
अमेरिकी जनता का युद्ध से मोहभंग, ईरान समझौते पर गहराता संदेह
एक नए सर्वेक्षण में 58% अमेरिकी मतदाताओं ने ईरान युद्ध को आर्थिक रूप से बेकार बताया, जबकि 66% हालिया समझौता ज्ञापन को लेकर आशंकित हैं।
अमेरिका में कराए गए एक ताज़ा जनमत सर्वेक्षण के अनुसार, 58 प्रतिशत पंजीकृत मतदाताओं का मानना है कि ईरान के साथ युद्ध उस पर खर्च किए गए संसाधनों के लायक नहीं था। फाइनेंशियल टाइम्स के लिए फोकलडेटा द्वारा 26-30 जून के बीच कराए गए इस ऑनलाइन सर्वेक्षण में 1,795 लोग शामिल हुए। नतीजे बताते हैं कि 44 प्रतिशत उत्तरदाताओं का आकलन है कि युद्ध के बाद ईरान के मुकाबले वाशिंगटन की स्थिति कमज़ोर हुई है, जबकि 31 प्रतिशत इसे मज़बूत मानते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कार्यस्वीकृति दर गिरकर 36 प्रतिशत पर आ गई है, जो पिछले महीने से दो अंक कम है। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले डेमोक्रेटिक पार्टी को 44 प्रतिशत समर्थन प्राप्त है, जबकि रिपब्लिकन को 38 प्रतिशत, हालांकि रिपब्लिकन मतदाताओं में मतदान के प्रति उत्साह अधिक पाया गया।
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले महीने हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लेकर अमेरिकी जनता में गहरा संदेह है। सर्वेक्षण में 66 प्रतिशत मतदाताओं ने कहा कि यह दस्तावेज़ मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता के लिए बहुत कम या कुछ नहीं करेगा, और कुछ का मानना है कि इससे अस्थिरता बढ़ सकती है। केवल 20 प्रतिशत इसके सकारात्मक प्रभाव को लेकर आश्वस्त हैं। ओमान, स्विट्ज़रलैंड और पाकिस्तान की मध्यस्थता से तैयार इस 45 पृष्ठों के एमओयू में तेहरान ने लेबनान की सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े अनुच्छेद-1 को अपरिहार्य शर्त बना दिया है। क्षेत्रीय कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, ईरानी पक्ष लेबनान में स्थायी सैन्य विराम, क्षेत्रीय अखंडता की गारंटी और दक्षिणी लेबनान से इज़रायली बलों की वापसी की एक साथ और बिना शर्त पूर्ति चाहता है। तेहरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी को भी सौदेबाज़ी का औज़ार बनाया है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का पाँचवाँ हिस्सा गुज़रता है। ईरानी वार्ताकारों का कहना है कि जब तक लेबनान में सुरक्षा प्रतिबद्धताएँ अमल में नहीं आतीं, तब तक वे समृद्ध परमाणु सामग्री के पुनर्मिश्रण और जलडमरूमध्य में नौवहन बहाली जैसे अपने दायित्वों को टालेंगे।
युद्ध की आर्थिक कीमत ने अमेरिकी घरेलू राजनीति पर भारी दबाव डाला है। व्हाइट हाउस ने कांग्रेस से 67 अरब डॉलर की अतिरिक्त युद्ध निधि माँगी है, जबकि अब तक कम से कम 30 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। युद्ध के कारण पेट्रोल की कीमतों और उपभोक्ता मुद्रास्फीति में आई तेज़ वृद्धि ने स्वतंत्र मतदाताओं के बीच ट्रंप की लोकप्रियता को 21 प्रतिशत तक गिरा दिया है। नाटो को लेकर भी अमेरिकी मतदाताओं का रुख़ स्पष्ट है—53 प्रतिशत गठबंधन में बने रहने के पक्ष में हैं, जबकि 23 प्रतिशत ईरान युद्ध के बाद इससे बाहर निकलने की वकालत करते हैं। यूरोपीय सहयोगियों ने आर्थिक-रणनीतिक तर्क के ज़रिए वाशिंगटन को याद दिलाया है कि 300 अरब डॉलर के यूरोपीय शस्त्र कार्यक्रम से अमेरिकी रक्षा उद्योग की 1,95,000 नौकरियाँ जुड़ी हैं।
18 जून को हस्ताक्षरित एमओयू के तहत अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटाने और होर्मुज़ में ईरानी जहाज़रानी की बहाली का खाका है, जबकि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित न करने की प्रतिबद्धता जताई है। दोनों पक्ष 60 दिनों के भीतर परमाणु मुद्दे पर अलग से बातचीत करने पर सहमत हुए हैं, जिससे तेहरान पर लगे प्रतिबंध हटने की राह खुल सकती है। हालाँकि, पिछले सप्ताहांत हुई नई संघर्षविराम सहमति के बावजूद, रुक-रुक कर हो रही झड़पों ने समझौते की नाज़ुकता को रेखांकित किया है। दक्षिण एशिया के लिए, विशेष रूप से भारत जैसे बड़े तेल आयातक के लिए, होर्मुज़ की स्थिरता और ईरानी कच्चे तेल की उपलब्धता ऊर्जा सुरक्षा का केंद्रीय प्रश्न बनी हुई है। अगले कुछ सप्ताह में परमाणु वार्ता का स्वरूप और लेबनान में इज़रायली सैन्य उपस्थिति पर अमेरिकी दबाव की क्षमता इस पूरे ढाँचे की दिशा तय करेगी।
| ईरानी और संबद्ध प्रेस | −0.60 | critical |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | 0.00 | neutral |
| दक्षिण-पूर्व एशियाई प्रेस | −0.20 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | 0.00 | neutral |
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