |
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| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | +0.10 | neutral |
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| भारतीय और दक्षिण एशियाई प्रेस | +0.10 | neutral |
Japan reports the test as a routine technical success, focusing on the precise flight data and the team's relief, without acknowledging the competitive context.
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