
यूरोप और ईरान में गर्मी का कहर: फ्रांस में 41°C तक पारा, ब्रिटेन में भी अलर्ट
फ्रांस, इटली, ब्रिटेन और स्पेन सहित यूरोप के कई देश भीषण गर्मी की लहर से जूझ रहे हैं, वहीं ईरान में बारिश और ओलावृष्टि के बाद अगले सप्ताह तापमान में तेज वृद्धि की आशंका है।
यूरोप इस समय एक भीषण और लंबी गर्मी की लहर की चपेट में आ गया है, जो आने वाले दिनों में और विकराल रूप ले सकती है। फ्रांस में तापमान स्थानीय स्तर पर 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है, जबकि इटली के उत्तरी और दक्षिणी आंतरिक इलाकों में पारा 40 डिग्री के करीब पहुंच सकता है। ब्रिटेन के मौसम विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है, जहां अगले सप्ताह की शुरुआत में तापमान 33 डिग्री तक जा सकता है – कुछ क्षेत्रों के लिए यह कैरिबियाई द्वीप बारबाडोस से भी अधिक गर्म होगा। स्पेन की मौसम एजेंसी ने कई प्रांतों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि को देखते हुए पीली और नारंगी चेतावनी जारी की है। यह लू मई के अंत में आई पिछली गर्म लहर से कहीं अधिक तीव्र और स्थायी है, और सप्ताहांत तक मध्य-उत्तरी इटली और सार्डिनिया के भीतरी भागों में अधिकतम तापमान 35-36 डिग्री तथा न्यूनतम 20 डिग्री से ऊपर रहने का पूर्वानुमान है।
इसी दौरान पश्चिम एशिया, विशेषकर ईरान में मौसम एक अलग ही मोड़ ले रहा है। वहां फिलहाल उत्तर-पश्चिमी प्रांतों – पश्चिम और पूर्वी अज़रबैजान, अर्दबील और माज़ंदरान की ऊंचाइयों – में रुक-रुक कर तेज बारिश, ओलावृष्टि और वज्रपात की घटनाएं हो रही हैं। मौसम विशेषज्ञों ने इन इलाकों के लिए नारंगी और पीली चेतावनी जारी की है, जिसमें अचानक बाढ़, नदियों के उफान, सड़कों पर पानी भरने और कृषि को नुकसान की आशंका जताई गई है। हालांकि, शनिवार और रविवार से मौसम के स्थिर होने की संभावना है, और सोमवार से देश के उत्तरी हिस्से में तापमान में क्रमिक वृद्धि शुरू हो जाएगी। पूर्वी क्षेत्रों, खासकर ज़ाबोल में, तेज हवाओं और धूल भरी आंधियों का सिलसिला भी जारी रहने का अनुमान है।
यह दोहरी मौसमी तस्वीर – एक ओर यूरोप में शुष्क और प्रचंड गर्मी, दूसरी ओर ईरान में संवहनीय वर्षा के बाद तापमान में उछाल – वैश्विक जलवायु अस्थिरता के व्यापक पैटर्न की ओर इशारा करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जून के मध्य में ही इतनी तीव्र लू का आना गर्मियों के पूर्वानुमानों को और चिंताजनक बना रहा है। दक्षिण एशिया, विशेषकर भारत के संदर्भ में देखें तो यह घटनाक्रम मानसून-पूर्व गर्मी और जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती चरम मौसमी घटनाओं की याद दिलाता है। भारत में इस वर्ष भी अप्रैल-मई में रिकॉर्डतोड़ लू चली, और अब मानसून के आगमन के साथ बाढ़ और सूखे की एक साथ मार झेलनी पड़ रही है।
आने वाले सप्ताह में यूरोपीय देशों को गर्मी के नए रिकॉर्ड का सामना करना पड़ सकता है, जबकि ईरान में बारिश से राहत के बाद पारा तेजी से चढ़ेगा। अधिकारियों ने नागरिकों से दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त जलपान और कमजोर वर्गों की देखभाल की अपील की है। कृषि और परिवहन क्षेत्रों पर भी इस लू का व्यापक असर पड़ने की आशंका है। मौसम वैज्ञानिक इस बात पर जोर दे रहे हैं कि ऐसी आरंभिक और तीव्र गर्म लहरें अब अपवाद नहीं, बल्कि बदलती जलवायु का नया सामान्य बनती जा रही हैं।
वही कहानी कहीं और कैसे बताई जाती है।
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ईरानी मीडिया घरेलू मौसम चेतावनियों पर ध्यान केंद्रित करता है, नागरिकों को उत्तरी और पूर्वी प्रांतों में अचानक बाढ़, ओलावृष्टि और आंधी-तूफान के साथ-साथ आने वाली गर्मी की लहर के प्रति सचेत करता है। रिपोर्टों में बाढ़, सड़क अवरोध और कृषि क्षति के जोखिमों का विवरण दिया गया है, जबकि यूरोपीय गर्मी की लहर को दर्शकों के लिए अप्रासंगिक माना गया है।
यूरोपीय आउटलेट्स पूरे महाद्वीप में भीषण और लंबी गर्मी की लहर की रिपोर्ट करते हैं, जिसमें फ्रांस और इटली में तापमान 40-41°C तक पहुंचने और यूके में असामान्य रूप से उच्च गर्मी पड़ने का अनुमान है। कवरेज में तीव्रता को रेखांकित करने के लिए मानचित्रों और उष्णकटिबंधीय जलवायु से तुलना का उपयोग किया जाता है, जबकि ईरान में एक साथ हो रहे चरम मौसम पर चुप्पी साध ली जाती है।
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