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भू-राजनीति और राजनीतिशुक्रवार, 26 जून 2026

अमेरिकी मध्यस्थता पर मैक्रों के बयान से विवाद, रूस ने वाशिंगटन से भूमिका स्पष्ट करने को कहा

फ्रांसीसी राष्ट्रपति के इस दावे के बाद कि अमेरिका अब यूक्रेन में तटस्थ मध्यस्थ नहीं रहना चाहता, मास्को ने कहा कि उसे वाशिंगटन से इसकी पुष्टि नहीं मिली और अमेरिकी भूमिका पर अनिश्चितता बनी है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान के बाद कूटनीतिक हलकों में हलचल है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका अब रूस-यूक्रेन वार्ता में तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाना चाहता। मैक्रों के अनुसार, वाशिंगटन ने पहली बार एक दस्तावेज़ अपनाया है जिसमें यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता, सैन्य और ऊर्जा सहायता तथा रूस-विरोधी प्रतिबंधों का समर्थन किया गया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैक्रों को वाशिंगटन का अधिवक्ता या प्रवक्ता नहीं माना जा सकता और रूस को अमेरिका से ऐसे किसी रुख की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है। रूसी संसद की अंतरराष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष अलेक्सेई चेपा ने भी मैक्रों के दावे को तथ्य के रूप में न लेने की सलाह दी और उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति ट्रंप और पुतिन के बीच सीधा संवाद स्थिति स्पष्ट करेगा।

अमेरिकी पक्ष की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अलास्का शिखर वार्ता में किसी समझौते से इनकार किया और कहा कि वहां केवल प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका यूक्रेन में शांति प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है। इसके जवाब में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इसे ‘अति सुंदर नहीं’ बताते हुए तर्क दिया कि यदि एक पक्ष ने प्रस्ताव रखे और दूसरे ने उन्हें स्वीकार कर लिया, तो इसे समझौता न मानना उचित नहीं है। लावरोव ने वाशिंगटन से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि वह शांति प्रयासों में मध्यस्थ है या नहीं। पेस्कोव ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका को ‘पूर्णतः तटस्थ’ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह यूक्रेन को हथियारों और प्रौद्योगिकी की आपूर्ति जारी रखे हुए है।

यूरोपीय संदर्भ में, मैक्रों का यह बयान उनकी उस व्यापक कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वे यूक्रेन शांति प्रक्रिया में यूरोप की भूमिका को मजबूत करना चाहते हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति का रुख पहले अपेक्षाकृत नरम था, लेकिन बाद में वे कीव के प्रबल समर्थक बन गए और अब पुनः मध्यस्थता की स्थिति में आने का प्रयास कर रहे हैं। रूसी उप विदेश मंत्री के अनुसार, यूरोपीय देश और यूक्रेन अलास्का में हुई सहमतियों को विफल करने का प्रयास कर रहे हैं। अगस्त 2025 में अलास्का में हुई पुतिन-ट्रंप मुलाकात में जिन सिद्धांतों पर चर्चा हुई, उनमें यूक्रेन का नाटो सदस्यता से इनकार और नए क्षेत्रों पर रूसी नियंत्रण शामिल थे, लेकिन फरवरी 2026 में वाशिंगटन ने इन ‘अलास्का सिद्धांतों’ से दूरी बना ली।

मास्को ने अमेरिकी मध्यस्थता के प्रति अपने खुलेपन को दोहराया है और यूरोपीय देशों तथा कीव पर वाशिंगटन के प्रभाव को महत्वपूर्ण बताया है। साथ ही, रूसी पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि ईरान मुद्दे के समाधान के बाद ट्रंप प्रशासन के यूक्रेन मध्यस्थता पर पुनः ध्यान केंद्रित करने की संभावना है। फिलहाल, मैक्रों के दावे की वाशिंगटन से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और रूस अमेरिकी भूमिका को लेकर स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहा है।

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ

57%
लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
रूसी और सीआईएस प्रेसईरानी और संबद्ध प्रेस
रूसी और सीआईएस प्रेस/ राजकीय
संदेहव्यावहारिकता

मॉस्को का तर्क है कि वाशिंगटन को तटस्थ मध्यस्थ नहीं माना जा सकता क्योंकि वह कीव को हथियारों की आपूर्ति जारी रखता है। क्रेमलिन ने राष्ट्रपति मैक्रों के इस दावे को खारिज कर दिया कि अमेरिका ने तटस्थता छोड़ दी है, यह कहते हुए कि पेरिस वाशिंगटन की ओर से नहीं बोलता। रूस इस बात पर जोर देता है कि उसने अलास्का शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया था, जो किसी समझौते से अमेरिकी इनकार का खंडन करता है, और अमेरिकी भूमिका पर स्पष्टता की मांग करता है।

ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
उदासीनतासंदेह

राष्ट्रपति मैक्रों ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका अब यूक्रेन पर तटस्थ नहीं है, अब वह उसकी क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है और रूस पर प्रतिबंध लगाता है। विदेश मंत्री लावरोव ने वाशिंगटन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या वह शांति मध्यस्थ बनना चाहता है, जबकि विदेश मंत्री रुबियो ने इस बात से इनकार किया कि अलास्का बैठक में कोई समझौता हुआ था। अमेरिका का कहना है कि वह रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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ट्रंप ने ईरान पर ओरमुज में ड्रोन हमले का आरोप लगाया, संघर्षविराम उल्लंघन करार दिया·सिएटल में इंद्रधनुषी झंडों के साए में ईरान-मिस्र का निर्णायक मुक़ाबला·कनाडा, भारत, रूस और ऑस्ट्रेलिया में किशोरों पर हमले, अपहरण और यौन उत्पीड़न के आरोप·जलवायु परिवर्तन ने यूरोप की रिकॉर्डतोड़ गर्मी को 'असंदिग्ध' रूप से संभव बनाया: अध्ययन·वैश्विक प्रयुक्त कार बाजार में आपूर्ति संकट और मूल्यह्रास के नए समीकरण·ट्यूनीशिया और सोमालिया में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को कठोर सज़ाएं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गहराता संकट·स्वीडन के एलांगा का आंसुओं से जश्न तक का सफर: ड्रॉ के बाद भी समझे हार, साथियों ने बताई सच्चाई·विश्व कप 2026 में हाइड्रेशन ब्रेक का विवाद और सेहत से जुड़ी बड़ी सीख·ट्रंप ने ईरान पर ओरमुज में ड्रोन हमले का आरोप लगाया, संघर्षविराम उल्लंघन करार दिया·सिएटल में इंद्रधनुषी झंडों के साए में ईरान-मिस्र का निर्णायक मुक़ाबला·कनाडा, भारत, रूस और ऑस्ट्रेलिया में किशोरों पर हमले, अपहरण और यौन उत्पीड़न के आरोप·जलवायु परिवर्तन ने यूरोप की रिकॉर्डतोड़ गर्मी को 'असंदिग्ध' रूप से संभव बनाया: अध्ययन·वैश्विक प्रयुक्त कार बाजार में आपूर्ति संकट और मूल्यह्रास के नए समीकरण·ट्यूनीशिया और सोमालिया में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को कठोर सज़ाएं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर गहराता संकट·स्वीडन के एलांगा का आंसुओं से जश्न तक का सफर: ड्रॉ के बाद भी समझे हार, साथियों ने बताई सच्चाई·विश्व कप 2026 में हाइड्रेशन ब्रेक का विवाद और सेहत से जुड़ी बड़ी सीख·
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अमेरिकी मध्यस्थता पर मैक्रों के बयान से विवाद, रूस ने वाशिंगटन से भूमिका स्पष्ट करने को कहा

फ्रांसीसी राष्ट्रपति के इस दावे के बाद कि अमेरिका अब यूक्रेन में तटस्थ मध्यस्थ नहीं रहना चाहता, मास्को ने कहा कि उसे वाशिंगटन से इसकी पुष्टि नहीं मिली और अमेरिकी भूमिका पर अनिश्चितता बनी है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के उस बयान के बाद कूटनीतिक हलकों में हलचल है, जिसमें उन्होंने कहा कि अमेरिका अब रूस-यूक्रेन वार्ता में तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभाना चाहता। मैक्रों के अनुसार, वाशिंगटन ने पहली बार एक दस्तावेज़ अपनाया है जिसमें यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता, सैन्य और ऊर्जा सहायता तथा रूस-विरोधी प्रतिबंधों का समर्थन किया गया है। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मैक्रों को वाशिंगटन का अधिवक्ता या प्रवक्ता नहीं माना जा सकता और रूस को अमेरिका से ऐसे किसी रुख की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं मिली है। रूसी संसद की अंतरराष्ट्रीय समिति के उपाध्यक्ष अलेक्सेई चेपा ने भी मैक्रों के दावे को तथ्य के रूप में न लेने की सलाह दी और उम्मीद जताई कि राष्ट्रपति ट्रंप और पुतिन के बीच सीधा संवाद स्थिति स्पष्ट करेगा।

अमेरिकी पक्ष की ओर से विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अलास्का शिखर वार्ता में किसी समझौते से इनकार किया और कहा कि वहां केवल प्रस्तावों पर चर्चा हुई थी। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका यूक्रेन में शांति प्रक्रिया में रचनात्मक भूमिका निभाने को तैयार है। इसके जवाब में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने इसे ‘अति सुंदर नहीं’ बताते हुए तर्क दिया कि यदि एक पक्ष ने प्रस्ताव रखे और दूसरे ने उन्हें स्वीकार कर लिया, तो इसे समझौता न मानना उचित नहीं है। लावरोव ने वाशिंगटन से यह स्पष्ट करने को भी कहा कि वह शांति प्रयासों में मध्यस्थ है या नहीं। पेस्कोव ने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिका को ‘पूर्णतः तटस्थ’ नहीं कहा जा सकता, क्योंकि वह यूक्रेन को हथियारों और प्रौद्योगिकी की आपूर्ति जारी रखे हुए है।

यूरोपीय संदर्भ में, मैक्रों का यह बयान उनकी उस व्यापक कोशिश का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वे यूक्रेन शांति प्रक्रिया में यूरोप की भूमिका को मजबूत करना चाहते हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति का रुख पहले अपेक्षाकृत नरम था, लेकिन बाद में वे कीव के प्रबल समर्थक बन गए और अब पुनः मध्यस्थता की स्थिति में आने का प्रयास कर रहे हैं। रूसी उप विदेश मंत्री के अनुसार, यूरोपीय देश और यूक्रेन अलास्का में हुई सहमतियों को विफल करने का प्रयास कर रहे हैं। अगस्त 2025 में अलास्का में हुई पुतिन-ट्रंप मुलाकात में जिन सिद्धांतों पर चर्चा हुई, उनमें यूक्रेन का नाटो सदस्यता से इनकार और नए क्षेत्रों पर रूसी नियंत्रण शामिल थे, लेकिन फरवरी 2026 में वाशिंगटन ने इन ‘अलास्का सिद्धांतों’ से दूरी बना ली।

मास्को ने अमेरिकी मध्यस्थता के प्रति अपने खुलेपन को दोहराया है और यूरोपीय देशों तथा कीव पर वाशिंगटन के प्रभाव को महत्वपूर्ण बताया है। साथ ही, रूसी पक्ष ने यह भी संकेत दिया है कि ईरान मुद्दे के समाधान के बाद ट्रंप प्रशासन के यूक्रेन मध्यस्थता पर पुनः ध्यान केंद्रित करने की संभावना है। फिलहाल, मैक्रों के दावे की वाशिंगटन से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और रूस अमेरिकी भूमिका को लेकर स्पष्टता की प्रतीक्षा कर रहा है।

स्रोतों में मतभेद

भू-राजनीति और राजनीति · 8 स्रोत · 4 भाषाएँ

57%उच्च

स्रोत कैसे एक ही तथ्यों को अलग-अलग तरीके से बयाँ करते हैं।

विभाजन कैसे है

समर्थक11%
न्यूनत्र33%
निंदक56%

वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।

2 संपादकीय समूह · 4 भाषाएँ

लहज़ातापमानफ़ोकसस्थितिक्षितिज
रूसी और सीआईएस प्रेसईरानी और संबद्ध प्रेस
रूसी और सीआईएस प्रेस/ राजकीय
संदेहव्यावहारिकता

मॉस्को का तर्क है कि वाशिंगटन को तटस्थ मध्यस्थ नहीं माना जा सकता क्योंकि वह कीव को हथियारों की आपूर्ति जारी रखता है। क्रेमलिन ने राष्ट्रपति मैक्रों के इस दावे को खारिज कर दिया कि अमेरिका ने तटस्थता छोड़ दी है, यह कहते हुए कि पेरिस वाशिंगटन की ओर से नहीं बोलता। रूस इस बात पर जोर देता है कि उसने अलास्का शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी प्रस्तावों को स्वीकार कर लिया था, जो किसी समझौते से अमेरिकी इनकार का खंडन करता है, और अमेरिकी भूमिका पर स्पष्टता की मांग करता है।

ईरानी और संबद्ध प्रेस/ शासन
उदासीनतासंदेह

राष्ट्रपति मैक्रों ने घोषणा की कि संयुक्त राज्य अमेरिका अब यूक्रेन पर तटस्थ नहीं है, अब वह उसकी क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन करता है और रूस पर प्रतिबंध लगाता है। विदेश मंत्री लावरोव ने वाशिंगटन से यह स्पष्ट करने की मांग की कि क्या वह शांति मध्यस्थ बनना चाहता है, जबकि विदेश मंत्री रुबियो ने इस बात से इनकार किया कि अलास्का बैठक में कोई समझौता हुआ था। अमेरिका का कहना है कि वह रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

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