
ट्रंप ने AI वीडियो से आलोचकों का उपहास किया, 'डाइट कोक' को बताया 'ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम' का इलाज
अमेरिकी राष्ट्रपति ने ट्रुथ सोशल पर एक डीपफेक क्लिप साझा की, जिसमें हॉलीवुड हस्तियों को मानसिक रोगी के रूप में दिखाकर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर कटाक्ष किया गया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार देर रात अपने सोशल प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से निर्मित एक विवादास्पद वीडियो प्रकाशित किया। इस 90 सेकंड की क्लिप में वे स्वयं को एक चिकित्सक के रूप में प्रस्तुत करते हैं और 'ट्रंप डिरेंजमेंट सिंड्रोम' (TDS) नामक एक काल्पनिक मानसिक विकार का 'उपचार' बताते हैं। वीडियो में AI-जनित आवाज़ में ट्रंप कहते हैं, 'क्या आपको या आपके किसी परिचित को TDS का निदान हुआ है? लक्षण निरंतर हो सकते हैं। सौभाग्य से, मैं डॉ. ट्रंप हूं और मेरे पास एक उपचार योजना है।' इसके बाद रॉबर्ट डी नीरो, जूलिया रॉबर्ट्स, व्हूपी गोल्डबर्ग और रोज़ी ओ'डॉनेल जैसे आलोचकों के डीपफेक अवतार अपने कथित लक्षणों का वर्णन करते हैं, जिनमें अनिद्रा, क्रोध और भविष्य की चिंता शामिल है।
वीडियो का समापन AI-ट्रंप द्वारा 'उपचार' बताने के साथ होता है: 'फर्जी खबरें बंद करें, प्रार्थना करें, और यदि कभी चिंता महसूस हो तो मेरी तरह एक डाइट कोक लें, आप अपने जीवन में उल्लेखनीय अंतर देखेंगे।' अमेरिकी मीडिया संस्थानों के अनुसार, यह पोस्ट ट्रंप द्वारा हाल के महीनों में साझा की गई AI-जनित सामग्री की श्रृंखला में नवीनतम है, जिसमें वे नियमित रूप से राजनीतिक विरोधियों और मशहूर हस्तियों का उपहास करने के लिए डीपफेक तकनीक का प्रयोग करते रहे हैं।
यूरोपीय और मध्य-पूर्वी मीडिया आउटलेट्स ने इस घटनाक्रम को ट्रंप की संचार रणनीति के एक व्यापक पैटर्न के रूप में रेखांकित किया है। ब्रिटेन के द इंडिपेंडेंट और स्पेन के ला वेंगार्डिया जैसे स्रोतों ने बताया कि ट्रंप ने पूर्व में भी AI का उपयोग करते हुए स्वयं को ईसा मसीह, सुपरमैन और पोप के रूप में चित्रित किया था, जिनमें से कुछ पोस्ट को कड़ी प्रतिक्रिया के बाद हटाना पड़ा। अप्रैल में पोप लियो XIV के साथ विवाद के दौरान ट्रंप द्वारा साझा की गई ईसा मसीह वाली छवि ने रिपब्लिकन सांसदों तक की आलोचना झेली थी। रूसी वेदोमोस्ती और अरबी अन-नहर ने भी इस वीडियो को ट्रंप के आलोचकों के प्रति व्यंग्यात्मक रवैये के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें 'TDS' शब्द का राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल दिखता है।
भारतीय और इज़राइली मीडिया ने इस घटना को ट्रंप की डिजिटल उपस्थिति के एक विचित्र पहलू के रूप में कवर किया। टाइम्स ऑफ इंडिया और किकर हशब्बत जैसे आउटलेट्स ने वीडियो की विषय-वस्तु का तथ्यात्मक विवरण देते हुए इसे 'विचित्र' और 'विवादास्पद' करार दिया, लेकिन व्यापक भू-राजनीतिक विश्लेषण से परहेज किया। फोर्ब्स जैसे अमेरिकी व्यावसायिक प्रकाशनों ने इस पोस्ट को ट्रंप के 'देर रात के पोस्टों में विरोधियों का मजाक उड़ाने' के ताज़ा उदाहरण के रूप में देखा, साथ ही यह भी नोट किया कि यह वीडियो व्हाइट हाउस की उपलब्धियों और नए एयर फोर्स वन को दिखाने वाली दो क्लिप के बीच साझा किया गया था।
विश्लेषकों के अनुसार, यह घटनाक्रम अमेरिकी राजनीतिक संवाद में AI-जनित गलत सूचना और डीपफेक के बढ़ते सामान्यीकरण की ओर इशारा करता है। जहां ट्रंप समर्थक इसे हानिरहित व्यंग्य मानते हैं, वहीं आलोचक इसे सार्वजनिक बहस को विषाक्त बनाने और मीडिया तथा राजनीतिक विरोधियों के प्रति अविश्वास पैदा करने की जानबूझकर की गई कोशिश के रूप में देखते हैं। वीडियो में 'फर्जी खबरें बंद करने' का आह्वान ट्रंप के मीडिया विरोधी अभियान का ही विस्तार है। फिलहाल, व्हाइट हाउस की ओर से इस पोस्ट पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, और न ही इसे हटाया गया है, जो दर्शाता है कि प्रशासन इस तरह की सामग्री को अपनी संचार रणनीति का स्वीकार्य हिस्सा मानता है।
| अटलांटिक / अंग्रेज़ी-भाषी प्रेस | −0.70 | critical |
|---|---|---|
| रूसी और सीआईएस प्रेस | −0.20 | neutral |
| लैटिन अमेरिकी प्रेस | −0.50 | critical |
Satire exposes Trump's hypocrisy: the 'doctor' prescribing a sugary drink is the perfect metaphor for a sick leadership.
Irony is used to turn a viral video into a moral judgment on the public figure, leveraging the contrast between medical authority and the absurdity of the message.
No mention that the video might have been created by Trump supporters as self-deprecation, nor is the deepfake phenomenon contextualized as cross-partisan.
The West gets lost in trivialities while the real world faces far more serious crises: the video is just smoke and mirrors.
The video's importance is minimized by placing it in a hierarchy of priorities where threats to Russian security and global stability are far more relevant.
No analysis of the video's potential impact on American public opinion, nor recognition that political satire can have real effects.
Laughing at Trump is easy, but the same superficiality applies to our own leaders: the video becomes a mirror for the entire political class.
The critique is universalized: the video is not just about Trump, but about a model of spectacle politics that also affects Latin America, inviting broader reflection.
No mention that the video was produced by US actors and that its reception in Latin America might vary greatly by country.
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